Pfizer से वैक्सीन की 5 करोड़ खुराक खरीद सकता है भारत ! कंपनी और केंद्र के बीच बातचीत जारी

 ये वैक्सीन, जो दूसरे टीकों के मुकाबले महंगी है

ये वैक्सीन, जो दूसरे टीकों के मुकाबले महंगी है

सरकार और फाइजर के बीच की ये बातचीत भी कंपनी की वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद किसी भी तरह के साइड इफेक्ट (Side Effect) आने पर कंपनी की तरफ से उसकी क्षतिपूर्ति करने के मुद्दे पर एक सफलता तक पहुंचने के करीब है

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नई दिल्ली. देश में तबाही मचाने वाली Covid-19 की दूसरी लहर के बीच भारी मांग के मद्देनजर भारत में वैक्सीन (Vaccine) की कमी के बीच ये खबर आ रही है कि भारत अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर (Pfizer) की पांच करोड़ खुराक खरीद सकता है. इसे लेकर सरकार (Govt of India) और कंपनी के बीच बातचीत भी चल रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने कई बैठकों में Pfizer के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वैक्सीन की उपलब्धता पर चर्चा की है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और फाइजर के बीच की ये बातचीत भी कंपनी की वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद किसी भी तरह के साइड इफेक्ट (Side Effect) आने पर कंपनी की तरफ से उसकी क्षतिपूर्ति करने के मुद्दे पर एक सफलता तक पहुंचने के करीब है.


अन्य वैक्सीन से महंगी है

ये वैक्सीन, जो दूसरे टीकों के मुकाबले महंगी है, सरकार द्वारा केवल वैक्सीनेशन ड्राइव (Vaccination drive) के लिए खरीद के लिए उपलब्ध होगी. उत्तर प्रदेश और यहां तक कि मुंबई नगर निकाय जैसे कई राज्यों ने वैक्सीन की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर जारी करने की घोषणा की है. वहीं यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) ने बुधवार को कहा कि उसके द्वारा अप्रूव की गई mRNA वैक्सीन महाराष्ट्र में पाए गए नए वेरिएंट से लड़ने में सक्षम होगी.EMA ने कहा कि वह भारत में मिले कोरोना वेरिएंट पर आए डेटा की बहुत बारीकी से निगरानी कर रही है. उन्होंने कहा, "हम आशाजनक सबूत देख रहे हैं कि mRNA वैक्सीन इस वेरिएंट को बेअसर करने में सक्षम होंगी. EMA ने महाद्वीप के लिए फाइजर, मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका और जे एंड जे वैक्सीन को मंजूरी दी है. 


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 अमेरिका ने नहीं दी है निर्यात की अनुमति 

मालूम दें कि अमेरिका ने अभी भी देश में बनने वाली फाइजर या मॉडर्ना वैक्सीन को तब तक निर्यात करने की अनुमति नहीं दी है, जब तक घरेलू मांग पूरी नहीं हो जाती है. ऐसे में संभव है कि यूरोपीय विनिर्माण केंद्र फाइजर के वैक्सीन का स्रोत बनने जा रहे हैं, जिसे भारत खरीदना चाहता है.

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