मोदी सरकार में किसानों के अच्छे दिन, सालाना 6000 रुपये की मदद से और आसान होगी खेती!

खेती-किसानी के लिए अच्छी खबर: अच्छे बीज, सही खाद, सरकारी सपोर्ट और तकनीक की वजह से बढ़ रहा गेहूं, चावल, गन्ना और दालों का उत्पादन!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 7, 2019, 3:54 PM IST
मोदी सरकार में किसानों के अच्छे दिन, सालाना 6000 रुपये की मदद से और आसान होगी खेती!
मोदी सरकार लगातार किसानों पर फोकस कर रही है
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 7, 2019, 3:54 PM IST
लगातार कृषि और किसानों पर फोकस कर रही मोदी सरकार के दौरान फसलों (खाद्यान्‍न) का उत्पादन बढ़ रहा है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भारत में खेती बाड़ी और किसानों की तरक्की के लिए शुभ संकेत हैं. भले ही किसानों के मोर्चे पर विपक्ष नरेंद्र मोदी सरकार को घेर रहा हो, लेकिन बढ़ रहा उत्पादन अपने आप बता रहा है कि खेती के दिन खराब नहीं हैं. सरकार सभी किसानों को सालाना 6000 रुपये दे रही है. इससे छोटे किसानों की जिंदगी और आसान होने वाली है.

कृषि, सहकारिता तथा किसान कल्‍याण मंत्रालय के मुताबिक 2018-19 के लिए किए गए अनुमान के अनुसार, देश में कुल खाद्यान्‍न उत्‍पादन 283.37 मिलियन टन होने की संभावना है. जो पिछले पांच साल (2013-14 से 2017-18) के औसत खाद्यान्‍न उत्‍पादन की तुलना में 17.62 मिलियन टन अधिक है. गेहूं, चावल, गन्ना, दलहन और तिलहन सभी के उत्पादन में वृद्धि का अनुमान लगाया गया है. हालांकि, पौष्टिक अनाजों के उत्पादन की गति थोड़ी धीमी है.



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अच्छे बीज, सही खाद, सरकारी सपोर्ट और तकनीक...
कृषि वैज्ञानिक प्रो. साकेत कुशवाहा ने कहा, 'फसल का उत्पादन बढ़ना खेती और किसानों दोनों के लिए अच्छा संकेत माना जा सकता है. उत्पादन बढ़ने की कुछ वजहें होती हैं. जैसे खेती का एरिया बढ़ना, मौसम अनुकूल रहना, अच्छे बीज, सही खाद मिलना, सरकारी सपोर्ट और तकनीक. खेती का एरिया मामूली ही सही लेकिन पहले से बढ़ रहा है. मौसम किसानों के अनुकूल रहा है. इसकी दूसरी बड़ी वजह तकनीकी विकास है. खेती में अब तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इसलिए यह परिणाम आ रहा है.'

कुशवाहा कहते हैं, 'अच्छे बीज मिल रहे हैं, बीज लगाने से पहले किसान नीम कोटिंग और उसका शोधीकरण कर रहे हैं. मशीनों से बीज लगाने के तरीके बदले हैं. स्वायल टेस्टिंग से खाद जरूरत के मुताबिक ही लग रही है. इसलिए उत्पादन बढ़ रहा है. वरना पहले हमारे अधिकांश किसान बिना सोचे-समझे खाद डालते थे. पारंपरिक बुआई में बीज अधिक लगता था, पैदावार कम होती थी. ज्यादा बीज सड़ जाते थे. ये सब बदला है इसलिए उत्पादन बढ़ा है.'
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...तो हो सकता है क्रांतिकारी बदलाव   
हालांकि, उनका ये भी मानना है कि इससे ये साबित नहीं हो जाता कि किसानों की आय बढ़ गई. अगर उत्पादन बढ़ने से उनकी आय बढ़ी है तो लागत भी बढ़ी है. कुल मिलाकर किसान का शुद्ध मुनाफा स्थिर है. हमारे देश में क्रॉपिंग इंटेंसिटी (फसल पैदा करने की क्षमता) कुछ विकसित देशों से आधी है. वो एक साल में उन्नत तकनीक से तीन फसलें उगाते हैं और हमारा किसान औसतन डेढ़. अगर हम ये तीन फसल तक ले जा पाते हैं तो क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा.

आईए नजर डालते हैं कि किस फसल का कितना उत्पादन बढ़ा


चावल उत्पादन
चावल का कुल उत्‍पादन 2018-19 के दौरान रिकॉर्ड 115.63 मिलियन टन अनुमानित है. 2017-18  में यह 112.76 मिलियन टन था. यानी 2.87 मिलियन टन की वृद्धि हुई. पिछले पांच साल के औसत उत्‍पादन 107.80 मिलियन टन की तुलना में भी 7.83 मिलियन टन अधिक है.

कितना पैदा होगा गेहूं
गेहूं का उत्‍पादन 101.20 मिलियन टन अनुमानित है. जो 2017-18 के दौरान 99.87 मिलियन टन था. यानी इस बार 1.33 मिलियन टन पैदावार बढ़ने वाली है. गेहूं का औसत प्रोडक्शन पिछले पांच साल में 94.61 मिलियन टन रहा है. उससे तुलना की जाए तो इस समय इसकी पैदावार 6.59 मिलियन टन अधिक है.

दालों का प्रोडक्शन
इस साल दलहन का कुल उत्‍पादन 23.22 मिलियन टन अनुमानित है. जो पिछले पांच साल के औसत उत्‍पादन 20.26  मिलियन टन की तुलना में 2.96 मिलियन टन अधिक है.

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तिलहन उत्पादन
2018-19 के दौरान देश में तिलहन का कुल उत्‍पादन 31.42 मिलियन टन होने का अनुमान लगाया गया है. पिछले पांच साल के औसत तिलहन उत्‍पादन की तुलना में यह 1.77 मिलियन टन अधिक है.

पौष्टिक अनाज
इस साल पौष्टिक/मोटे अनाजों का उत्‍पादन 43.33 मिलियन टन अनुमानित है. जो इसके पांच साल के औसत उत्‍पादन की तुलना में 0.24 मिलियन टन अधिक है.

गन्ना उत्पादन 
इस साल देश में गन्ने का भी बंपर उत्पादन होगा. करीब 400.37 मिलियन टन का अनुमान है. जो 2017-18 की तुलना में 20.46 मिलियन टन अधिक है. पिछले पांच साल में इसका औसत प्रोडक्शन 349.78 मिलियन टन रहा है. उसकी तुलना में इस बार 50.59 मिलियन टन अधिक है.

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हमने खेती-किसानी के लिए सकारात्मक माहौल बनाया: बीजेपी
विपक्ष आरोप लगाता रहता है कि किसानों की स्थिति खराब है. लेकिन, इन आंकड़ों के आधार पर बीजेपी प्रवक्ता राजीव जेटली अब विपक्ष को ही घेर रहे हैं. उनका कहना है कि कांग्रेस के वक्त किसानों की दुर्दशा थी. हमने तो अन्नदाताओं की सहायता करके उन्हें उबार लिया है. लोग खेती-किसान छोड़ रहे होते तो क्या उत्पादन बढ़ जाता? जाहिर है कि खेती के लिए हमारी सरकार ने काफी सकारात्मक माहौल बनाया है. हमने लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दिया है. अब हर किसान को हम सालाना 6000 रुपये दे रहे हैं, इससे खेती की दशा और सुधरेगी.

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