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बैंकिंग सेक्‍टर के लिए अच्‍छी खबर! इंडिया रेटिंग्स ने वित्‍त वर्ष 2021-22 के लिए आउटलुक सुधारकर निगेटिव से किया स्थिर

इंडिया रेटिंग्‍स ने बैंकों के आउटलुक में सुधार किया है.
इंडिया रेटिंग्‍स ने बैंकों के आउटलुक में सुधार किया है.

इंडिया रेटिंग्स (India Ratings) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के आउटलुक को जहां नकारात्मक से स्थिर किया है, वहीं निजी क्षेत्र के बैंकों (Private Banks) के लिए स्थिर श्रेणी में बरकरार रखा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (GNPAs) बढ़कर 30 फीसद पर पहुंच सकती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 10:16 PM IST
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मुंबई. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings & Research) ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए इंडियन बैंकिंग सेक्‍टर (Indian Banking Sector) के आउटलुक में सुधार करते हुए निगेटिव से स्थिर (Stable Outlook) कर दिया है. साथ ही रेटिंग एजेंसी का कहना है कि रिटेल लोन सेगमेंट (Retail Loan Segment) में भारतीय बैंकों पर आने वाले समय में दबाव बढ़ सकता है. आईआरआर ने वित्त वर्ष 2021 के लिए कर्ज की वृद्धि (Credit Growth) के अनुमान को 1.8 फीसदी से बढ़ाकर 6.9 फीसद कर दिया है. वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 के लिए इसे 8.9 फीसदी कर दिया है.

एजेंसी ने सरकारी और निजी बैंकों का आउटलुक रखा स्‍टेबल
रेटिंग एजेंसी ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के परिदृश्य (PSBs Outlook) को नकारात्मक से स्थिर कर दिया है. वहीं, निजी क्षेत्र के बैंकों (Private Banks) के लिए आउटलुक को पहले की तरह स्थिर श्रेणी में बरकरार रखा है. एजेंसी के मुताबिक, बैंकिंग सिस्‍टम में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNP+Restructured Loans) बढ़कर 30 फीसद पर पहुंच सकती हैं. साथ ही कहा है कि वित्‍त वर्ष 2020-21 की दूसरी छमाही में रिटेल लोन सेगमेंट में 1.7 गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की सकती है. सार्वजनकि क्षेत्र के बैंकों के लिए वित्‍त वर्ष 2021-22 के दौरान स्‍ट्रेस्‍ड रिटेल एसेट्स बढ़कर 2.9 फीसदी तक पहुंच सकती हैं, जो चालू वित्‍त वर्ष में 2.1 फीसदी हैं.

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एनपीए के लिए प्रावधान बढ़कर पहुंच जाएगा 80 फीसदी तक


इंडिया रेटिंग्‍स के मुताबिक, प्राइवेट बैंकों के लिए वित्‍त वर्ष 2021-22 के दौरान स्‍ट्रेस्‍ड रिटेल एसेट्स बढ़कर 4.3 फीसदी तक पहुंच सकती हैं, जो चालू वित्‍त वर्ष में 1.2 फीसदी हैं. एजेंसी के निदेशक (वित्तीय संस्थान) जिंदल हरिया ने कहा कि बीते 9 महीने में बैंकों को अपनी पुरानी दबाव वाली एसेट्स के लिए प्रावधान बढ़ाने का मौका मिला. ये दबाव वाली एसेट्स कोरोना महामारी से पहले की थीं. हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक इन एनपीए पर प्रावधान बढ़कर 75 से 80 फीसदी पर पहुंच जाएगा. इससे बैंकों को कोविड-19 के कारण बने दबाव को झेलने में मदद मिलेगी.
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