सरकार को होटल अशोक और सम्राट के मोनेटाइजेशन से 7600 करोड़ मिलने की उम्मीद , जानिए क्या है प्लान

सरकार को होटल अशोक और सम्राट के मोनेटाइजेशन से 7600 करोड़ मिलने की उम्मीद , जानिए क्या है प्लान
होटल अशोका

सरकार ने ITDC के होटल अशोक, सम्राट के मोनेटाइजेशन को लेकर फीडबुक इंफ्रा (Feedback Infra) एजेंसी नियुक्त की थी. Feedback इंफ्रा ने इसको लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी दी है.

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  • Last Updated: July 15, 2020, 12:14 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले करीब 3 महीने से सुस्त पड़ी विनिवेश (Indian Government Disinvestment Programme) की रफ्तार फिर तेज पकड़ने लगी है. CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ITDC के होटल अशोक और सम्राट को बेचा जाए या फिर उसे कैसे मोनेटाइज करा जाए. इसको लेकर सरकार ने फीडबुक इंफ्रा (Feedback Infra) एजेंसी नियुक्त की थी. Feedback इंफ्रा ने इसको लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर होटल अशोक और सम्राट की पॉपर्टी को मोनेटाइज किया जाता है. तो उससे सरकार को करीब 7600 करोड़ रुपये मिल सकते है.

होटल अशोका को लॉन्ग टर्म लीज यानी किराए पर देने की सिफारिश की गई है. इससे 1600 करोड़ रुपये मिल सकते है.दूसरी सिफारिश में बताया गया है कि सरकार इन होटल्स की 2 एकड़ जमीन पर ऑफिस या फिर अन्य कॉमर्शियल पॉपर्टी डेवल्प कर सकती है. इससे 1000 करोड़ रुपये आ सकते है.

तीसरी सिफारिश में बताया गया है कि 6 एकड़ ज़मीन पर सर्विस अपार्टमेंट बना दीजिए. उससे करीब 5000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. फीडबैक इंफ्रा ने कहा कि अन्य होटल्स के मुकाबले इनका प्रदर्शन काफी कमजोर है.



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अब आगे क्या होगा- इन सिफारिशों को आईएमजी (इंटिरियल मिनिस्टर ऑफ ग्रुप्स) में इस पर बातचीत होगी. इसके बाद आगे का रास्ता तय होगा.

सरकार ऐतिहासिक अशोक होटल को बेचने की तैयारी में है. होटल मौजूदा वक्त में सरकार भारतीय पर्यटन विकास निगम (ITDC) के अंतर्गत आता है. यही होटल को लीज पर देने का काम करती है. नीति आयोग ने हाल ही में एक प्रस्ताव पेश करके होटल को 60 साल के लिए किसी प्राइवेट कंपनी को देने की सलाह दी थी, जो इस होटल को दोबारा से डिजाइन करे और उसका प्रबंधन देखे.

होटल का निर्माण देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने साल 1956 में कराया था. यह होटल संसद और राष्ट्रपति भवन के नजदीक है.

इसमें 550 कमरे और 161 शूइट्स हैं. होटल में करीब 1000 कर्मचारी काम करते हैं, जिसके रोजाना के संचालन में करीब 35 लाख रुपए का खर्च आता है.

होटल के बनने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है. दरअसल भारत नया-नया आजाद हुआ था और यूनेस्को (UNESCO) समिट को भारत में कराने को लेकर उत्सुक था.

नेहरू ने 1955 में पेरिस में हुई यूनेस्को फोरम की बैठक में सुझाव दिया था कि भारत अगले साल समिट कराने के लिए तैयार है.

हालांकि उस वक्त तक भारत में एक भी 5 स्टार होटल नहीं था, जहां विश्वभर से आने वाले गेस्ट को ठहराया जा सके. ऐसे में नेहरू ने 5 स्टार होटल अशोका को बनवाया. (लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर, CNBC आवाज़)
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