सस्ते गल्ले की दुकानों पर सरसों और रिफाइंड तेल बेचने की है योजना! जानें क्या है प्लान

सरसों (Mustard) और रिफाइंड तेल (Refined Oil)

सरसों (Mustard) और रिफाइंड तेल (Refined Oil)

सरसों (Mustard) और रिफाइंड तेल (Refined Oil) के दाम आसमान छूने लगे हैं. इन दिनों खाने का तेल 170 रुपये लीटर से लेकर 200 रुपये और उससे भी ज्यादा दाम पर बिक रहा है.

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नई दिल्ली. सरसों (Mustard) और रिफाइंड तेल (Refined Oil) के दाम आसमान छूने लगे हैं. अगर ब्रांड की बात करें तो सरसों और रिफाइंड तेल 170 रुपये लीटर से लेकर 200 रुपये और उससे भी ज्यादा दाम पर बिक रहा है. पिछले चार महीने से तो मानों बुलैट ट्रेन (Bullet Train) की स्पीड से रेट बढ़ते ही जा रहे हैं. इन 4 महीनों में एक भी मौका ऐसा नहीं आया जब सरसों और रिफाइंड तेल के दाम पर 4-5 रुपये भी कम हुए हों. इसी को देखते हुए अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ ने केन्द्र सरकार (Cenral Government) से अपील की है. महासंघ की सरकार के साथ हुई बैठक में भी यह डिमांड उठाई गई है.

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के कोषाध्यक्ष सोहन जैन ने का कहना है, “सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गरीबों को अत्यधिक रियायती दर पर खाद्य तेल उपलब्ध करा सकती है, क्योंकि यह  वो वर्ग है जो खाद्य तेल के बढ़ते हुए दामों और कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है. और सबसे बड़ी बात यह कि सरकार के इस कदम से खाद्य तेल के दामों पर भी नियंत्रण करने में कामयाबी मिल सकती है. वहीं सरकार के पास खाद्य तेल आयातकों और स्टॉकिस्टों के लिए अपने स्टॉक की घोषणा करना अनिवार्य करने जैसी संभावनाएं भी हैं, जैसा कि दालों के मामले में संकट से निपटने के लिए किया जाता है.”

स्टॉक लिमिट के नियम से बढ़ जाएगा खर्चा-शंकर ठक्कर

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने केन्द्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा है, “सरकार को स्टॉक की सीमा तय करने का कदम नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि इससे सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, लेकिन कुछ अन्य उपाय भी कर सकते हैं. क्योंकि खाद्य तेलों को ज्यादा मात्रा में रखने के लिए टैंकों की आवश्यकता होती है और सिर्फ कुछ समय के लिए टैंक बनाना महंगा सौदा हो सकता है इसके लिए कोई भी ऐसा नहीं करना चाहेगा.”
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इसलिए लगातार बढ़ रहे हैं तेल के दाम

अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरेलू खाद्य तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं. भारत की 60 फीसद से ज्यादा खाद्य तेल की डिमांड आयात से पूरी की जाती है. जबकि आयाती तेलों पर सरकार द्वारा आयात शुल्क और कृषि कल्याण सेस लगाया गया है जो तेल के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह है.



सरकार को इस वक्त इन दोनों को कुछ समय तक के लिए हटा देना चाहिए, जिससे दाम काबू में आ सकें. इसके अलावा दाम नियंत्रण में आने तक तेल और तिलहन पर लगे 5 फ़ीसदी जीएसटी को जीरो कर देना चाहिए. इसके अलावा इस साल खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से केंद्र सरकार ने आयात शुल्क के माध्यम से तगड़ी कमाई की है जिसके चलते सरकार को टैरिफ वैल्यू को कुछ समय के लिए स्थिर कर देना चाहिए.

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