किसानों को घर पर मिलेगी मिट्टी के नमूनों की फ्री जांच करवाने की सुविधा

किसानों को घर पर मिलेगी मिट्टी के नमूनों की फ्री जांच करवाने की सुविधा
एनएफएल की मोबाइल स्वायल टेस्टिंग लैब

खाद बनाने वाली सरकारी कंपनी ने खुद शुरू किया मोबाइल स्वायल टेस्टिंग लैब, ताकि उर्वरकों का हो संतुलित इस्तेमाल

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 29, 2020, 11:09 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार के अधीन आने वाली कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) ने खादों के उचित उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला (Mobile Soil Testing Lab) तैयार की है. यह लैब गांवों में पहुंचकर किसानों के खेत की जांच करेगी. फिलहाल ऐसी पांच मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं को तैयार किया गया है. एनएफएल (NFL) के सीएमडी वीएन दत्त ने नोएडा स्थित अपने कारपोरेट कार्यालय परिसर इसे हरी झंडी दिखाई.

मिट्टी की जांच करने वाले आधुनिक उपकरणों से लैस ये मोबाइल प्रयोगशालाएं मिट्टी का समग्र और सूक्ष्म पोषक तत्व विश्लेषण करेगी. इन मोबाइल प्रयोगशालाओं में किसानों को विभिन्न कृषि विषयों पर शिक्षित करने के लिए ऑडियो-वीडियो सिस्टम भी मौजूद रहेगा.

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मोबाइल लैब के अलावा देश के विभिन्न स्थानों पर स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के जरिए भी एनएफएल किसानों को सेवाएं दे रही है. इन सभी प्रयोगशालाओं ने वर्ष 2019-20 में मुफ्त में लगभग 25,000 मिट्टी के नमूनों की जांच की थी.



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उर्वरकों के असंतुलित इस्तेमाल से भी बंजर हो रही धरती (File Photo)


मोदी सरकार (Modi Government) ने खेत की मिट्टी की जांच पर काफी जोर दिया है. सभी किसानों (Farmers) के पास स्वायल हेल्थ कार्ड पहुंचाने का लक्ष्य है ताकि किसानों को उनके खेत की सेहत का पता चल सके. अन्यथा उसके अभाव में किसान भाई उन खादों को भी खेत में डालते रहते हैं जिनकी जरूरत नहीं होती है. ऐसे में फसल लागत तो बढ़ती ही है साथ में खेत की उर्वरा शक्ति को भी नुकसान पहुंचता है.

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पिछले कुछ समय से देखा गया है कि अज्ञानता की वजह से खादों का असंतुलित उपयोग हुआ है. इससे जमीन का बंजर होना भी बढ़ा है. इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि धरती मां को बंजर करने का हक किसी को नहीं है. ऐसे में अब स्वायल टेस्टिंग के जरिए यह कोशिश की जा रही है कि किसी भी खाद का संतुलित उपयोग ही हो. किसी खाद कंपनी द्वारा खुद स्वायल टेस्टिंग का बीड़ा उठाना इसी सोच का एक हिस्सा लगता है.
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