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रूस-यूक्रेन संकट और महंगाई ने 34 फीसदी बढ़ाई सोने की मांग, निवेशकों ने खरीदा तीन साल का सबसे ज्‍यादा सोना

सोना पिछले महीने 2,070 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था.

सोना पिछले महीने 2,070 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था.

विश्‍व स्‍वर्ण परिषद ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि 2022 की पहली तिमाही में सोने की खपत पिछले तीन साल के मुकाबले सबसे ज्‍यादा रही है. इस दौरान निवेशकों ने इतना सोना खरीदा जो पिछले पांच साल के औसत से भी ज्‍यादा पहुंच गया. महंगाई के बावजूद इस साल सोने की मांग लगातार बनी रहेगी.

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नई दिल्‍ली. रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में सोना तप रहा है. दुनियाभर के निवेशक युद्ध से उपजे संकट और महंगाई के दबाव से परेशान हैं. उन्‍हें सेफ हैवन के रूप में सिर्फ सोना ही दिखाई दे रहा है और यही कारण है कि साल 2022 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में सोने की मांग 34 फीसदी बढ़ गई है.

विश्‍व स्‍वर्ण परिषद (WGC) ने बृहस्‍पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया कि सालाना आधार पर पहली तिमाही में सोने की खपत 34 फीसदी बढ़ी है. यह 2018 की आखिरी तिमाही के बाद सबसे ज्‍यादा रहा. इसकी प्रमुख वजह रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध से उपजा संकट और बढ़ती महंगाई है. यही कारण है कि पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में जबरदस्‍त उछाल भी दिखा है.

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ETF की मांग सबसे ज्‍यादा

निवेशक सोने को सेफ हैवन के रूप में देख जरूर रहे हैं, लेकिन इस बार फिजिकल सोना खरीदने के बजाए गोल्‍ड आधारित एक्‍सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) पर ज्‍यादा भरोसा जता रहे हैं. ETF की मांग बढ़ने के कारण ही पहली तिमाही में 1,234 टन सोने की मांग रही. यह साल 2018 की आखिरी तिमाही में हुई खरीद के बाद सबसे ज्‍यादा है. इतना ही नहीं इस साल की पहली तिमाही में हुई सोने की खरीद पिछले पांच साल की औसत खरीद से भी ज्‍यादा रही. पिछले पांच साल में पहली तिमाही के दौरान सोने की औसत खरीद 1,039 टन रही है. Gold ETF में साल 2020 की तीसरी तिमाही के बाद सबसे ज्‍यादा निवेश किया गया है.

सिक्‍के और बार की खरीद घटी

WGC के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही के दौरान छोटे बार और सिक्‍कों से निवेशकों का मोहभंग दिखा. इन दोनों की खरीद में 20 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है. इसकी वजह चीन में दोबारा कोविड-19 संक्रमण बढ़ने से लॉकडाउन का लगना और तुर्की में रिकॉर्ड स्‍तर पर कीमत का पहुंचना रहा है.

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इसके अलावा सोने के आभूषणों की मांग में भी कमी आई है. जनवरी-मार्च के दौरान यह 7 फीसदी घट गया है. सबसे ज्‍यादा गिरावट चीन और भारत के बाजार में आई है. हालांकि, इसी अवधि में भारतीय रिजर्व बैंक ने सोने की खरीद घटा दी. आरबीआई ने पहली तिमाही में महज 84 टन सोना खरीदा जो पिछले साल की पहली तिमाही से 29 फीसदी कम है, लेकिन 2021 की आखिरी तिमाही के मुकाबले दोगुना है.

ग्राहक नहीं लेकिन निवेशक लगाएंगे जमकर दांव

विश्‍व स्‍वर्ण परिषद ने कहा है कि सोने को लेकर अनिश्चितता का माहौल तब तक बरकरार रहेगा, जब तक रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का कोई हल नहीं निकल आता. हालांकि, इसके बावजूद 2022 में सोने में निवेश जारी रहेगा, लेकिन महंगाई और ज्‍यादा कीमत की वजह से आभूषणों की खरीद करने वाले ग्राहक अपने हाथ पीछे खींच सकते हैं.

Tags: Gold ETF, Gold investment, Gold price

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