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इन वस्तुओं पर ज्यादा GST देने के लिए रहें तैयार, 18 दिसंबर को होने वाला है बड़ा फैसला!

News18Hindi
Updated: December 9, 2019, 6:24 PM IST
इन वस्तुओं पर ज्यादा GST देने के लिए रहें तैयार, 18 दिसंबर को होने वाला है बड़ा फैसला!
वस्तु एवं सेवा कर

आर्थिक सुस्ती (Economic Slowdown) के दौर में रेवेन्यू कलेक्शन (Revenue Collection) बढ़ाने और राज्यों को तय रेवेन्यू देने के​ लिए सरकार कुछ बड़े कदम उठा सकती है.

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  • Last Updated: December 9, 2019, 6:24 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र और राज्य सरकारें 28 फीसदी वाले वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) वाली वस्तुओं पर सेस (Cess) के दायरे को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं, ताकि जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) को बढ़ाया जा सके. अगले सप्ताह होने वाले जीएसटी काउंसिल (GST Council) की बैठक में यह फैसला लिया जाएगा ताकि रेवेन्यू बढ़ाने के साथ ही आर्थिक सुस्ती से ​भी निपटा जा सके.

GST कलेक्शन में राज्यों की 14 फीसदी हिस्सेदारी
सोमवार को फाइनेंशियल एक्सप्रेस की ​एक रिपोर्ट में बिहार के डिप्टी CM सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) के हवाले से लिखा गया है कि राज्यों को SGST के तहत 14 फीसदी रेवेन्यू कलेक्शन को कायम रखने के लिए यह सबसे बेहतर रास्ता है. केंद्र सरकार राज्यों को जीएसटी से मिलने वाली भागीदारी को कायम रखने का प्रयास कर रही है. काउंसिल को अपने फैसले में रेवेन्यू बढ़ाने के साथ ही खपत को लेकर संतुलन को ध्यान में रखेगी. खासतौर पर एक ऐसे समय में, जब मांग और खपत (Demand and Consumption) की कमी की वजह से सुस्ती के दौर से गुजर रही है.

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सरकार के लिए आसान हो सकता है सेस बढ़ाने का फैसला
चूंकि, 28 फीसदी वाले जीएसटी स्लैब में लग्जरी वस्तुओं (Luxury Items) को रखा गया है, ऐसे में राजनीतिक तौर पर इनपर लगने वाले सेस को बढ़ाना सरकार के लिए आसान होगा. 3 दिसंबर को मिंट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि काउंसिल ने रेवेन्यू बढ़ाने को और उसके लिए जीएसटी दरो में बदलाव को लेकर एक बैठक बुलाया है.

जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक में ही मिल गया था इशारा 18 दिसंबर को होने वाला यह बैठक जीएसटी लागू किए जाने के बाद पहला ऐसा मौका होगा जब जीएसटी दरों को बढ़ाने के लिए गंभीरता से विचार किया जाएगा. ​सिंतबर माह में गोवा में हुए जीएसटी काउंसिल की बैठक (GST council Meeting) में, एक प्रोडक्ट पर लगने वाले टैक्स में इजाफा किया गया था. यह अपने आप इस बात की तरफ इशारा था कि जीएसटी दरों को घटाने का दौर अब खत्म हो चुका है.

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First published: December 9, 2019, 5:15 PM IST
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