2021 तक फिर से शुरू हो जाएंगे खाद के बंद पड़े चार बड़े कारखाने, किसानों को होगा फायदा

2021 तक फिर से शुरू हो जाएंगे खाद के बंद पड़े चार बड़े कारखाने, किसानों को होगा फायदा
खाद कारखाना (प्रतीकात्मक फोटो)

यूरिया की बढ़ती मांग के बीच किसानों के लिए अच्छी खबर, 2023 तक शुरू हो जाएंगे बंद पड़े ये पांच खाद कारखाने

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नई दिल्ली. साल दर साल खाद (Fertilizers) की खपत में वृद्धि हो रही है. हर साल किसी न किसी राज्य में खाद, विशेषतौर पर यूरिया की सॉर्टेज भी हो रही है. इस बार इसे लेकर मध्य प्रदेश में मारामारी है. वहां पर दुकानदार ऊंचे दाम पर खाद बेच रहे हैं. ऐसे में सरकार इस कोशिश में जुट गई है कि बंद पड़े खाद कारखानों को शुरू करके डिमांड को पूरा किया जाए. किसी राज्य में ऐसी कोई दिक्कत न आए. केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा (DV Sadananda Gowda) ने कहा कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और घरेलू स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उर्वरक क्षेत्र के लिए कई पहल की गईं हैं.

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यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार ने हिंदुस्तान उर्वरक निगम लिमिटेड (HFCL) एचएफसीएल की बरौनी, रामगुंडम, तालचर, गोरखपुर (Gorakhpur) और सिंदरी की बंद उर्वरक इकाइयों को फिर से चालू करने का काम शुरू कर दिया है. यह सार्वजनिक उपक्रमों का एक संयुक्त उद्यम है. इसमें से प्रत्येक इकाई की वार्षिक उत्पादन क्षमता 1.27 एमएमटी वार्षिक होगी. ये संयंत्र गैस से संचालित होंगे.



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भारत 2021 तक यूरिया को लेकर चीन पर निर्भरता खत्‍म करने की दिशा में काम कर रहा है.

कहां कब पूरा होगा काम

रामगुंडम इकाई पूरा होने के चरण में है. इसका 99.58 फीसदी काम पूरा हो गया है. तालचर प्रोजेक्ट 59.48 फीसदी पूरा हो गया है. यह 2023 तक पूरा होगा. गोरखपुर प्लांट में 88.10% काम पूरा हो गया है, इसे 2021 तक शुरू होने की उम्मीद है. इसी तरह सिंदरी इकाई में 77.80 और बरौनी में 77.60 परसेंट काम पूरा हो चुका है. ये दोनों भी 2021 तक पूरी हो जाएंगी.

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यूरिया की बढ़ती मांग

-वर्ष 2018-19 के दौरान 240 एलएमटी यूरिया उत्पादन (Urea Production) की तुलना में वर्ष 2019-20 में 244.55 एलएमटी उत्पादन हुआ.

-यूरिया की बिक्री पिछले वर्ष यानी 2018-19 के 320.20 एलएमटी था जो वर्ष 2019-20 में 336.97 एलएमटी तक पहुंच गया.

उर्वरक मंत्री ने कहा कि संशोधित नई मूल्य निर्धारण योजना के मुताबिक सभी ऐसी उर्वरक इकाइयों को जो ईंधन के रूप में नेफ्था का उपयोग कर रही हैं, उन्हें प्राकृतिक गैस से संचालित किया जाएगा. मद्रास फर्टिलाइजर्स लिमिटेड ने पहले से ही नेफ्था के स्थान पर प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल शुरू कर दिया है.
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