सरकार ने लोन गारंटी योजना के नियमों में ढील दी, इन कंपनियों को होगा सीधा फायदा

सरकार ने लोन गारंटी योजना के नियमों में ढील दी, इन कंपनियों को होगा सीधा फायदा
जानिए अब कौन-कौन ले सकता है एमएसएमई की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत लोन

केंद्र सरकार (Government of India) ने एमएमएमई का दायरा बढ़ा दिया है. कोरोना से निपटने के लिए शुरू की गई तीन लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत अब डॉक्टर, वकील और चार्टर्ड अकाउंटेट भी लोन ले सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 18, 2020, 7:45 AM IST
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नई दिल्ली. संकट से जूझ रही गैर बैंकिग वित्तीय कंपनियों (NBFC-Non Banking Financial Corporation) और आवास वित्त कंपनियों (HFC-Housing Finance Companies) को पैसे मुहैया कराने के लिए सरकार ने सरकारी बैंकों (PSU Banks) द्वारा उनके वाणिज्यिक पत्रों और बांड को खरीदने की आंशिक लोन गारंटी योजना (पीसीजीएस) के नियमों में ढील दी है. सरकार ने योजना की अवधि को भी तीन माह बढ़ा दिया है. योजना के तहत हुई प्रगति को देखते हुये सरकार ने कुछ कदम उठाये हैं. जहां तक इन वित्त संस्थानों के एए और एए- रेटिंग वाले बांड और वाणिज्यिक पत्रों को लेने की बात है, इनके लिये तय सीमा को करीब करीब हासिल कर लिया गया है जबकि कम रेटिंग वाले वाणिज्यिक पत्र में खरीदार नहीं मिल रहे हैं. यही वजह है कि सरकार ने अब पीसीजीएस 2.0 मे सुधार करने का फैसला किया है.

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने एमएमएमई का दायरा बढ़ा दिया है. कोरोना से निपटने के लिए शुरू की गई तीन लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत अब डॉक्टर, वकील और चार्टर्ड अकाउंटेट भी लोन ले सकते हैं.

इन पेशों से जुड़ा कोई भी व्यक्ति एमएसएमई की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत बिना गारंटी के लोन ले सकता है. सरकार ने स्कीम में लोन की आउटस्टैंडिंग सीमा को भी बढ़ाकर दोगुना कर दिया है. कोरोना की वजह से व्यवसाय पर पड़े प्रभाव को कम करने के लिए व्यापारियों ने सरकार से राहत की मांग की थी.



इसके बाद सरकार ने मई में इन व्यापारियों को राहत देने के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को घोषणा की थी. इस स्कीम के तहत एमएसएमई को कम ब्याज दर के साथ बिना गारंटी के तीन लाख करोड़ रुपये तक का लोन दिया जा सकता है. इसके अलावा ज्यादा कारोबारी इस स्कीम का फायदा उठा सकें, इसके लिए एमएसएमई की परिभाषा भी बदली गई, जो एक जुलाई से पूरे देश में लागू हो गई है.
जिन एमएमएमई कंपनियों पर 29 फरवरी तक 50 करोड़ का लोन आउटस्टैंडिंग है, वो भी इस स्कीम के तहत फायदा ले सकती हैं. स्कीम के तहत गारंटेड एमरजेंसी क्रेडिट लाइन को पांच करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया गया है.

यही नहीं अब 250 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनियों को भी इसका लाभ मिलेगा, हालांकि ये सीमा अबतक 100 करोड़ रुपये की थी. वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 29 जुलाई तक बैंक और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों ने 1.37 लाख करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी दे दी है.

नियमों में ढील देने का ऐलान

वित्त मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा है कि पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने के लिये तीन माह का अतिरिक्त समय दिया गया है. छह माह की समाप्ति यानी 19 नवंबर 2020 को वितरित की गई वास्तविक राशि के आधार पर पोर्टफोलियो को वास्तविक रूप दिया जायेगा, उसके बाद ही गारंटी प्रभाव में आयेगी.

इसमें कहा गया है कि पोर्टफोलियो के स्तर पर योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा योजना के तहत खरीदे गये एए और एए- निवेश वाले पोर्टफोलियो बांड और वाणिज्यिक पत्र कुल पोर्टफोलियो का 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिये. इससे पहले यह सीमा 25 प्रतिशत तय की गई थी.

बयान में कहा गया है कि ऐसी उम्मीद है कि इस सुधार से बैंकों को पीसीजीएस 2.0 के तहत बांड और रिण पत्राों को खरीदने में कुछ लचीलालापन मिलेगा. सरकार के 20.97 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत 20 मई को पीसीजीएस 2.0 योजना की घोषणा की गई थी.

इसमें एनबीएफसी और एचएफसी, सूक्ष्म वित्त संस्थानों द्वारा जारी एए और इससे कम रेटिंग वाले बांड एवं रिण पत्रों को सार्वजनिक क्षत्र के बैंकों द्वारा खरीदने पर गारंटी का प्रावधान है. पीसीजीएस 2.0 के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल मिलकर 21,262 करोड़ रुपये के 28 संस्थानों द्वारा जारी एए और एए- रेटिंग वाले बांड एवं रिण पत्रों और 62 संस्थनां द्वारा जारी किये गये एए- से कम रेटिंग वाले बांड और रिण पत्रों को खरीदने को मंजूरी दी है.

सरकारी घोषणा में पीसीजीएस 2.0 के तहत 45,000 करोड़ रुपये के बांड और वाणिज्यिक पत्रों को खरीदने का प्रावधान किया गया था. इसमें एए और एए- वाले बांड के लिये 25 प्रतिशत पोर्टफोलियो की अनुमति थी जो कि 11,250 करोड़ रपये तक था.

इसके अलावा सरकार ने अलग से विशेष तरलता योजना की भी घोषणा की थी. इसमें तीन माह तक की शेष अवधि के लिये जिसे तीन माह और आगे बढ़ाया जा सकता है, उसमें 30,000 करोड़ रुपये तक के बांड और गैर परिवर्तनीय डिबेंचर खरीदने का प्रावधान किया गया.
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