अच्छे मानसून और गांवों में श्रमिकों की उपलब्धता से दोगुनी हुई खेती की रफ्तार

अच्छे मानसून और गांवों में श्रमिकों की उपलब्धता से दोगुनी हुई खेती की रफ्तार
अच्छी बारिश के बाद धान रोपाई की तैयारी में जुटे किसान

ज्यादातर धान उत्पादक राज्यों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हुई है. महंगे होते डीजल के बीच मौसम ने किसानों का साथ दिया

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नई दिल्ली. कोरोना संकट (Corona crisis) के बावजूद इस साल खरीफ फसलों (Kharif Crop) की बुआई पिछले साल के मुकाबले दोगुनी गति से हो रही है. जून तक 316 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है. अच्छे मानसून और गांवों में श्रमिकों की उपलब्धता को इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है. कोविड-19 संकट की वजह से शहर छोड़कर गांव गए ज्यादातर लोग खेती में जुटे हुए हैं. ऊपर से डीजल की महंगाई (Diesel price) के बीच हुई अच्छी बारिश (Rain) ने बुआई में और तेजी ला दी.

केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल के मुताबिक पिछले वर्ष अब तक 154 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी जबकि इस साल 316 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. पिछले पांच वर्षों के दौरान अब तक औसतन 187 लाख हेक्टेयर ही खरीफ का एरिया कवर हो पाता था. देश के 50 फीसदी लोगों की आजीविका खेती पर ही निर्भर है.

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था के जानकार पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि मानसून (Monsoon) अच्छा रहना और श्रमिकों की पर्याप्त उपलब्धता खेती के लिए अच्छा संकेत है. यही ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural economy) को उबारेगा. रिवर्स पलायन के बाद गांवों में लोगों की संख्या बढ़ गई है. ये सब लोग खेती और उससे जुड़े कार्यों से अपना काम चला रहे हैं.



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देश के 17 राज्यों में अब तक सामान्य बारिश हुई है


देश के 28 राज्यों में मौसम मेहरबान

>>एक से 25 जून तक 128.2 मिलीमीटर के सामान्य के मुकाबले 155.2 मिमी बारिश हुई है.

>>बारिश को लेकर मौसम विभाग की 1 से लेकर 30 जून तक की रिपोर्ट को देखें तो 17 राज्यों में सामान्य बारिश हुई है. आठ राज्यों में सामान्य से ज्यादा और तीन में बहुत ज्यादा बारिश हुई है.

>>कृषि प्रधान राज्य मध्य प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और सिक्किम में सामान्य से अधिक बारिश हुई है.

>>पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब और ओडिशा जैसे धान (Paddy) उत्पादक राज्यों में सामान्य बारिश हुई है.

>>प्रमुख धान उत्पादक राज्य छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है.

प्रमुख खरीफ फसलों का कवरेज एरिया (25 जून तक)

चावल: ग्रीष्‍मकालीन चावल का बुवाई कवरेज क्षेत्र इस वर्ष अब तक करीब 37.71 लाख हेक्टेयर है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 32.05 लाख हेक्टेयर रहा था.

दलहन: दलहन का बुवाई कवरेज क्षेत्र इस वर्ष अब तक करीब 19.40 लाख हेक्टेयर है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 11.45 लाख हेक्टेयर रहा था.

मोटे अनाज: मोटे अनाज का बुवाई कवरेज क्षेत्र इस वर्ष अब तक करीब 47.96 लाख हेक्टेयर है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 26.09 लाख हेक्टेयर रहा था.

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तिलहन: तिलहन का बुवाई कवरेज क्षेत्र इस वर्ष अब तक करीब 83.31 लाख हेक्टेयर है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 24.07 लाख हेक्टेयर रहा था.

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ज्यादातर धान उत्पादक राज्यों में अच्छी बारिश हुई है


गन्‍ना: गन्‍ने का बुवाई कवरेज क्षेत्र इस वर्ष अब तक करीब 49.69 लाख हेक्टेयर है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 47.77 लाख हेक्टेयर रहा था.

कपास: कपास का बुवाई कवरेज क्षेत्र इस वर्ष अब तक करीब 71.69 लाख हेक्टेयर है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 39.23 लाख हेक्टेयर रहा था.
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