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COVID-19 से सरकारी बैंकों पर बढ़ेगा फंसे कर्ज का बोझ, पूंजीगत मदद के लिए तैयार है सरकार

रॉयटर्स
Updated: April 5, 2020, 8:02 PM IST
COVID-19 से सरकारी बैंकों पर बढ़ेगा फंसे कर्ज का बोझ, पूंजीगत मदद के लिए तैयार है सरकार
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COVID-19 की वजह से बैंकों फंसे कर्ज (NPA) के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में केंद्र सरकार पब्लिक सेक्टर लेंडर्स को 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत मदद कर सकती है.

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नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के बढ़ते प्रकोप के बीच केंद्र सरकार ने सभी सरकारी बैंकों (Public Sector Banks) को आश्वस्त किया है कि वो पूंजीगत मदद करने के लिए तैयार है. कहा जा रहा है कि सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था के बीच फंसे कर्ज (NPA) के मामले बढ़ सकते हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सरकारी एवं बैंकिंग सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है.

सरकारी बैंकों के लिए सरकारी को करनी होगी पूंजी की व्यवस्था
इन बैंकों को पूंजीगत मदद (Captial Infusion) करने के​ लिए केंद्र सरकार को 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होगी. हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि स्थिति बेहतर नहीं होती है तो यह रकम और भी बढ़ सकती है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'फंसा कर्ज चिंता का एक विषय बन सकता है. ऐसे में सरकार को पर्याप्त पूंजी की व्यवस्था करनी होगी.'

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पिछले साल में सरकारी ने दिए हैं 3.5 लाख करोड़ रुपये


बीते 5 साल में केंद्र सरकार ने इन सरकारी बैंकों में 3.5 लाख करोड़ रुपये डाला है ताकि इनकी स्थिति बेहतर हो सके. फरवरी में चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में सरकार ने बैंकों कों पूंजीगत निवेश के बारे में कोई ऐलान नहीं किया था. लेकिन, बैंकों को कहा गया था कि वो फंड के लिए कैपिटल मार्केट (Capital Market) के विकल्प पर भी ध्यान दें.

इक्विटी कैपिटल मार्केट से पूंजी जुटाना चुनौतीपूर्ण
मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विसेज की एक अधिकारी के हवाले से इस रिपोर्ट में कहा गया कि बैंकों के क्रेडिट प्रोफाइल पर दबाव है. ऐसे में इन बैंकों के लिए इक्विटी कैपिटल मार्केट के जरिए पूंजी जुटाना चुनौतीपूर्ण होगा. कम से कम अगली कुछ तिमाहियो तक यह चुनौती जारी रहेगी.

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भारतीय बैंकों पर 10.5 लाख करोड़ रुपये का फंस कर्ज
गौरतलब है कि भारतीय बैंकों का कारीब 10.50 लाख करोड़ रुपये के फंसे कर्ज का बोझ है और इसका एक बड़ा हिस्सा सरकारी बैंकों का है. इस दौरान, बैंकिंग इंडस्ट्री के लिए लोन ग्रोथ में भी गिरावट आई है. इससे उधारकर्ताओं पर दबाव बढ़ गया है.

रेटिंग एजेंसियों को बैंकिंग सेक्टर्स पर कम हुआ भरोसा
मूडीज और फिच ग्रुप इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने पहले ही भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए नेगेटिव आउटलुक रखा है. बैंकर्स का कहना है अधिकतर उधारकर्ताओं को चालू वित्त वर्ष की दूसरी और तीसरी तिमाही में ही पूंजी की जरूरत होगी. इस दौरान वो केंद्र सरकार के पास औपचारिक तौर पर पहुंचेंगी.

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First published: April 5, 2020, 7:54 PM IST
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