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2020 में FDI के मामले में फिसड्डी साबित हुए विकसित देश, भारत को हुआ बड़ा फायदा

वैश्विक ट्रेंड के उलट भारत में 2020 के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 13 फीसदी बढ़ा है.
वैश्विक ट्रेंड के उलट भारत में 2020 के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 13 फीसदी बढ़ा है.

कोरोना वायरस महामारी के बीच 2020 में दुनियाभर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कम हुआ है. वैश्विक स्तर पर इसमें 42 फीसदी की गिरावट आई है. लेकिन इसके उलट भारत में एफडीआई 13% तक बढ़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2021, 8:54 AM IST
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नई दिल्ली. पिछले साल भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment) वैश्विक ट्रेंड के बिल्कुल उलट रहा है. एक तरफ दुनियाभर में एफडीआई ग्रोथ (FDI Growth in 2020) में 42 फीसदी तक की गिरावट रही, वहीं दूसरी तरफ भारत के लिए इसमें 13 फीसदी का इजाफा हुआ है. 2019 में वैश्विक स्तर पर एफडीआई करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर रहा था लेकिन 2020 में यह कम होकर 859 ​अरब डॉलर के स्तर पर आ गया. यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) द्वारा जारी किए गए 38वें वैश्विक निवेश ट्रेन्ड मॉनिटर की एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिलती है. इस रिपोर्ट में आगे यह भी बताया गया कि 2020 के अंत तक एफडीआई का स्तर 2009 के वैश्विक वित्तीय संकट (Global Financial Crisis) से भी 30 फीसदी तक नीचे रहा. यह 1990 के दशक के स्तर पर रहा.

2020 के दौरान एफडीआई में यह रिकॉर्ड गिरावट विकसित देशों में सबसे ज्यादा देखने को मिली. इन देशों में कुल एफडीआई करीब 69 फीसदी कम होकर 229 अरब डॉलर पर आ गई. यूरोप समेत दुनियाभर के कई देशों में एफडीआई निवेश निगेटिव दायरे में भी देखने को मिला. अमेरिका में यह 49 फीसदी घटकर 134 अरब डॉलर पर रही. जबकि, भारत में 2020 के दौरान कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 13 फीसदी तक बढ़ा. रिपोर्ट में बताया गया कि डिजिटल सेक्टर में निवेश की वजह से यह तेजी देखने को मिली.

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चीन में आया सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
विकासशील देशों (Developing Nations) में एफडीआई में 12 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और यह 616 अरब डॉलर पर रही. वैश्विक एफडीआई में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी 72 फीसदी तक पहुंच चुकी है. यह अब तक का उच्चतम रिकॉर्ड है. सबसे ज्यादा एफडीआई प्राप्त करने वाले देशों में चीन पहले स्थान पर रहने में कामयाब रहा.

पूर्वी एशिया की हिस्सेदारी एक तिहाई तक पहुंची
विकासशील क्षेत्रों में एफडीआई में गिरावट एक समान नहीं रहा. लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में यह 37 फीसदी लुढ़का, जबकि अफ्रीकी देशों में 18 फीसदी और एशियाई देशों में 4 फीसदी तक लुढ़का है. वैश्विक एफडीआई 2020 में पूर्वी एशिया की हिस्सेदारी बढ़कर एक तिहाई तक पहुंच चुकी है.

2021 में भी कमजोरी एफडीआई का अनुमान
इस रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2021 में भी एफडीआई में कमजोरी ही देखने को मिलेगी. रिपोर्ट में कहा गया, 'आगे ट्रेंड्स के बारे में जानकारी देने वाले आंकड़े एक मिश्रित तस्वीर दिखा रहे हैं और इसमें गिरावट को लेकर लगातार दबाव बना रहेगा. ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को लेकर कम घोषणाओं से पता चलता है कि इंडस्ट्रियल सेक्टर में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है.'

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2021 में किन वजहों से एफडीआई पर असर पड़ेगा?
कोरोना वायरस महामारी के हालिया मामलों से जुड़े जोख़िम, वैक्सीनेशन रोलआउट प्रोग्राम की गति, आर्थिक राहत पैकेज, अधिकतर उभरते बाजारों की आर्थिक स्थिति और निवेश को लेकर वैश्विक नीतियां ही 2021 में एफडीआई को प्रभावित करेंगी.
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