अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अच्‍छे संकेत! देश का चालू खाता घाटा दिसंबर 2020 तिमाही में कम होकर रहा 0.2 फीसदी

देश का चालू खाता घाटा दिसंबर तिमाही में कम हो गया है.

देश का चालू खाता घाटा दिसंबर तिमाही में कम हो गया है.

वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 9 महीनों के दौरान चालू खाते (Current Account) में 1.7 फीसदी अधिशेष (Surplus) की स्थिति रही, जबकि एक साल पहले 2019-20 में इसमें 1.2 फीसदी का घाटा था. आरबीआई के अनुसार, दिसंबर तिमाही में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 34.5 अरब डॉलर पहुंच गया, जो इससे पिछली तिमाही में 14.8 अरब डॉलर था.

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  • Last Updated: March 31, 2021, 8:32 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्‍या लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में एक बार फिर देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार (Economic Growth) को लेकर आशंका के काले बादल मंडराने लगे हैं. इस बीच देश के चालू खाता घाटे को लेकर आई खबर ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) को लेकर अच्‍छे संकेत दिए हैं. देश का चालू खाता घाटा (CAD) दिसंबर 2020 तिमाही में कम होकर 1.7 अरब डॉलर यानी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 0.2 फीसदी रहा है.

दो तिमाहियों के दौरान चालू खाते में रही सरप्‍लस की स्थिति

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2019 तिमाही के दौरान देश का चालू खाता घाटा 2.6 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 0.4 फीसदी रहा था. आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान पिछली दो तिमाहियों में चालू खाते में अधिशेष (Surplus) की स्थिति बरकरार रही. यह अधिशेष 15.1 अरब डॉलर और 19 अरब डॉलर रहा. चालू खाते का घाटा वैश्विक बाजारों (Global Market) के साथ लेनदेन के व्यवहार में देश के हालात को तय करने का अहम मानक है.

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वस्‍तु व्‍यापार घाटा बढ़कर पहुंच गया 34.5 अरब डॉलर

चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों यानी तीन तिमाहियों में इसमें 1.7 फीसदी अधिशेष की स्थिति रही, जबकि एक साल पहले 2019-20 में इसमें 1.2 फीसदी का घाटा था. आरबीआई के अनुसार, दिसंबर तिमाही में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 34.5 अरब डॉलर पहुंच गया, जो इससे पिछली तिमाही में 14.8 अरब डॉलर था. इसके अलावा शुद्ध निवेश आय के भुगतान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कोरोना संकट के बीच देश के आयात और निर्यात में कमी दर्ज की गई है. ऐसे में चालू खाता घाटा कम होना तय माना ज रहा था. बता दें कि देश से किए गए निर्यात कारोबार और आयात के अंतर से चालू खाता घाटा निर्धारित होता है.
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