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कोरोना संकट के बीच अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अच्‍छी खबर! वित्त वर्ष 2020-21 में मुनाफे में रह सकता है चालू खाता

मुख्‍य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्‍यम ने कहा कि देश ने कोरोना प्रकोप के कारण बने आर्थिक हालात का शानदार तरीके से सामना किया है.
मुख्‍य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्‍यम ने कहा कि देश ने कोरोना प्रकोप के कारण बने आर्थिक हालात का शानदार तरीके से सामना किया है.

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) केवी सुब्रमण्‍यम (KV Subramanian) ने कहा है कि वैश्विक महामारी (Pandemic) के इस दौर में मांग का संकट पैदा हुआ है. भारत इस संकट से बेहतर तरीके से निपटा है. उन्होंने कहा कि इस साल हम चालू खाते का अधिशेष (Current Account Surplus) दर्ज कर सकते हैं. पहली तिमाही में हमारा चालू खाते का अधिशेष 20 अरब डॉलर के आसपास रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2020, 10:40 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना संकट के बीच अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) के लिए अच्‍छी खबर है कि वित्‍त वर्ष 2020-21 में देश का चालू खाता (Current Account) मुनाफे में रह सकता है. मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) केवी सुब्रमण्‍यम (KV Subramanian) ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारत चालू खाते का अधिशेष (CAP) दर्ज कर सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था में उत्पादन (Production) अधिक है, जबकि मांग (Demand) कम है यानी अंडर हीटिंग की स्थिति है, जिसके चलते आयात (Import) घटेगा. इससे देश चालू खाते का अधिशेष (Surplus) हासिल कर सकता है. उद्योग संगठन सीआईआई (CII) के ऑनलाइन समिट में मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि मौजूदा संकट टैपर टैंट्रम से अलग है.

सुब्रमण्‍यम ने कहा- मौजूदा आर्थिक संकट टैपर टैंट्रम से काफी अलग है
टैपर टैंट्रम का मतलब वर्ष 2013 में निवेशकों के उस घबराहट वाले रुख से है, जिससे अमेरिका में ट्रेजरी हासिल करने में जबरदस्‍त इजाफा हुआ. निवेशकों को जब पता चलता कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपने उदार मौद्रिक नीति (QE) कार्यक्रम पर रोक लगाने जा रहा है तो उनकी सामूहिक प्रतिक्रिया घबराहट से भरी रही, जिससे अमेरिका में ट्रेजरी हासिल करने में इजाफा हुआ. इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति में तेजी आई और यह दहाई अंक में पहुंच गई. सीईए सुब्रमण्‍यम ने कहा कि कोरोना संकट कुछ अलग है. भारत ने इस संकट की प्रकृति को पहचाना है और इससे पहले के आर्थिक संकटों के मुकाबले अलग तरीके से निपटने की कोशिश की है.

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सीईए ने कहा, देश में लंबे समय की आर्थिक वृद्धि पर नहीं पड़ेगा असर


मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि वैश्विक महामारी के इस दौर में मांग का संकट पैदा हुआ है. भारत ने इस संकट से बेहतर तरीके से निपटा है. उन्होंने कहा, 'तथ्य यही है कि इस साल हम चालू खाते का अधिशेष दर्ज कर सकते हैं. पहली तिमाही में हमारा चालू खाते का अधिशेष 20 अरब डॉलर के आसपास रहा है. स्पष्ट तौर पर यह 19.8 अरब डॉलर रहा है. अगर अगली तिमाहियों में भी ऐसा ही प्रदर्शन रहा तो हम चालू खाते का अधिशेष दर्ज कर सकते हैं. उन्‍होंने कहा कि लॉकडाउन की वजह से कुछ समय के लिए वृद्धि प्रभावित हुई है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों की वजह से मध्यम से दीर्घावधि की वृद्धि प्रभावित नहीं होगी.



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'कोविड-19 अर्थव्‍यवस्‍था में ओवरहीटिंग का नहीं अंडरहीटिंग का संकट है'
सुब्रमण्‍यम ने कहा कि सामान्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं का संकट मांग के मुताबिक उत्पादन नहीं होने की वजह से पैदा हुआ है. वहीं, कोविड संकट उत्पादन ज्‍यादा और मांग कम होने का संकट है. कोविड-19 ओवरहीटिंग नहीं अंडरहीटिंग का संकट है, जिसकी वजह से सुधारों की जरूरत महसूस हुई है. दरअसल, भारतीय अर्थव्यवस्था की मध्यम से दीर्घावधि की वृद्धि के लिए इनकी काफी आवश्यकता है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित होने से बचाया जा सके और इकोनॉमी की संभावित वृद्धि की क्षमता को ऊंचा रखा जा सके. सुधारों पर सुब्रमण्यम ने इनसॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड (IBC) का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था को संगठित रूप देने में मदद मिलेगी. साथ ही लंबे समय से अटके कृषि और श्रम सुधारों का भी जिक्र किया.
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