भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अच्‍छे संकेत! क्रिसिल का अनुमान, 2021-22 में 11 फीसदी रहेगी विकास दर

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था अगले वित्‍त वर्ष के दौरान तेजी पकड़ लेगी.

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था अगले वित्‍त वर्ष के दौरान तेजी पकड़ लेगी.

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) कोरोना संकट से निकलकर वित्त वर्ष 2021-22 में 11 फीसदी की रफ्तार से विकास करेगी. वहीं, अनुमान लगाया कि वित्‍त वर्ष 2022-23 और 2024-25 के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार (GDP Growth) औसतन 6.3 फीसदी रहेगी.

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नई दिल्‍ली. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) ने भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को लेकर अच्‍छा संकेत दिया है. एजेंसी का कहना है कि वित्त वर्ष 2021-22 (FY22) में देश की अर्थव्‍यवस्‍था कोरोना संकट से निकलकर 11 फीसदी की रफ्तार से विकास (Growth Rate) करेगी. सकल घरेलू उत्‍पाद की वृद्धि (GDP Growth) को लेकर जताया गया क्रिसिल का अनुमान भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) के अनुमान से मेल खाता है. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि वित्‍त वर्ष 2021-22 में वास्‍तविक जीडीपी ग्रोथ रेट 11 फीसदी रहने की उम्मीद है. वहीं, नॉमिनल जीडीपी 15.4% रहने का अनुमान है.

चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में दर्ज होगी 8 फीसदी गिरावट

क्रिसिल ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की सकती है. साथ ही कहा कि अगले वित्‍त वर्ष के दौरान भारत की जीडीपी में जबरदस्त उछाल के चार प्रमुख कारण होंगे. रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, भारत के लोगों ने अब कोरोना वायरस महामारी के साथ जीना सीख लिया है. उनके लिए अब यह न्यू नॉर्मल बन गया है. इसके साथ ही देश में कोविड-19 संक्रमण फैलने की रफ्तार पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है. वहीं, वैक्सीनेशन अभियान के रफ्तार पकड़ने के साथ निवेश केंद्रित सरकारी खर्च बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था 11 फीसदी की तेजी से विकास करेगी.

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'शानदार बढ़ोतरी के बाद भी जीडीपी को होगा नुकसान'

ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा कि कोविड-19 का जोखिम अभी बरकरार है. इस वजह से भारत की जीडीपी वित्‍त वर्ष 2021-22 की दूसरी छमाही में बेहतर प्रदर्शन करेगी. देश की अर्थव्यस्था इस दौरान कोरोना संकट के पहले के स्‍तर पर पहुंच जाएगी और इसमें वित्त वर्ष 2019-20 के मुकाबले 2 फीसदी ज्‍यादा तेजी दिखेगी. वहीं, भारतीय अर्थव्यवस्था 2023 से 2025 के बीच औसतन 6.3 फीसदी की दर से विकास करेगी. यह कोरोना संकट से पहले के औसत 6.7 फीसदी से कम रहेगी. जोशी ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में 11 फीसदी की तेजी के बाद भी अर्थव्यवस्था को कुल जीडीपी के 11 फीसदी के बराबर नुकसान होगा.
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