नौकरीपेशा के लिए बड़ी खबर! केंद्र बदलेगा नियम, 30 मिनट से कम किया अतिरिक्‍त काम तो भी मिलेगा ओवरटाइम

मोदी सरकार जल्‍द ही मजदूरी संहिता विधेयक के नियमों को लागू कर सकती है. इससे नौकरीपेशा को फायदा होगा.

मौजूदा नियमों के मुताबिक, 30 मिनट से कम समय को ओवरटाइम (Overtime) में शामिल नहीं किया जाता है. मजदूरी संहिता विधेयक (Labour Code) के मसौदा नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच के अतिरिक्त काम को ओवरटाइम में शामिल करने का प्रावधान है. साथ ही किसी भी कर्मचारी से लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम कराने को प्रतिबंधित किया गया है.

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    नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार जल्‍द ही नौकरीपेशा लोगों को अच्‍छी खबर दे सकती है. इसके लिए आपकी नौकरी को लेकर कई नियम (Job Rules) बदले जा सकते हैं. केंद्र की मोदी सरकार मजदूरी संहिता विधेयक (Labour Code) के नियमों को लागू करती है तो काम के घंटों (Working Hours) से लेकर ओवरटाइम (Overtime) तक के नियमों में बदलाव हो जाएगा. नए मसौदा कानून में कामकाज के अधिकतम घंटों को बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव पेश किया गया है. साथ ही नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच के अतिरिक्त कामकाज को भी 30 मिनट गिनकर ओवरटाइम में शामिल करने का प्रावधान है. इससे नौकरीपेशा लोगों को बड़ा फायदा हो सकता है.

    हर 5 घंटे के बाद कर्मचारियों को देना होगा 30 मिनट का ब्रेक
    मौजूदा नियमों के मुताबिक, 30 मिनट से कम समय को ओवरटाइम में शामिल नहीं किया जाता है. मसौदा नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच के अतिरिक्त कामकाज को भी 30 मिनट गिनकर ओवरटाइम में शामिल करने का प्रावधान है. ड्राफ्ट नियमों में किसी भी कर्मचारी से 5 घंटे से ज्यादा लगातार काम कराने को प्रतिबंधित किया गया है. कर्मचारियों को हर पांच घंटे के बाद आधा घंटे का इंटरवल देने के निर्देश भी ड्राफ्ट नियमों में शामिल किए गए हैं. श्रम संहिता के नियमों में बेसिक सैलरी कुल वेतन की 50 फीसदी या अधिक होनी चाहिए. इससे ज्यादातर कर्मचारियों के वेतन में बदलाव हो जाएगा. बेसिक सैलरी बढ़ेगी तो प्रॉविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी (Gratuity) में कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा. इससे टेक होम सैलरी (Take Home Salary) कम हो जाएगी.

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    कंपनियों को कर्मचारियों के लिए पीएफ में देना होगा ज्‍यादा योगदान
    प्रॉविडेंट फंड और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम भी बढ़ जाएगी. पीएफ और ग्रेच्युटी बढ़ने से कंपनियों की लागत में भी बढ़ोतरी होगी क्योंकि उन्हें भी कर्मचारियों के लिए पीएफ में ज्यादा योगदान देना पड़ेगा. इससे कंपनियों की बैलेंस शीट पर भी असर पड़ना तय है. यही कारण है कि इन नियमों को टाल दिया गया है. ये नियम 1 अप्रैल 2021 से लागू होने थे, लेकिन राज्य सरकारों और कंपनियों की तैयारी नहीं होने के कारण फिलहान इन्हें टाल दिया गया है. मोदी सरकार इन नियमों को जल्द से जल्द लागू करना चाहती है.

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