किसानों के लिए बड़ी खबर! आमदनी बढ़ाने के लिए इस स्कीम को दिए 1122 करोड़ रुपये

किसानों के लिए बड़ी खबर! आमदनी बढ़ाने के लिए इस स्कीम को दिए 1122 करोड़ रुपये
देश में स्वायल टेस्टिंग लैब की भारी कमी है

देश में इस समय छोटी-बड़ी 7949 लैब हैं, जो किसानों और खेती के हिसाब से नाकाफी कही जा सकती है. इस बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि 10,845 प्रयोगशालाएं मंजूर की गईं हैं. जो 2009 से 2014 तक मंजूर 171 लैब से 63 गुना अधिक हैं.

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  • Last Updated: February 19, 2020, 3:22 PM IST
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नई दिल्ली. मोदी सरकार देश भर में 10,845 स्वायल टेस्टिंग लैब बनाएगी. ताकि किसान अपनी खेती के स्वास्थ्य के हिसाब से उसमें उर्वरक डाल सकें. इससे खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल बंद होगा, जिससे लागत कम आएगी, फसल जहरीली नहीं होगी और उत्पादकता बढ़ेगी. अभी किसान परिवारों की संख्या के मुकाबले देश में काफी कम लैब हैं. जिसकी वजह से उन्हें यह पता नहीं होता कि कौन सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है. फिलहाल देश में मोदी सरकार आने के बाद इस तरफ ज्यादा ध्यान दिया ताकि जैसे लोग अपनी सेहत का टेस्ट करवाते हैं वैसे ही धरती की भी कराएं.

देश में इस समय छोटी-बड़ी 7949 लैब हैं, जो किसानों और खेती के हिसाब से नाकाफी कही जा सकती है. इस बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि 10,845 प्रयोगशालाएं मंजूर की गईं हैं. जो 2009 से 2014 तक मंजूर 171 लैब से 63 गुना अधिक हैं.

कृषि मंत्री ने बिना कांग्रेस शासन का नाम लिए कहा है कि स्वायल हेल्थ कार्ड स्कीम (Soil Health Card Scheme) पर 2009 से 2014 के बीच 93.92 करोड़ रुपये का बजट था. जबकि 2014 से 20 तक इसके लिए 1122 करोड़ रुपये का बजट है.



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कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट




राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद कहते हैं कि देश भर में 14.5 करोड़ किसान परिवार हैं. ऐसे में इतनी कम प्रयोगशालाओं में 11-12 करोड़ कार्ड कैसे बन रहे हैं. देश में करीब 6.5 लाख गांव हैं. ऐसे में वर्तमान संख्या को देखा जाए तो 82 गांवों पर एक लैब है. इसलिए इस समय कम से कम 2 लाख प्रयोगशालाओं की जरूरत है. ऐसा होगा तभी हर किसान को सही मायने में पता चल सकता है कि उसके खेत में कौन सी खाद की कमी है और किसकी अधिकता है.

मालूम हो कि मोदी सरकार ने आज से ठीक पांच साल पहले इस स्कीम की शुरुआत की थी ताकि किसानों को फसल की लागत कम आए और धरती की उर्वरा शक्ति भी खराब न हो.

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