अपने Fixed Deposit को लेकर न करें ये गलती, हो सकता है भारी नुकसान!

आमतौर पर बैंक एफडी के जरिए बचत करना बहुत लोगों को पसंद है.
आमतौर पर बैंक एफडी के जरिए बचत करना बहुत लोगों को पसंद है.

Fixed Deposit Renewal : डिजिटल युग में ज्यादातर बैंक एफडी (Bank FD) कराने की सुविधा ऑनलाइन दे रहे हैं. इस माध्यम से एफडी जब मैच्योर (Mature) हो जाती है तो उसकी रकम खुदबखुद आपके अकाउंट (Account) में आ जाती है. इसके बाद आप बेहतरीन ब्याज वाली दूसरी स्कीम में अपना पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 11:43 AM IST
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नई दिल्ली. बैंकिंग विशेषज्ञों (Banking experts) का कहना है कि जब आपकी एफडी मैच्योर (FD Matures) हो जाए तो खुद बैंक जाकर आपको अपनी एफडी को नई स्कीम (New scheme) या पुरानी स्कीम में ही रिन्यूअल कराना चाहिए. दरअसल देश में ज्यादातर लोग निवेश के लिए एफडी का चुनाव करते हैं. जब यह एफडी मैच्योर हो जाती है, तब वे एफडी को रिन्यूअल (Bank FD Renewal) कराने बैंक नहीं जाते. इसके पीछे लोगों का तर्क होता है कि एफडी मैच्योर होने के बाद खुद ही रिन्यू हो जाती है. लेकिन इस सब पर बैंकिग विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय ज्यादातर बैंक एफडी पर मिलने वाली ब्याज को घटा रहे हैं. ऐसे में कस्टमर को एफडी रिन्यूअल कराने के लिए खुद जाना चाहिए और सबसे बेहतरीक स्कीम का चुनाव करना चाहिए.

बैंक तय करते हैं कई नियम

ऑटो रिन्यूअल नीति एक बैंक से दूसरे बैंक में भिन्न होती है. कुछ मूल एफडी की समान अवधि के लिए ऑटो रिन्यूअल कर सकते हैं, जबकि कुछ में केवल एक विशिष्ट अवधि के लिए ऑटो रिन्यूअल करते हैं. अगर, आप एफडी को मैन्युअल रूप से ऑटो रिन्यूअल कर रहे हैं, तो आपको उच्चतम ब्याज प्राप्त करने के लिए इसे 15 महीनों के लिए निवेश करना होगा.



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ऑनलाइन करा सकते है एफडी

डिजिटल युग में ज्यादातर बैंक एफडी कराने की सुविधा ऑनलाइन दे रहे हैं. इस माध्यम से एफडी जब मैच्योर हो जाती है तो उसकी रकम खुदबखुद आपके अकाउंट में आ जाती है. इसके बाद आप बेहतरीन ब्याज वाली दूसरी स्कीम में अपना पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं.

ऑटो रिन्यूअल का ऑप्शन करा सकते है रद्द

यदि आपने एफडी कराते वक्त ऑटो रिन्यूअल का ऑप्शन चुना है तो आप बैक जाकर इसे रद्द करा सकते हैं. एफडी की परिपक्वता अवधि पूरा होने से पहले आपको बैंक को यह बतानी होगी कि ऑटो रिन्यूअल को रद्द कर दे. ऐसा नहीं करने पर अगर एफडी ऑटो रिन्यू हो जाती है और उसके बाद उसे तोड़ने पर आपको पेनल्टी देनी पड़ेगी.

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एफडी कराते समय इन बात का जरूर रखें ध्यान

>> एफडी में निवेश करने से पहले उसकी अवधि को तय करना बहुत जरुरी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि आप एफडी को मैच्योर होने से पहले तोड़ते हैं तो उस पर जुर्माने का भुगतान करना पड़ेगा.

>> एफडी में पैसा लगाते समय उस पर मिलने वाली ब्याज दर को भी देखना बहुत जरूरी है. बैंक अपने मुताबिक अलग-अलग ब्याज दरें पेश करते हैं. इसलिए अलग-अलग बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दर में अंतर होता है. एफडी में निवेश करने से पहले इनकी तुलना कर लेना जरूरी है.

>> एफडी पर होने वाली ब्याज आय पर टैक्स लगता है. अगर एफडी पर कमाया गया ब्याज एक वित्तीय वर्ष में 10 हजार रुपये से ऊपर होता है, तो उस ब्याज पर टीडीएस कटता है. वहीं, पांच साल के एफडी पर आपको धारा 80सी के तहत 1.5 लाख की छूट मिलती है.

>> एफडी में बैंक तिमाही और सालाना आधार पर ब्याज निकासी का विकल्प देते हैं. अब कुछ बैंक में मासिक निकासी की भी सुविधा दे रहे हैं.
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