6 महीने के लिए भूल जाएं शेयर बाजार और FD! सिर्फ यहां लगाएं पैसा मिलेगा बंपर मुनाफा

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Updated: August 22, 2019, 8:06 AM IST
6 महीने के लिए भूल जाएं शेयर बाजार और FD! सिर्फ यहां लगाएं पैसा मिलेगा बंपर मुनाफा
छह महीने के लिए यहां लगाएं पैसा

साल 2019 में अब तक सेंसेक्स और इक्विटी म्युचूअल फंड्स ने लोगों को निराश किया है. वहीं, सोने में पैसा लगाने वालों को इस दौरान 25 फीसदी का मुनाफा हुआ है. आप भी लगा सकते हैं सोने में पैसा आइए जानें इससे जुड़ी सभी बड़ी बातें.

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साल 2019 सोने में पैसा लगाने वालों के लिए बेहद खास रहा है. पिछले 8 महीने में अब तक सोने ने 25 फीसदी का रिटर्न (मुनाफा) दिया है. वहीं, गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने वालों को तो अभी तक 40 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न मिल चुका है. जबकि, सेंसेक्स और इक्विटी म्युचूअल फंड्स ने लोगों को निराश किया है. वहां लोगों के निवेश किए गए पैसे बढ़ने की जगह कम हो गए है. इस पर वित्तीय सलाहकार अब अपनी राय को बदलते हुए सोने में पैसा लगाने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि मौजूदा स्तर से भी सोने में 20-25 फीसदी तक के रिटर्न हासिल कि जा सकते हैं.

सेंसेक्स और इक्विट म्युचूअल फंड्स और FD अब क्यों नहीं फायदेमंद
एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने न्यूज18 हिंदी को बताया है कि दुनिया जब भी डरी होती है चाहे आर्थिक ग्रोथ को लेकर हो या फिर देशों के बीच तनाव की बात हो. ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश यानी सोने में अपना निवेश बढ़ा देते है. ऐसे ही हालात फिलहाल नजर आ रहे है.

आसिफ बताते हैं कि साल 2008 की मंदी में यानी 2008 से 2009 के बीच सोने ने 42 फीसदी का रिटर्न दिया था. जबकि, भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 52 फीसदी तक गिर गए थे.

साल 2010 से 2012 में जब यूरोप कर्ज संकट में फंस गया था तो उस समय भी सोना 44 फीसदी बढ़ गया. जबकि, सेंसेक्स 15 फीसदी लुढ़क गए थे.

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पिछले 15 साल में सोने और सेंसेक्स का प्रदर्शन

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ऐसे ही हालात साल 2013 में थे. उस समय दुनियाभर की करेंसी टूट रही थी. तब सोना में 11 फीसदी की तेजी आई थी और सेंसेक्स 6 फीसदी कमजोर हुए थे. साल 2016 में चीन युआन संकट की वजह से सोना 27 फीसदी चढ़ गया था. और सेंसेक्स 3 फीसदी कमजोर हुआ था. साल 2019 में दुनिया स्ट्रक्चरल मंदी की ओर बढ़ रही है. इसीलिए सोने में तेजी और शेयर बाजार गिर रहा है.

FD पर अब मिल रहा है सिर्फ 7.9% मुनाफा 
एक साल की अवधि के लिए अगर आप RBL बैंक में FD करते हैं तो 7.9 फीसदी की दर से आपके रकम 10 हजार रुपये से बढ़कर 10,814 रुपये हो जाएगी.

वहीं, इसी तरह आप लक्ष्मी विलास बैंक की एफडी में पैसा लगाते हैं तो ये रकम 7.75 फीसदी दर से मिले ब्याज के बाद बढ़कर 10,798 रुपये हो जाएगी. आपको बता दें कि इसके अलावा देश के अन्य बैंक अब 7 फीसदी की दर से ब्याज दे रहे हैं.

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सोने में पैसा बनाने का मौका
केडिया कमोडिटी के एमडी अजय केडिया ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि सोने की कीमतों में फिलहाल तेजी थमने की संभावना नजर नहीं आ रही है. दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें दिवाली तक 41,000 रुपये प्रति दस ग्राम तक जा सकती हैं.

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें अगले कुछ महीनों में 41,000 रुपये प्रति दस ग्राम तक जा सकती हैं.


उनका कहना है कि दुनियाभर में सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने में खरीदारी किए जाने से सोने को सपोर्ट मिला है. साल 2019 की दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने 224.4 टन सोने की खरीदारी की हैं. वहीं, साल 2019 की पहली छमाही के आंकड़ों को देखें तो यह 374.1 टन है. इसके अलावा ईटीएफ की खरीदारी में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है.

कैसे लागाए पैसा
आपको किसी शेयर ब्रोकर के पास अपना ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट खुलवाना होगा. आप इन्हें लम्प-सम या सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) द्वारा नियमित अंतराल से भी खरीद सकते हैं. आप एक ग्राम सोना भी खरीद सकते हैं. इस तरह बाजार को ज्यादा समय देने के बजाय सिस्टमैटिक तरीके से निवेश करें.

किसी शेयर ब्रोकर के पास अपना ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट खुलवाएं.अपने लॉगिन आईडी और पासवर्ड से ब्रोकर के ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगिन करें.गोल्ड ईटीएफ चुनें जिसे आप खरीदना चाहते हैं. जितनी यूनिट आप खरीदना चाहते हैं उतनी गोल्ड यूटीएफ यूनिट्स के लिए अपना पर्चेज ऑर्डर दें. आपके खाते से पैसा कट जाएगा.ट्रेड करने वाले दिन या अगले दिन यूनिट्स आपके डिमेट अकाउंट में क्रेडिट हो जाएंगी.

दुनियाभर में मंदी के डर ने सोने की कीमतों को हवा दी है.


इन 5 वजहों से सोने की कीमतों में आ रही है तेजी
(1) दुनियाभर की अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती के चलते निवेशकों का रुझान सोने की ओर बढ़ गया है. इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड और वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक ग्रोथ गिरने का अनुमान लगाया है. इसीलिए सोने में निवेश बढ़ा है.

(2)  दुनियाभर के सेंट्रल बैंक यानी भारत के RBI ने सोने में खरीदारी बढ़ा दी है. चीन, रूस, तुर्की सहित दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीदारी कर गोल्ड रिजर्व बढ़ाया. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा 2019-20 में अब तक करीब 374 मीट्रिक टन सोना खरीदे जाने का अनुमान है. आरबीआई ने मार्च 2018 से अब तक 60 टन सोना खरीदा है.

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(3) अमेरिका ने बीते 11 सालों में पहली बार ब्याज दरों में कटौती की है. यह ट्रेंड रहा है कि जब भी अमेरिका ब्याज दरों में कटौती करता है तो सोने के रेट बढ़ते हैं.

(4) अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर से दुनिया को बड़ा झटका लगा है. विश्व व्यापार में भी ठहराव की स्थिति निर्मित हो रही है. इसके कारण खास तौर पर एशियाई देशों की करेंसी कमजोर हुई हैं. 11 साल में पहली बार एक डॉलर के मुकाबले युआन सात के स्तर से भी नीचे पहुंच गया है.

(5) अमेरिका-ईरान के बीच में टेंशन लगातार बना हुआ है. जिसके कारण लोगों की सोने में रुचि बढ़ी.

शेयर बाजार में गिरावट की 4 बड़े कारण
(1) मंदी का डर- रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने भारत की जीडीपी 7.9 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दी है. इसकी वजह ग्लोबल स्तर पर धीमी गति और घरेलू स्तर कमजोर मानसून को बताया है. इसके अलावा पहली तिमाही के सुस्त नतीजों को देखकर भारत की जीडीपी में कटौती कर दी है.

रिफाइनरी प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन में कोर सेक्टर में सुस्ती देखी गई है. साथ ही रिपोर्ट से पता चलता है कि घरेलू मांग में कमी आई है, उपभोक्ता, अर्थव्यवस्था और औद्योगिक क्षेत्र में सुस्ती आई है, जबकि नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल सेक्टर कमजोर हुए हैं. इसके अलावा निवेश में भी कमजोरी आई है.



(2) ट्रेड वॉर- एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर जारी रही तो दुनियाभर में मंदी का खतरा है. जापान के मिजुहो बैंक के एशिया एंड ओसेनिया इकोनॉमिक्स हेड विष्णु वराथन का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में चीन की कमजोर ग्रोथ का असर बाकी एशिया पर भी पड़ सकता है. चीन के एक्सपोर्ट के साथ ही इंपोर्ट में गिरावट ज्यादा चिंता की बात है क्योंकि, एशिया के बाकी देशों के लिए चीन प्रमुख बाजार है.

(3) दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल- चीन की आर्थिक विकास दर (जीडीपी) अप्रैल-जून तिमाही में 6.2% रही. यह 27 साल में सबसे कम है. इससे कम ग्रोथ 1992 की जनवरी-मार्च तिमाही में दर्ज की गई थी. इस साल जनवरी-मार्च में ग्रोथ 6.4% रही थी. अमेरिका के ट्रेड वॉर की वजह से चीन की विकास दर में गिरावट आ रही है. चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है.

चीन की आर्थिक विकास दर (जीडीपी) अप्रैल-जून तिमाही में 6.2% रही. यह 27 साल में सबसे कम है. (फाइल फोटो)


(4) सरकार के फैसले से विदेशी निवेशक नाराज़ - सरकार ने फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी FPI के तौर पर पैसा लगाने वाले विदेशी निवेशक पर सरचार्ज लगाया है. इस वजह से वो लगातार भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे है.

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First published: August 22, 2019, 7:40 AM IST
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