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सरकार छोटे कारोबारियों के लिए कर सकती है बड़ा ऐलान, छोटे उद्योगों का बढ़ेगा दायरा

News18Hindi
Updated: October 9, 2019, 6:06 PM IST

एमएसएमई सेक्टर (MSME Sector) के लिए सरकार एक नई परिभाषा पर काम कर रही है जिसमें टर्नओवर (Turnover) के आधार पर ये तय होगा कि कौन सी कंपनी MSME के दायरे में आएगी.

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  • Last Updated: October 9, 2019, 6:06 PM IST
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नई दिल्ली. अर्थव्यवस्था (Economy) को बूस्ट देने के लिए सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) सेक्टर का दायरा बढ़ाने जा रही है. MSME का दायरा 10 करोड़ रुपये से बढ़कर 250 करोड़ रुपये हो सकता है. एमएसएमई सेक्टर (MSMEs Sector) के लिए सरकार एक नई परिभाषा पर काम कर रही है जिसमें टर्नओवर के आधार पर ये तय होगा कि कौन सी कंपनी MSME के दायरे में आएगी. MSMEs सेक्टर की परिभाषा में व्यापक बदलाव के साथ कई और राहत देने का ऐलान हो सकता है.

सूत्रों के मुताबिक, सरकार एमएसएमई बिल में अमेंडमेंट करके 250 करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले कंपनी को एमएसएमई का दर्जा दे सकती है. 250 करोड़ रुपये की जो परिभाषा होगी, वो मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए होगी. 5 करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को माइक्रो, 5 से 75 करोड़ रुपये वाली कंपनियों को स्मॉल और 250 करोड़ रुपये तक वाली कंपनियों को मीडियम एंटरप्राइजेज का दर्ज मिलेगा.

5000 करोड़ का स्ट्रेस फंड बनाने की बात
इस अमेंडमेंट बिल में उसमें एमएसएमई सेक्टर को बूस्ट देने के लिए कई और ऐलान किए जा सकते हैं. 5000 करोड़ रुपये का स्ट्रेस फंड बनाने की इसमें बात कही गई है जो एमएसएमई मिनिस्ट्री के तहत बनेगी. अगर किसी कंपनी को एनपीए जैसी समस्या होती है, ऐसी स्थितियों से उबारने के लिए इस 5 हजार करोड़ रुपये के स्ट्रेस फंड का उपयोग किया जाएगा. इसके साथ ही एक SPV बनाने की बात कही गई है जो कि विदेशी निवेशकों और क्राउंड फंडिंग के लिए इस व्हीकल का इस्तेमाल किया जाएगा.

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जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट और टैक्सटाइल के लिए भी अलग परिभाषा तय की जायेगी. वहीं पेमेंट में देरी और GST रिफंड की व्यवस्था होगी. देश की जीडीपी में MSMEs का योगदान 50 फीसदी तक करने का लक्ष्य है. अभी MSMEs का करीब देश की जीडीपी में 30 फीसदी योगदान है.

प्वाइंटर्स-
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>> 250 करोड़ सालाना टर्नओवर वाली यूनिट को मिलेगा MSMEs का दर्जा
>> सूक्ष्म और लघु उद्योगों के साथ मंझोले उद्योग की परिभाषा बदलेगी सरकार
>> 5 करोड़ तक सूक्ष्म, वहीं 5 से 75 करोड़ तक को लधु उद्योग का दर्जा संभव
>> टर्नओवर के मुताबिक अलग अलग कैटेगरी के लिए अगल होगी परिभाषा
>> मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए तीन से ज्यादा कैटेगरी बनाने पर विचार
>> जेम्स एंड ज्वैलरी, ऑटो कंपोनेंट और टैक्सटाईल के लिए अलग परिभाषा
>> पेमेंट डिले और जीएसटी रिफंड की पुख्ता व्यवस्था होगी नए कानून में
>> MSMEs में एनपीए से निपटने के लिए 5000 करोड़ का डिस्ट्रेस फंड
>> विदेशी निवेशकों और क्राउड फंडिंग के लिए स्पेशल SPV का गठन
>> देश की जीडीपी में MSMEs का योगदान 50 फीसदी तक करने का लक्ष्य
>> अभी MSMEs का करीब देश की जीडीपी में 30 फीसदी योगदान है
>> MSMEs के लिए नए अमेंडमेंट बिल को जल्द लाने की तैयारी में सरकार
>> परिभाषा में जल्द बदलाव के लिए अध्यादेश लाने पर भी विचार हो रहा है.

(आलोक प्रियदर्शी, संवाददाता- CNBC आवाज़)

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First published: October 9, 2019, 5:31 PM IST
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