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भारत क्यों खरीद रहा है टनों सोना! जानिए ये राज़ की बात

News18Hindi
Updated: May 2, 2019, 9:02 PM IST

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट कहती है कि पिछले 9 साल के दौरान भारत ने 50.94 टन सोना खरीदा है. इससे दुनिया भर के बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भारत को आर्थिक महाशक्ति के तौर पर देखने लगे हैं.

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सोना खरीदना भारतीयों की पहली पसंद है. ये कहने की जरुरत नहीं है.  हमें तो बस मौके का इंतज़ार रहता है, चाहे धनतेरस हो, नवरात्र हो, दिवाली हो, अक्षय तृतीया, किसी का जन्मदिन या फिर सालगिरह. तोहफे में देने के लिए गोल्ड को बेस्ट मानने वालों की कमी नहीं है. लेकिन अब सोना आम जनता से ज्यादा दुनिया भर के सेंट्रल बैंक खरीद रहे है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट कहती है कि पिछले 9 साल के दौरान भारत, रूस और कजाकिस्तान ने  जमकर सोने की खरीदारी की है. इस दौरान भारत के सेंट्रल बैंक ने कुल 50.94 टन, रूस के सेंट्रल बैंक ने 1501 टन सोना और कजाकिस्तान ने 285.84 टन सोने की खरीदारी की है. अब सवाल उठता है कि सेंट्रल बैंक सोना क्यों खरीदते हैं?

भारत के ज्यादा सोना खरीदने से क्या होगा?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ब्याज दरें बढ़ने के दौर में सोने की खरीदारी से भारतीय मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी. ऐसे में भारत अपनी आर्थिक स्थिति को ज्यादा मजबूत कर पाएगा. अर्थशास्त्री कहते हैं कि आरबीआई के ज्यादा सोना खरीदने का मकसद देश को ग्लोबल रिस्क से बचाना है.

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एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने बताया कि अमेरिका ब्याज दरें बढ़ा रहा है. ऐसे में अमेरिकी डॉलर को मज़बूती मिल रही है. भारतीय रुपया कमजोर हो रहा है. देश के पास सोना रहने पर किसी भी बड़ी आर्थिक और राजनीतिक समस्या से निपटा जा सकता है.
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आसिफ के मुताबिक, अगर दुनिया में जंग छिड़ जाती है तो करेंसी की कोई कीमत नहीं रह जाती है. ऐसे में सोना देकर ही हथियार और अन्य चीजें दूसरे देशों से खरीदी जाती हैं. मतलब साफ है कि सोना हमेशा से सेफ इन्वेस्टमेंट है.

दुनिया के सबसे ज्यादा सोना रखने वाले देश
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट बताती हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा सोने का भंडार अमेरिका के पास है. अमेरिका के पास कुल 8,133.5 टन सोना रिजर्व में है. जर्मनी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने के भंडार रखने वाला देश है. जर्मनी की ऑफिशियल गोल्ड होल्डिंग 3,369.70 टन है. सोने का यह भंडार देश के विदेशी मुद्रा भंडार का 70 फीसदी है.

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इटली के पास 2,451.8 टन सोना जमा है. यह सोना देश के विदेशी मुद्रा भंडार का 68 फीसदी है. वहीं, फ्रांस दुनिया का चौथा सबसे बड़ा सोने का भंडार रखने वाला देश है. फ्रांस के पास 2,436 टन सोने का भंडार है. यह सोना फ्रांस के विदेशी मुद्रा भंडार का 63 फीसदी है. इस लिस्ट में भारत का नंबर 11वां है. भारत के पास फिलहाल 608.7 टन सोने का रिजर्व है.

जब RBI का सोना गिरवी रखकर चलाया देश!
लेकिन एक जमाना वो भी था, जब 90 के दशक में चंद्रशेखर की सरकार बनी, तो भारत का विदेशी मुद्रा का भंडार करीब खाली हो चुका था. अर्थव्यवस्था भुगतान संकट में फंसी थी. तब प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने ब्रिटेन में रिजर्व बैंक का सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने का फैसला किया था. उस समय के गंभीर हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था. इतनी रकम तीन हफ्ते के आयात के लिए भी पूरी नहीं थी.



हालांकि इसके बाद 2007 के बाद भारत को दुनिया ने फिर उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति के तौर पर पहचाना, जब मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों ने देश की ग्रोथ को तेजी से बढ़ाया. तब भारत ने बड़े पैमाने पर गोल्ड की खरीदारी की.

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सोना Vs सेंसेक्स
सोने की इस असल पहचान को भारतीयों ने पहले ही पहचान लिया था. इसीलिए देश में सोने की खरीदारी प्रचलन काफी ज्यादा है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है. लेकिन आजकल के नए दौर में सोने के मुकाबले अब लोग शेयर बाजार में पैसा लगाने लगे हैं.

ब्लूमबर्ग की ओर से जारी आंकड़ों पर नज़र डाले तो पिछले 15 वित्त वर्ष के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स ने सालाना 13.97 फीसदी का रिटर्न (मुनाफा) दिया है. वहीं, सोने का रिटर्न 13.66 फीसदी रहा है.



एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अमेरिका जैसे विकसित देशों में लोग महंगाई के खिलाफ सुरक्षा के रूप में सोने में खरीदारी करते हैं. वहीं, भारत जैसे विकासशील देशों के निवेशक, करेंसी के कमजोर होने पर इसे खरीदते है. ताकि, शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई को सोने के मुनाफे से पूरा किया जा सके.

पिछले छह महीने पहले के आंकड़े बताते हैं कि रुपया जब कमजोर होकर अपने सबसे निचले स्तर के नज़दीक आ गया था. तब सोने के रिटर्न सेंसेक्स से ज्यादा थे. सोने में निवेश के आजकल कई प्रोडक्ट बाजार में है. इनमें से सबसे ज्यादा निवेश ईटीएफ में होता है. मौजूदा दौर में इसे सेफ मानते हैं क्योंकि आपको अपने पास सोना रखने की जरुरत नहीं होती है. इसकी सारी जानकारी आपके मोबाइल पर मिल जाती है.

कैसे पता लगेगी सोने की शुद्धता!
लेकिन अभी भी सोने की ज्वैलरी खरीदते वक्त ज्वैलर्स आम आदमी को कई तरह से ठगते हैं. अक्सर शुद्धता के नाम पर लोगों से ज्यादा पैसों की वसूली की जाती है.

केडिया कमोडिटी के एमडी अजय केडिया बताते हैं कि यह बात बिल्कुल सही हैं कि सोना शुद्धता के आधार पर बिकता है. लेकिन ज्वैलरी में 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल नहीं होता है. वहीं, मेकिंग चार्जेस के नाम पर आम आदमी से ठगी होती है.



कैरेट जितना अधिक होगा, सोने की ज्वैलरी उतनी ही महंगी होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्यादा कैरेट का मतलब है कि आभूषण में सोना अधिक है और अन्य धातुएं कम. इसके अलावा सोने की शुद्धता को मापने का सही पैमाना हॉलमार्किंग है. बीआईएस हॉलमार्क सोने के साथ चांदी की शुद्धता को प्रमाणित करने की एक प्रणाली है.

बीआईएस का यह चिह्न प्रमाणित करता है कि गहना भारतीय मानक ब्यूरो के स्टैंडर्ड पर खरा उतरता है. इसलिए, सोना खरीदने से पहले सुनिश्चित करें कि आभूषणों में बीआईएस हॉलमार्क है. अगर सोने के गहनों पर हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है. लेकिन कई ज्वैलर्स बिना जांच प्रकिया पूरी किए ही हॉलमार्क लगाते हैं.



ऐसे में यह देखना जरूरी है कि हॉलमार्क ओरिजनल है या नहीं? असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है. उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है. उसी में ज्वैलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है. अगर आपको संदेह है तो आप पास के किसी हॉलमार्किंग सेंटर में जाकर ज्वैलरी की जांच करवा लें. देश भर में 700 हॉलमार्किंग सेंटर हैं इनकी लिस्ट आप bis.org.in पर जाकर देख सकते हैं.

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First published: May 2, 2019, 8:59 PM IST
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