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पिछले 3 महीने में 'बर्बाद' हुई ग्लोबल ऑयल इंडस्ट्री, पानी से भी सस्ता हुआ कच्चा तेल, कीमत घटने से भारत को होंगे ये नुकसान

News18Hindi
Updated: April 6, 2020, 2:24 PM IST
पिछले 3 महीने में 'बर्बाद' हुई ग्लोबल ऑयल इंडस्ट्री, पानी से भी सस्ता हुआ कच्चा तेल, कीमत घटने से भारत को होंगे ये नुकसान
कच्चे तेल

ओपेक प्लस देशों की बैठक लंबे समय के लिए टल जाती है तो कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है.

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नई दिल्ली: साल 2020 जब से शुरू हुआ है तभी से ऑयल और एनर्जी मार्केट (Oil and Energy Market) की हालत बेहद ख़राब हो गयी है. कोरोनावायरस के आने से पहले ही पूरा विश्व आर्थिक सुस्ती (Global Slowdown) के दौर से गुजर रहा था. अब इस महामारी कोरोना ने विश्व अर्थव्यवस्था को मंदी की सीमा पर ला दिया है. कोरोना महामारी के कारण वैश्विक तौर पर ऑयल और एनर्जी की डिमांड में भारी गिरावट आई. सऊदी अरब और रूस अपने-अपने कारणों से उत्पादन में कटौती का नाम नहीं ले रहे हैं. इसका दबाव कीमत पर पड़ रहा है. यही वजह है कि कच्चे तेल का दाम 18 सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है.

10 डॉलर तक कीमत पहुंचने का अनुमान
पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी जिसमें ये अंदेशा जताया गया था कि अगर सोमवार को ओपेक प्लस देशों की बैठक लंबे समय के लिए टल जाती है तो कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. इन तमाम वैश्विक घटनाक्रम के बीच आज 21वें दिन भी पेट्रोल डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं आया है.

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आज होने वाली ओपेक की बैठक टली


सोमवार को ओपक प्लस देशों की होने वाली बैठक टल गई है जिसके कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4 फीसदी तक गिर गई. WTI क्रूड की कीमत 6.50 फीसदी तक लुढ़क चुकी है. आने वाले दिनों में यह स्थिति और बिगड़ने वाली है जब विश्व में तेल को स्टोर करने वाला टैंक पूरी तरह भर जाएगा और उसके बाद भी अगर उत्पादन किया जाता है तो तेल कंपनियों को सोचना होगा कि आखिर इसे रखा कहां जाए.

कच्चे तेल की कीमतें घटने नुकसान 
आपको बता दें कि कच्चे तेल की कीमतें घटने से नुकसान होते है.

राज्यों की कमाई घटेगी: रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक क्रूड प्राइस घटने से राज्यों को नुकसान होगा. पेट्रोलियम वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) से होने वाली कमाई घटेगी. इसके कारण राज्य पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ा सकते हैं.


गाड़ी, फैक्ट्रीज और फ्लाइट्स सब ठप 
दुनियाभर की सरकारों द्वारा लॉकडाउन जैसी स्थिति लागू कर देने के बाद क्रूड की मांग बेहद घटी है और इसके चलते कच्चा तेल दुनियाभर में निचले लेवल पर आ रहा है. हाईवे खाली हैं, सड़कों पर गाड़ियां नहीं दौड़ रही हैं, एयरलाइंस कामकाज रोक चुकी हैं, फैक्ट्रीज ने अपने यहां प्रोडक्शन रोक दिया है और इसके चलते तमाम औद्योगिक गतिविधियां ठप हैं और इसका सीधा असर क्रूड पर पड़ रहा है. बैंक ऑफ अमेरिका ने अनुमान दिया है कि वैश्विक तेल की मांग में प्रतिदिन 12 मिलियन यानी 1.2 करोड़ बैरल की मांग इस तिमाही में देखी जा सकती है और ये 12 फीसदी की गिरावट अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट होगी.

प्राइस वॉर ने कच्चे तेल के बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया
इसके अलावा इस समय सऊदी अरब और रूस दुनिया को भारी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई कर रहे हैं और इसने ग्लोबल क्रूड मार्केट में स्थिति और बिगाड़ दी है. इनके प्राइस वॉर ने कच्चे तेल के बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है. मांग में कमी और सप्लाई में अधिकता, प्राइस वॉर जैसे कारणों से कच्चे तेल की कीमतों में जो गिरावट आ रही है वो ऐतिहासिक है. बहरहाल भारत में पेट्रोल, डीजल के कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ये पिछले 15 दिनों से नहीं बदले हैं. पिछली बार तेल कंपनियों ने 16 मार्च को ईंधन के दाम में बदलाव किया था.

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First published: April 6, 2020, 2:20 PM IST
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