खुशखबरी- विदेशी बाजारों में आज सस्ता हुआ सोना, जानिए भारत में कितनी आएगी गिरावट

खुशखबरी- विदेशी बाजारों में आज सस्ता हुआ सोना, जानिए भारत में कितनी आएगी गिरावट
सोने की कीमतों में आ सकती है गिरावट

अमेरिकी डॉलर में आई मज़बूती के चलते विदेशी बाजार में सोना खरीदना सस्ता हो गया है. बुधवार को सोने की कीमतें 2000 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई है. इन्हीं संकेतों के चलते भारतीय बाजारों में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतें गिर गईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 11:24 AM IST
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नई दिल्ली. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में (Gold Price Today) फिर से गिरावट आई है. अमेरिकी डॉलर में आई मज़बूती के चलते विदेशी बाजार में सोना खरीदना सस्ता हो गया है. बुधवार को सोने की कीमतें 2000 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई है. इन्हीं संकेतों के चलते भारतीय बाजारों में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतें गिर गईं. एमसीएक्स पर अक्टूबर का सोना वायदा 0.5% गिरकर 53,313 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. साथ ही, चांदी वायदा 0.8% गिरकर 68,938 प्रति किलोग्राम पर आ गया है. पिछले दो सत्रों में, सोने की कीमतें 1,300 रुपये प्रति 10 ग्राम उछल गई थीं, जबकि चांदी 2,100 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी थी.

अब क्या होगा- इन संकेतों के चलते आज घरेलू सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतें गिर सकती है. इससे पहले  मंगलवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने का भाव 53,674 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 54,856 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था इस दौरान कीमतों में 1,182, रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी आई थी. वहीं, मुंबई में 99.9 फीसदी वाले सोने के दाम बढ़कर 53894 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गए.

कोटक सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा कि सोने में अस्थिरता काफी अधिक बनी हुई है और यह जारी रह सकती है. निवेशकों की नजरें अमेरिका के केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के मिनट्स पर टिकी हुई हैं. फेड के मिनट्स बुधवार देर रात जारी होंगे.



कैसे और कौन तय करता है सोने की कीमतें-  एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बाजार में जब महंगाई बढ़ती है तब सोने की मांग काफी बढ़ जाती है और महंगाई के कम होने पर सोने की मांग कम भी होती है. ऐसे में महंगाई का बढ़ना-घटना भी सोने की कीमतों पर असर डालता है.
देशों के सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व रखते हैं. जब-जब सेंट्रल बैंक ऐसा करते हैं तब सोने के दाम बढ़ जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस परिस्थिति में बाजार में करंसी का फ्लो बढ़ जाता है और सोने की सप्लाई कम हो जाती है.

ग्लोबल मूवमेंट में किसी भी तरह के परिवर्तन का असर भारत में सोने की कीमत पर भी पड़ता है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत सोने के सबसे बड़े आयातक देशों में से है. ऐसे में जब किसी ग्लोबल मूवमेंट की वजह से एक्सपोर्ट करने वाला देश सोने पर आयात शुल्क बढ़ा देते हैं तब भी इसका असर भारत में दिखता है और सोना महंगा हो जाता है.

फाइनेंशियल प्रॉडक्ट्स और सर्विसेस के लिए ब्याज दरों का सीधा संबंध सोने की मांग से होता है. करंट गोल्ड प्राइस किसी भी देश में इंट्रेस्ट रेट्स के लिए भरोसेमंद संकेतों की तरह माने जाते हैं. ब्याज दरों में कमी की वजह से ग्राहक कैश के बदले सोना बेचने लगते हैं और इससे गोल्ड की सप्लाई बढ़ जाती है और फिर इसके दाम कम हो जाते हैं. इसी तरह जब इंट्रेस्ट रेट्स कम होते हैं तब सोने की मांग बढ़ती है और इसकी कीमत में भी बढ़ोतरी हो जाती है.

भारत में त्योहारों के वक्त ज्वेलरी की खरीद एक धार्मिक काम की तरह होता है. ऐसे में दीवाली और धनतेरस जैसे त्योहारों के दौरान देश में सोने की मांग काफी बढ़ जाती है. ऐसे में कीमत बढ़ना भी तय है. इसके अलावा सोने के प्रोडक्शन में लगने वाला खर्च भी इसकी कीमत निर्धारित करता है. इन सबके अलावा जो बात गौर करने लायक है वह ये है कि मांग और आपूर्ति सोने की कीमत तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं.
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