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लगातार तीसरे दिन भी सस्ता हुआ सोना, जानिए आखिर क्यों तेजी से कम हो रहे गोल्ड के दाम

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पीली धातु की चमक घटी है.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पीली धातु की चमक घटी है.

वैक्सीन को लेकर जगी उम्मीद ने निवेशकों के सेंटीमेंट को मजबूत किया है. अब वो अधिक जोखिम वाले एसेट्स में रुचि दिखा रहे हैं. यही कारण है कि वैश्विक बाजार से लेकर घरेलू बाजार में कीमती धातुओं के भाव में गिरावट देखने को मिल रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 30, 2020, 6:56 PM IST
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नई दिल्ली. कमजोर वैश्विक ​ट्रेंड के बीच आज घरेलू बाजार में सोना सस्ता हुआ है. एचडीएफसी सिक्योरिटीज द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सोमवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना-चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई है. स्पॉट मार्केट के अलावा आज वायदा बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के भाव नरम रहे. अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो यहां भी आज सोने-चांदी में गिरावट देखने को मिल रही है.

सोने की नई कीमतें (Gold Price, 30 November 2020) - एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने बताया कि आज दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का भाव 142 रुपये प्रति 10 ग्राम कम होकर 47,483 रुपये के स्तर पर आ गया है. पिछले कारोबारी सत्र में सोने का यह भाव 47,625 रुपये पर था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज सोना 1,781.50 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते नजर आया.

चांदी की नई कीमतें (Silver Price, 30 November 2020) - सोने के अलावा आज चांदी के भाव में भी गिरावट देखने को मिली. चांदी का भाव आज 701 रुपये प्रति किलोग्राम कम होकर 57,808 रुपये के स्तर पर आ गया है. जबकि, इसके पहले कारोबारी सत्र में चांदी का भाव 58,509 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था. अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो यहां आज चांदी सस्ती होकर 22.29 डॉलर प्रति औंस पर रही.



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दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट पर एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनलिस्ट कमोडिटी तपन पटेल ने कहा, 'कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर जगी उम्मीद ने निवेशकों के सेंटीमेंट्स को बूस्ट किया है. यही कारण है कि वो अब अधिक जोखिम वाले एसेट्स में रुचि दिखा रहे हैं.'

वैक्सीन की खबरों के बाद डॉलर बीते ढाई साल के निचले स्तर पर फिसल चुका है. शेयर बाजारा में भी रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है. एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि निकट भविष्य में सोने में तेजी के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं. अभी भी इसमें कमजोरी देखने को मिलेगी. उनका कहना है कि बीते कुछ समय में सोने की रिकॉर्ड बिक्री देखने को मिली है. यही कारण है कि अब मौजूदा कमजोरी कुछ समय के लिए बनी रहेगी.

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दूसरी तरफ जोखिम लेने की प्रवृ​त्ति एक बार फिर बढ़ते हुए दिखाई दे रही है. हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि चीन का फैक्ट्री आउटपुट नवंबर महीने में बीते 3 साल में सबसे तेज रहा है. निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व चेयरमैन जेरोम पॉवेल की अमेरिकी सिनेट में टेस्टिमनी पर है.
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