कैसे कमाएं सोना से मोटा मुनाफा? जानिए आपकी जरूरत के हिसाब से कहां है सही मौका

कैसे कमाएं सोना से मोटा मुनाफा? जानिए आपकी जरूरत के हिसाब से कहां है सही मौका
गोल्ड में निवेश के लिए सही विकल्प चुनना जरूरी है.

इस साल सोने का भाव अब तक 30 फीसदी तक बढ़ चुका है. कोविड-19 से उपजे अनिश्चितता के बीच निवेशक जमकर गोल्ड में निवेश (Investment in Gold) कर रहे हैं. लेकिन, इस बीच कुछ निवेशकों की चिंता है कि आखिर अपनी जरूरत के लिए हिसाब से कौन सा विकल्प चुनना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 5:55 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी के बीच निवेश से मोटी कमाई का सबसे बेहतर विकल्प सोना ही बन चुका है. दरअसल, किसी भी अनिश्चितता की स्थिति में निवेशक इक्विटी या अन्य माध्यमों में निवेश करने से बचते हैं. ऐसी स्थिति में सोने में निवेश करना सबसे बेहतर विकल्प में से एक माना जाता है. निवेशक अपने पोर्टफोलियो (Investment Portfolio) में फाइनेंशियल सिक्योरिटी लाने के लिए सोने में निवेश करता है. यही कारण है कि सोने के दाम (Gold Price) में लगातार रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिल रहा है और आगे भी इसके दाम बढ़ते रहने का अनुमान है. इस साल अब तक सोने का भाव करीब 30 फीसदी तक चढ़ चुका है.

आज के समय में सोने में निवेश के कई सारे विकल्प भी मौजूद हैं. फिजिकल गोल्ड खरीदने से लेकर पेपर गोल्ड में निवेश का मौका है. पेपर गोल्ड में निवेशकों के पास गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs), सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) आदि जैसे रास्ते हैं. इसके अलावा भी कई विकल्प हैं. ऐसे में अगर आप भी सोने में निवेश करना चाहते हैं तो ये विकल्प आपको कन्फ्यूज कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि आपके जरूरत के हिसाब से कौन सा विकल्प सबसे बेहतर है.

लिक्विडिटी: किसी भी तरह के निवेश में लिक्विडिटी (Liquidity in Investment) को एक विशेष फैक्टर माना जाता है. अधिकतर लोग एक ऐसे स्कीम में निवेश करना पसंद करते हैं, जिसे वो आसानी से एक्सेस कर सकें. बात जब पीली धातु में निवेश करने की आती है तो गोल्ड ईटीएफ एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. अन्य गोल्ड फंड्स के उलट, ईटीएफ में एग्जिट लोड नहीं होता. यानी इन्वेस्टर्स के पास विकल्प होता है कि वो बाजार खुले रहने के समय में इसे कभी खरीद या बेच सकता है. सॉवरेन गोल्ड फंड में 8 साल के लिए निवेश किया जाता है. इसमें निवेश के पांचवें साल के बाद ही एग्जिट करने की सुविधा मिलती है.



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ज्यादा रिटर्न: किसी भी प्रकार का इन्वेस्टमेंट बेहतर रिटर्न के लिए ही किया जाता है. ऐसे में गोल्ड से मोटी कमाई करनी है तो सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) सबसे बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स भी गोल्ड इन्वेस्टमेंट में ज्यादा रिटर्न पाने के लिए एसजीबी की ही सलाह देते हैं. इसमें सोने के दाम में इजाफे का फायदा तो मिलता ही है, साथ में 2.5 फीसदी का सालाना रिटर्न भी मिलता है.

इन्वेस्टमेंट लिमिट: गोल्ड में निवेश करते समय में अधिकतम और न्यूनतम लिमिट के बारे में भी जानना जरूरी है. फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ में निवेश की कोई अधि​कतम ​सीमा नहीं. हालांकि, इसकी एक न्यूनतम सीमा जरूर है. एसजीबी में मिनिमम लिमिट भी है.

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टैक्स का नियम: फिजिकल गोल्ड में निवेश (Investment in Physical Gold) करने पर अन्य कैपिटल एसेट जैसा ही टैक्स देना होगा. अगर 3 साल के लिए गोल्ड रखा जाता है तो इसपर 20 फीसदी के हिसाब से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) देना होता है. इसमें एजुकेशन सेस और सरचार्ज अतिरिक्त होता है. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स स्लैब के आधार पर ही टैक्सेबल होता है. फिजिकल गोल्ड की तरह ही गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स (Gold Mutual Funds) पर भी टैक्स देना होता है.

वहीं दूसरी तरफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज पर अन्य स्त्रोत से आने वाले इनकम के तौर पर टैक्स देना होता है. अगर इस बॉन्ड को मैच्योरिटी तक रखा जाता है तो कैपिटल गेन्स पर टैक्स राहत मिलती है. यही कारण है कि ये एक बेहतर विकल्प है.
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