नौकरीपेशा के लिए अच्‍छी खबर! कंपनी बदलने पर मिलेगा ग्रैच्युटी ट्रांसफर का विकल्‍प, जानें इस बारे में सबकुछ

सरकार जल्‍द ही नौकरीपेशा लोगों के लिए जॉब बदलने पर ग्रैच्‍युटी ट्रांसफर का विकल्‍प उपलब्‍ध कराने की योजना बना रही है.

सरकार जल्‍द ही नौकरीपेशा लोगों के लिए जॉब बदलने पर ग्रैच्‍युटी ट्रांसफर का विकल्‍प उपलब्‍ध कराने की योजना बना रही है.

केंद्र, यूनियन और इंडस्ट्री के बीच मौजूदा ग्रैच्युटी स्ट्रक्चर में बदलाव पर सहमति बन गई है. अब नौकरीपेशा (Salaried Workers) लोगों को नौकरी बदलने पर प्रॉविडेंट फंड (EPF) की ही तरह ग्रैच्‍युटी ट्रांसफर (Gratuity Transfer) करने का मौका भी मिल सकता है. वहीं, पीएफ की ही तरह हर महीने ग्रैच्‍युटी कंट्रीब्‍यूशन (Gratuity Contribution) को लेकर भी सहमति बन गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 22, 2021, 7:04 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार नौकरीपेशा लोगों (Salaried Workers) के लिए जल्‍द ही नई व्‍यवस्‍था शुरू करने की योजना बना रही है. इसके तहत कर्मचारियों को एम्‍प्‍लॉय प्रॉविडेंट फंड (EPF) की ही तरह नौकरी बदलने पर ग्रैच्युटी ट्रांसफर (Gratuity Transfer) का भी मौका मिल सकता है. इसके लिए केंद्र सरकार, कर्मचारी यूनियन और इंडस्ट्री के बीच मौजूदा ग्रैच्युटी स्ट्रक्चर में बदलाव पर सहमति बन गई है. अब ग्रैच्‍युटी ट्रांसफर को सोशल सिक्योरिटी कोड (Social Security Code) से जुड़े नियमों में शामिल किया जाएगा.

अगले महीने आ सकती है अंतिम अधिसूचना

सीएनबीसी-आवाज को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अब प्रॉविडेंट फंड की ही तरह नौकरीपेशा को ग्रैच्युटी ट्रांसफर का भी विकल्प मिलेगा. ग्रैच्युटी पोर्टेबिलिटी पर इंडस्ट्री और कर्मचारी यूनियनों में सहमति बनने के बाद नौकरी बदलने पर ग्रैच्युटी ट्रांसफर की व्‍यवस्‍था लागू होग जाएगी. इसके साथ ही पीएफ की तरह हर महीने ग्रैच्युटी कंट्रीब्यूशन पर भी सहमति बन गई है. सूत्रों के मुताबिक, श्रम मंत्रालय-यूनियन-इंडस्ट्री की बैठक में ये सहमति बनी है. ग्रैच्युटी को सीटीसी का जरूरी हिस्सा बनाने का भी प्रस्ताव है. ये प्रावधान सोशल सिक्योरिटी कोड के नियम में शामिल होगा. सूत्रों के मुताबिक, इस पर अंतिम अधिसूचना अप्रैल 2021 में संभव है.

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इंडस्‍ट्री वर्किंग डे बढ़ाने पर नहीं है सहमत

ग्रैच्युटी के लिए वर्किंग डे (Working Days) बढ़ाने पर इंडस्ट्री की सहमति नहीं मिली है. इंडस्ट्री ग्रैच्युटी के लिए वर्किंग डे 15 दिन से 30 दिन करने के प्रस्ताव पर असहमत है. बता दें कि किसी कंपनी में लगातार 5 साल तक काम करने वाले कर्मचारी को सैलरी, पेंशन और प्रोविडेंट फंड के अलावा जो पैसा मिलता है, उसे ग्रैच्युटी कहते हैं. इसका एक छोटा हिस्सा कर्मचारी की सैलरी से कटता रहता है. वहीं, ग्रैच्युटी का बड़ा हिस्सा कंपनी अपनी तरफ से देती है. यह एक तरह से कंपनी का लॉन्ग टर्म बेनिफिट होता है.

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ऐसे तय की जाती है ग्रैच्‍युटी की रकम

किसी भी कर्मचारी को मिलने वाली ग्रैच्युटी दो बातों पर निर्भर करती है. पहली, कर्मचारी ने कितने साल तक एक ही कंपनी में काम किया है. एक ही कंपनी में कम से कम 5 साल काम करने वाले व्‍यक्ति को ग्रैच्‍युटी मिलती है. मौजूदा समय में ग्रैच्‍युटी तय करने का एक तय फार्मूला है. इसके मुताबिक, (अंतिम सैलरी) x (15/26) x (5)= ग्रैच्‍युटी की रकम. अब मान लीजिए किसी की अंतिम सैलरी 50 हजार रुपये है तो उसकी ग्रैच्‍युटी (50,000) x (15/26) x (5)= 1,44,230 रुपये होगी. यहां महीने में 26 दिन ही रखे जाते हैं, क्योंकि माना जाता है कि 4 दिन छुट्टी होती है. वहीं एक साल में 15 दिन के आधार पर ग्रैच्यु​टी की गणना होती है. दूसरी, उसकी अंतिम सैलरी में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता कितना है.
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