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किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए नई योजना ला रही है सरकार, खर्च करेगी 10 हजार करोड़ रुपये!

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए नई योजना ला रही है सरकार, खर्च करेगी 10 हजार करोड़ रुपये!

अगले 5 साल में 10 हजार FPO खोले जाएंगे

अगले 5 साल में 10 हजार FPO खोले जाएंगे

पिछले बजट में अगले 5 साल में 10 हजार FPO के ऐलान के बाद अब इस बजट में उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार फंडिंग का ऐलान कर सकती है. इससे किसानों को उत्पादन के लिए वित्तीय और तकनीकी तौर पर लाभ मिलेगा.

    नई​ दिल्ली. पिछले साल अपने पहले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने देश भर के किसानों के ​लिए अगले 5 साल में कुल 10 हजार किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organization) बनाने का ऐलान किया था. हालांकि, उन्होंने सरकार के इस पहल के बारे में जानकारी तो दी, लेकिन कोई फंड जारी नहीं किया. अब उम्मीद की जा रही है कि 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट में सरकार इस योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दे.

    10 हजार करोड़ रुपये का फंड जारी कर सकती है सरकार
    बजट से पहले कयास लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार इसके लिए सीधे तौर या पूंजीगत सहारे के ​जरिए 7,000-10,000 करोड़ रुपये देने का ऐलान करे ताकि अगले 5 साल में 10 हजार FPO खोलें जा सके. पहले किसान उत्पादक कंपनी (FPC) में कम से कम 500 किसानों की सदस्य होने की अनिवार्यता थी इसे कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर किया जाता है. अब इसे किसानों की अनिवार्य सदस्यता की संख्या 500 से घटाकर 250 कर दिया जाने का अंदेशा है.

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    FPO को लेकर सरकार की योजना पर नजर
    इन FPO को खोलने और मैनेज करने की जिम्मेदारी NABARD, स्मॉल फार्मर्स एग्री-बिजनेस कंसोर्टियम (SFAC) और नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपेमंट कॉरपोरेशन को दी जा सकती है. हालांकि, बीते 10 साल में केंद्र सरकार के लगातार कोशिशों के बावजूद भी वर्तमान में कुछ ही FPO बने हैं. जानकारों का मानना है कि ये देखने में रोचका होगा कि केंद्र सरकार इस योजना पर कैसे काम करती है.



    क्या है मौजूदा FPO की हालत
    साल 2011 से ही केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत केंद्र, राज्य और एजेंसियों के स्तर पर FPO को प्रोमेाट किया है. वर्तमान में देश भर में कुल 5 हजार FPO मौजूद हैं. इनमें से 903 SFAC, 2,086 नाबार्ड और अन्य राज्य सरकारों और संस्थओं के अधीन है. ध्यान देने वाली बात है कि इन 5 हजार FPO में से अधिकतर का प्रदर्शन बेहतर नहीं है. एक अनुमान के मुताबिक, इन 5 हजार FPO में से करीब 50 फीसदी FPO फंड की कमी और बेहतर बिजनेस प्लानिंग की कमी से जूझ रहे हैं. इनमें से 20 फीसदी की हालत तो इतनी खराब है कि वो बंद होने की कगार पर हैं.

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    कैस होता है किसानों को फायदा
    इस मामले पर जानकारों का कहना है कि जब किसानों का समूह एक उत्पादक कंपनी की संचालन करती है तो इसके कई फायदे होते हैं. उन्हें थोक दरों पर इनपुट मिलता है, उत्पादन और भारी मात्रा में उत्पादन की वजह से मार्केटिंग कॉस्ट कम देना होता है और साथ ही उन्हें बेहतर फंडिंग और संस्थागत क्रेडिट भी उपलब्ध होता है. उनके पास इतनी वित्तीय ताकत होती है कि फसलों की स्टोरेज पर खर्च कर सकें और बाजार के हिसाब से बिक्री कर सकें. उन्हें खेत से फसल निकालने के तुरंत बाद बेचने की जल्दी न हो.



    फंडिंग ही पर्याप्त नहीं
    माहा FPCके प्रबंध निदेशक ने बिजनेसलाइन को एक रिपोर्ट में बताया है कि इन FPO की खराब हालत का कारण फंडिंग की कमी नहीं है. कारण ये है कि इन FPO/FPC की कमान सदस्य किसानों के हाथ में होती है और उनके पास बिजनेस चलाने का अनुभव नहीं होता है. दैनिक आधार पर उनके सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं.

    क्या होता है FPO?
    फसल उत्पादक या किसानों की संस्थागत व्यवस्था को FPO कहते हैं. यह एक रजिस्टर्ड ईकाई होती है, जिसमें उत्पादक ही शेयरहोल्डर यानी हिस्सेदार होते हैं. इस संस्था की मदद से फसल उत्पादन से संबंधित बिजनेस गतिविधियों का प्रबंधन किया जाता है. यह संस्था अपने सदस्य किसानों के फायदे के लिए काम करती है.

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    Tags: Budget 2020, Business news in hindi, Farmer, Kisan, Landless farmer, Nirmala sitharaman

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