इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में होगी 5.2 फीसदी की गिरावट! भीषण मंदी की है आशंका

इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में होगी 5.2 फीसदी की गिरावट! भीषण मंदी की है आशंका
डन एंड ब्रॉडस्ट्रीट ने मार्च 2020 में भारत की रेटिंग DB4D से कम कर DB5C की है. इसका मतलब है कि उच्च जोखिम और रिटर्न को लेकर बहुत ज्‍यादा अनिश्चितता का माहौल रहेगा.

डन एंड ब्रॉडस्ट्रीट की 'देशों के जोखिम और वैश्विक परिदृश्य रिपोर्ट' में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) वित्त वर्ष 2022 से पहले कोविड-19 (COVID-19) के पहले के स्तर पर नहीं लौट पाएगी.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के हर दिन बढ़ते मामलों को देखते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) में वित्‍त वर्ष 2020 के दौरान 5.2 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है. कोविड-19 के कारण करीब-करीब ठप हुई कारोबारी गतिविधियों (Economic Activities) के कारण दुनिया के ज्‍यादातर देशों की आर्थिक संभावनाएं धुंधली दिख रही हैं. डन एंड ब्रॉडस्ट्रीट की 'देशों के जोखिम और वैश्विक परिदृश्य रिपोर्ट' में कहा गया है कि व्यापक वैश्विक परिदृश्य धुंधला है. साथ ही इसमें कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 2022 से पहले कोविड-19 के पहले के स्तर पर नहीं लौट पाएगी.

दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद सबसे बड़ी गिरावट का है अनुमान
डन एंड ब्रॉडस्ट्रीट की रिपोर्ट में 132 देशों को शामिल किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, डन एंड ब्रॉडस्ट्रीट का अनुमान है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में 2020 में 5.2 प्रतिशत की गिरावट आएगी. यह दूसरे विश्व युद्ध (World War-2) के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है. ये 2009 में 1.9 फीसदी की गिरावट के मुकाबले कहीं ज्‍यादा बड़ी है. एशिया प्रशांत क्षेत्र के 2020 के खत्‍म होने से पहले कोविड-19 के आर्थिक हालात पर पड़े प्रभावों से बाहर आने की उम्‍मीद कम है. डन एंड ब्रॉडस्ट्रीट के मुख्य अर्थशस्त्री अरुण सिंह ने कहा कि कई देश लॉकडाउन में ढील दे रहे हैं, लेकिन विकास और गिरावट की अलग-अलग तस्वीर सामने आई हैं.

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2022 से पहले वापसी नहीं कर पाएगी वैश्विक अर्थव्‍यव्‍स्‍था


अरुण सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी और धीमी आर्थिक गतिविधियों के बीच भीषण मंदी की आशंका बनी हुई है. हमारा अनुमान है कि विश्व अर्थव्यवस्था 2022 से पहले किसी भी तरह से वैश्विक महामारी के पहले के स्तर पर नहीं लौट पाएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में अगर कोई पुनरूद्धार होता है तो इस पर कई कारकों का उलटा असर प्रभाव पड़ेगा. इसमें सबसे पहले 'लॉकडाउन' में ढील के बावजूद सामाजिक दूरी का पालन और बड़ी संख्या में बेरोजगारी व गरीबी शामिल हैं.

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चार दशक की वृद्धि के बाद अब गिरेगी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था
सिंह ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2020-21 में गिरावट आने का अनुमान है. यह चार दशक की लगातार वृद्धि के बाद पहला मौका होगा, जब भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की जाएगी. उन्होंने कहा कि मार्च 2020 में हमने भारत की रेटिंग DB4D से कम कर DB5C की. अर्थव्यवस्था के नीचे जाने और जोखिम का स्तर 1994 के बाद सबसे ऊंचा होने के आधार पर यह किया गया, डीबी5 का मतलब है कि उच्च जोखिम और रिटर्न को लेकर बहुत ज्‍यादा अनिश्चितता का माहौल रहेगा.
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