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    गोल्ड हॉलमार्किंग जैसे नियम बनाने वाली संस्था BIS को लेकर हो सकता है बड़ा फैसला, आम आदमी पर होगा सीधा असर

    Bureau of Indian Standards  जल्द वाणिज्य मंत्रालय के अधीन आ सकता है
    Bureau of Indian Standards जल्द वाणिज्य मंत्रालय के अधीन आ सकता है

    देश में सोने के हॉलमार्क जैसे नियमों को BIS ही तय करती है. हॉलमार्क सरकारी गारंटी है. अब केंद्र सरकार BIS को लेकर जल्द बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है. आइए जानें पूरा मामला

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 27, 2020, 10:49 AM IST
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    नई दिल्ली: केंद्र सरकार एक बार फिर Bureau of Indian Standards (BIS) को उपभोक्ता मामले विभाग (Consumer Affairs Ministry) से हटाकर कॉमर्स मिनिस्ट्री (E Commerce Ministry) में लाने का विचार कर रही है. पहले भी इस प्रपोजल को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन पूर्व मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान ने वाणिज्य मंत्रालय के इस प्रस्ताव का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि बीआईएस के पास विनियामक शक्तियां हैं और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए संसद की ओर से बीआईएस संशोधन अधिनियम 2016 पारित करने के बाद से उपभोक्ताओं की सभी जरूरतों का ध्यान यहां पर सही तरीके से रखा जा रहा है. आपको बता दें कि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैण्डर्ड यानी भारत का राष्ट्रीय मानक ब्यूरो, जो भारत में राष्ट्रीय मानक निर्धारित करने वाली संस्था है. ये संस्था उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन कार्य कार्य करती है और इसका नाम पहले भारतीय मानक संस्थान (ISI) था.

    देश में सोने के हॉलमार्क जैसे नियमों को BIS ही तय करती है. हॉलमार्क सरकारी गारंटी है. हॉलमार्क का निर्धारण भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) करती है.

    दो हफ्ते का लग सकता है समय
    अंग्रेजी अखबरा द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, BIS एजेंसी को वाणिज्य मंत्रालय के तहत लाने का काम पूरा करने के लिए दो सप्ताह की समय सीमा तय की गई है. रामविलास पासवान के निधन के बाद केंद्रीय रेलमंत्री और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी मिलने के बाद से इस संबध में कई बैठक हो चुकी है.
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    1986 में BIS कंज्यूमर अफेयर्स में हुआ था शामिल
    पहले BIS को भारतीय मानक संस्थान (ISI) के नाम से जाना जाता था. सितंबर 1946 में औद्योगिक और आपूर्ति विभाग की ओर से इस एजेंसी का गठन किया गया था. साल 1986 में बीआईएस संसद के अधिनियम के रूप में अस्तित्व में आया और इसे उपभोक्ता मामलों के विभाग के तहत रखा गया.

    लंबे समय से चल रहा था प्रस्ताव
    BIS के अधिकारियों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ये प्रस्ताव लंबे समय से चल रहा है. बता दें ये एजेंसी मुख्य रुप से इंडस्ट्रियल गुड्स के लिए स्टैंडर्ड मानक तैयार करती है. इसी को देखते हुए कॉमर्स मंत्रालय की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया था.

    BIS के अधिकारी ने दी जानकारी
    बीआईएस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ग्लोब एजेंसियों के अलावा सभी जगह इंडस्ट्रियल गुड्स के लिए मानक बनाने वाली एजेंसी कॉमर्स डिपार्टमेंट के तहत ही काम करती है. अगर BIS को कॉमर्स मंत्रालय के अंडर में लाया जाता है तो इससे भारत को आत्मनिर्भर बनने में काफी सहयोग मिलेगा.

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    क्या करता है BIS?
    वहीं दूसरी तरफ लोगों का मानना है कि बीआईएस न केवल मानक तय करता है बल्कि उन्हें लागू करता है तो ऐसे में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी BIS के द्वारा ही की जाती है. इसके साथ ही ये एजेंसी नियमों का उल्लंघन करने के खिलाफ कार्रवाई भी करता है.
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