Good News: अब 5 के बजाय 1 साल में ही मिलेगी ग्रेच्युटी! संसदीय समिति ने की सिफारिश

Good News: अब 5 के बजाय 1 साल में ही मिलेगी ग्रेच्युटी! संसदीय समिति ने की सिफारिश
निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्‍युटी भुगतान की समयसीमा 5 साल से घटाकर 1 या 3 साल किया जा सकता है.

सोशल सिक्‍योरिटी कोड (SSC) और इंडस्‍ट्रीयल रिलेशन कोड (IRC) पर संसदीय समिति (Parliamentary Standing Committee ) की दो रिपोर्ट कहती हैं कि ग्रेच्‍युटी भुगतान (Gratuity) के लिए 5 साल की अवधि में ढील दिए जाने के पर्याप्‍त और ठोस कारण मौजूद हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 11, 2020, 7:04 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार देश के प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए अच्‍छी पहल की दिशा में काम कर रही है. अगर श्रम पर संसद की स्‍थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) की सिफारिशों को स्‍वीकार कर लिया जाता है तो निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को ग्रेच्‍युटी (Gratuity) की रकम 5 साल के बजाय 1 साल पूरा करने पर ही मिलने लगेगी. फिलहाल किसी कर्मचारी को कंपनी में काम की अवधि के आधार पर प्रति साल 15 दिन की सैलरी के आधार पर ग्रेच्युटी भुगतान किया जाता है. ये भुगतान कर्मचारी के किसी कंपनी में लगातार पांच साल पूरे करने पर ही मिलता है. अगर कर्मचारी 4 साल 11 महीने काम करने के बाद भी कंपनी छोड़ देता है या उसे निकाल दिया जाता है तो उसे ये भुगतान नहीं मिलता है.

एक से तीनी साल करने पर विचार कर रही है केंद्र सरकार
सोशल सिक्‍योरिटी कोड और इंडस्‍ट्रीयल रिलेशन कोड पर संसदीय समिति की दो रिपोर्ट कहती हैं कि ग्रेच्‍युटी भुगतान के लिए 5 साल की अवधि में ढील दिए जाने के पर्याप्‍त और ठोस कारण मौजूद हैं. बता दें कि केंद्र सरकार कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी भुगतान की समय सीमा को पांच साल से घटाकर एक से तीन साल के बीच करने पर विचार कर रही है. दरअसल, भारत के श्रम बाजार में ज्यादातर कर्मचारी कम अवधि के लिए कार्यरत होते हैं. इसको देखते हुए ग्रेच्युटी पाने की समससीमा कम करने की मांग लगातार की जा रही थी. इसी को देखते हुए सरकार इसकी शर्तों में ढील देने और लागू करने के तरीके पर विचार कर रही है.

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'न्‍यूनतम एक साल की अवधि पर बन सकती है सहमति'


श्रम पर संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्रेच्युटी भुगतान के लिए मौजूदा पांच साल की अवधि को घटाकर एक साल किया जाना चाहिए. बीजद (BJD) सांसद भतृहरि महताब की अध्‍यक्षता वाली संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल सिक्‍योरिटी कोड (SSC) में न्‍यूनतम एक साल की अवधि पर सहमति बन सकती है. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि पांच साल की समयसीमा पक्षपातपूर्ण है. इसे तत्‍काल खत्‍म किया जाना चाहिए. उन्‍होंने तर्क दिया कि अगर इम्‍प्‍लॉय स्‍टेट इंश्‍योरेंस कॉरपोरेशन (ESIC) एक महीने के सहयोग के बाद ही कर्मचारी को लाभार्थी के तौर पर स्‍वीकार करता है तो ग्रेच्‍युटी भुगतान में ये नियम क्‍यों लागू नहीं किया जा सकता.

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ग्रेच्‍युटी की रकम अधिकतम 20 लाख रुपये हो सकती है
श्रम विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रेच्युटी भुगतान के लिए पांच साल की सीमा पुरानी है. अब ये व्‍यवस्‍था कर्मचारियों के हित में काम नहीं करती है. श्रमिक संघों का दावा है कि कई कंपनी लागत को बचाने के लिए कर्मचारियों को पांच साल से पहले ही हटा देती हैं ताकि उनकी ग्रेच्युटी की लागत बच जाए. ग्रेच्युटी के लिए पांच साल की समयसीमा लंबे समय तक काम करने के कल्चर को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी. ग्रेच्युटी पेमेंट एक्ट 1972 के नियमों के मुताबिक, ग्रेच्युटी की रकम अधिकतम 20 लाख रुपये तक हो सकती है. ग्रेच्युटी के लिए कर्मचारी को एक ही कंपनी में कम से कम पांच साल तक नौकरी करना अनिवार्य है.
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