इस साल महंगा हो चुका है सोना, क्या दिवाली पर गोल्ड देगा फायदे का मौका?

सोना
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इस समय सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. हालांकि, दुनियाभर में कोविड-19 के बढ़ते मामले और आर्थिक अनि​श्चितता के बीच सोने के दाम में इजाफा देखने को मिला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 30, 2020, 11:49 AM IST
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नई दिल्ली. त्योहार पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है. खासकर दिवाली और धनतेरस पर सोने की जमकर खरीददारी की जाती है. सर्राफा बाजार में इन दिनों सोने के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं. बुधवार (28 अक्टूबर) को सोने का भाव 54 रुपये घटकर 50,989 रुपये पर बंद हुआ. इस दिवाली (Diwali) अगर आप सोना खरीदने का मन बना रहे हैं तो आपको पहले इसके बारे में पूरी जानकारी लेना उचित होगा. आइए जानते हैं इस बारे में.

कोरोनावायरस के बढ़ने से बिगड़ सकती है स्थिति
गौरतलब है कि बीते बुधवार को दुनियाभर में कोरोनावायरस संक्रमितों (Coronavirus) के 5 लाख दैनिक मामले सामने आए जो अबतक के सबसे ज्यादा है. इधर, कोविड-19 ने न केवल इक्विटी पर दवाब डाला है, बल्कि सोने में निवेश के मामले को भी मजबूत किया है. कोविड के कारण बाजार की बिगड़ी स्थिति निवेशकों के लिए चिंता बन रही है. साथ ही कम ब्याज दर और उच्च मुद्रास्फीति अन्य कारक हैं जो सोने की कीमतों को तब तक बनाए रखेंगे जब तक कि कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं आ जाती है. इस त्योहारी सीजन में कई लोग सोने की कीमतों में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं.

सोने की कीमतें कैसे बढ़ीं?
इस साल सोने की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है. इसका कारण यूरोपीय देशों में कोविड-19 का बढ़ता खतरा है. जिसके कारण सोने का भाव अगस्त में 2,050 डॉलर प्रति औंस से अक्टूबर में 1880 प्रति डॉलर औंस पहुंच गया. वहीं, भारत में अगस्त में कीमतें 56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से घटकर 51,000 रुपये के आसपास हैं. गुरुवार को सोने का भाव प्रति 10 ग्राम 50,630 रुपये पर बंद हुआ. कोरोना के बढ़ते मामले और निरंतर अनिश्चितता के कारण शेयर बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल रही है. बीएसई सेंसेक्स 21 अक्टूबर को 40,707 के इंडेक्स मूल्य से नीचे गुरुवार को 39,749.85 पर बंद हुआ.



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क्या और बढ़ सकता है सोने का भाव?
कोरोना के बढ़ते मामले और अनिश्चितता सोने की कीमतों बढ़ोतरी का कारण बन सकते हैं. ऐसे में केंद्रीय बैंक भविष्य को ध्यान में रखते हुए ज्यादा से ज्यादा सोने की खरीददारी कर रहे हैं. इधर, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और भारत-चीन सीमा गतिरोध इस माहौल में केवल अनिश्चितताओं को बढ़ा रहे हैं. वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया कि ब्याज दरों को 2023 तक शून्य के पास रखा जाएगा.

क्या आपको सोने में निवेश करना चाहिए?
निवेशकों को सोने में निवेश करने से पहले यह जरूर जान लेना चाहिए कि यह एक लंबी अवधि के लिए उपाया है, जिसे अल्पकालिक लाभ के लिए नहीं खरीदा जाना चाहिए. क्योंकि पिछले 15 वर्षों में यह लगभग 7,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से बढ़ रहा है. ऐसे में निवेशकों को अपने सोने के पोर्टफोलियो में 5-10 फीसदी के बीच कहीं भी निवेश करना चाहिए. दिवाली के बावजूद, निवेशकों को मासिक या त्रैमासिक आधार पर समय-समय पर सोने में निवेश करते रहना चाहिए. किसी को भी सोने में एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए.

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सितंबर तिमाही में सोने की मांग क्यों लुढ़की?
सितंबर तिमाही के अंत में देश में सोने की मांग 86.6 टन थी, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 123.9 टन की तुलना में 30 फीसदी कम है. वहीं, एक साल पहले तिमाही में सोने की मांग का मूल्य 41,300 करोड़ रुपये था, जो 4 फीसदी घटकर 39, 510 करोड़ रुपये हो गया. साथ ही सितंबर तिमाही में भारत में आभूषणों की कुल मांग पिछले साल के 101.6 टन से 48 फीसदी घटकर 52.8 टन हो गई. सितंबर 2019 में 33.3 टन की कुल निवेश मांग 22.3 टन से 52 फीसदी बढ़ी. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की मैनेजिंग डायरेक्टर सोमासुंदरम पीआर ने कहा, 'भारत की सितंबर तिमाही में सोने की मांग कोविड-19 से संबंधित व्यवधानों की वजह से 30 फीसदी गिरकर 86.6 टन हो गई, उपभोक्ता भाव और उच्च कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भी सोने के भाव में गिरावट आई.'

उपभोक्ताओं में विश्वास जगाने के लिए RBI को निवेश नहीं करना चाहिए
बता दें कि भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और सोना जमा करने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है. मार्च 2020 के अंत तक, आरबीआई के पास 653.01 टन सोना था. विदेशी बैंकों जिनमें बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास आरबीआई का 360.71 टन सोना जमा है.

मूल्य के संदर्भ में (डॉलर), कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोना मार्च 2019 के अंत से 6.14 फीसदी बढ़कर मार्च 2020 के अंत में लगभग 6.40 फीसदी हो गया है. वहीं, आरबीआई के पास सोने का वास्तविक मूल्य 16 अक्टूबर, 2020 तक 30.578 बिलियन डॉलर से बढ़कर 7 महीने में 6 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है.

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आरबीआई ने पूंजीगत जोखिम को कम करने के लिए सोने, फिक्स्ड डिपॉजिट और अमेरिकी ट्रेजरी बिलों जैसे विभिन्न विदेशी मुद्रा का भंडारण किया हुआ है. वास्तव में, दुनिया भर के अधिकांश केंद्रीय बैंक अपनी निवेशिक जमा को बढ़ाने और जोखिम को कम करने की रणनीति के रूप में सोने का विशाल भंडार रखते हैं. ऐसे में आरबीआई को लोगों को विश्वास में लेने की जरुरत है.
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