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गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से सरकार को हुआ 1500 करोड़ का घाटा, जल्द हो सकते है बड़े बदलाव

News18Hindi
Updated: February 27, 2020, 12:49 PM IST

CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme Interest Rate) सरकार को महंगी पड़ने लगी हैं. अब तक इस स्कीम से सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.

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  • Last Updated: February 27, 2020, 12:49 PM IST
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नई दिल्ली. सरकार की ओर से लोगों के घरों में पड़े सोने (Gold) को बाहर निकालने के लिए शुरू की कई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme) में जल्द बदलाव हो सकते है. CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गोल्ड मोनेटाइजेशन सरकार स्कीम को महंगी पड़ने लगी है. अब तक इस स्कीम से सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. साथ ही, जैसे-जैसे गोल्ड की कीमतें बढ़ती जा रही हैं यह नुकसान और बढ़ने का खतरा है. इसीलिए सरकार इस स्कीम की समीक्षा करने की तैयारी में है.

आपको बता दें कि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत आप अपना सोना बैंक में जमा कर सकते हैं. इस पर आपको बैंक ब्याज देंगे. इस स्कीम की खास बात यह भी है कि पहले आप अपने सोने को लॉकर में रखते थे. लेकिन अब आपको लॉकर लेने की जरूरत नहीं है और निश्चित ब्याज भी मिलता है. स्कीम के तहत इसमें कम से कम 30 ग्राम 995 शुद्धता वाला सोना बैंक में रखना होगा. इसमें बैंक गोल्ड-बार, सिक्के, गहने (स्टोंस रहित और अन्य मेटल रहित) मंजूर करेंगे. गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम साल 2015 में शुरू की गई थी. इसके अलावा, बहुत कम बैंकों में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की सुविधा उपलब्ध है जिनमें से अधिकांश बैंकों की ब्रांच शहरी क्षेत्रों में हैं.

क्यों होगा स्कीम में बदलाव- महंगा सोना अब सरकार की भी चिंता बढ़ा रहा है. क्योंकि इससे, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme) पर सरकार का खर्च बढ़ने लगा है. स्कीम से अब तक सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. साथ ही, गोल्ड की कीमतें बढ़ने के साथ-साथ नुकसान बढ़ने का भी खतरा बढ़ गया है. सूत्रों की मानें तो सरकार स्कीम की शर्तों की समीक्षा कर सकती है.

साल 2015 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम शुरू की गई थी. लेकिन कीमतें बढ़ने से इस स्कीम पर सरकार का औसतन खर्चा 18 से 19 फीसदी हो गया है. क्योंकि, सरकार हैंडलिंग चार्जेस, कमीशन और ब्याज के तौर पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करती है. वहीं, सॉवरेन डेट के मुकाबले यह खर्च काफी ज्यादा है. इसके अलावा गोल्ड बेचने से MMTC को सिर्फ करीब 32 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है.





गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme) स्कीम के बारे में जानिए

(1) सरकार ने 2015 में यह योजना शुरू की थी. इसका मकसद घरों और संस्थानों (ट्रस्ट) में रखे सोने को बाहर लाना और उसका बेहतर उपयोग करना है. मध्यम अवधि में 5 से 7 साल के लिए और लंबी अवधि के लिए 12 साल के लिए सोना जमा किया जा सकता है.

(2) इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने घरेलू सोने को एक निश्चित अवधि के लिए प्राधिकृत बैंक में जमा करने के लिए प्रोत्साहित करना है. सरकार द्वारा तय किए कलेक्शन और टेस्टिंग सेंटर के माध्यम से सोने का वजन और शुद्धता की जांच की जाती है और एक सर्टिफिकेट जारी किया जाता है जिसका इस्तेमाल करके संबंधित बैंक में एक गोल्ड डिपॉजिट अकाउंट खुलवाया जा सकता है और एक जमाकर्ता के रूप में आपको जमा किए गए सोने पर वार्षिक ब्याज मिलता है.

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(3) इस स्कीम में दो तरह के डिपॉजिट की सुविधा है– एक शॉर्ट टर्म गोल्ड डिपॉजिट और एक मीडियम जबकि लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट. शॉर्ट टर्म डिपॉजिट का कार्यकाल 1 से 3 साल का होता है जिसके साथ ब्रोकन पीरियड (उदाहरण के लिए 1 साल 9 महीने का कार्यकाल) का ऑप्शन भी मिलता है. लेकिन, इस पर मिलने वाला इंट्रेस्ट, बैंक के विवेक पर आधारित होता है और इसकी ब्याज दर संशोधन जैसे अन्य कारकों के आधार पर बदला जा सकती है.

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(4) दूसरी तरफ, मीडियम और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट का इंट्रेस्ट रेट फिक्स्ड होता है जिसकी घोषणा सेंट्रल बैंक (आरबीआई) द्वारा की जाती है. मीडियम टर्म डिपॉजिट का कार्यकाल 5 से 7 साल का होता है और इस पर फिलहाल 2.25 फीसदी का वार्षिक ब्याज मिलता है. लॉन्ग टर्म डिपॉजिट के मामले में जमाकर्ता को 2.50% का वार्षिक ब्याज मिलता है जिसका कार्यकाल 12 से 15 साल का होता है.

(5) इन दोनों स्कीमों में समय से पहले अपना निवेश निकालने की सुविधा मिलती है, लेकिन इसमें एक लॉक-इन पीरियड (मीडियम टर्म के लिए 3 साल और लॉन्ग टर्म के लिए 5 साल) भी होता है. इसके अलावा, समय से पहले अपना निवेश निकालने पर पेनल्टी लगती है.

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(6) आप अपने सोने को किसी भी रूप में, सोने के सिक्के, पट्टियां या गहने (बिना किसी रत्न या पत्थर के) आदि में जमा कर सकते हैं. कम-से-कम 30 ग्राम और अधिक से अधिक जितना चाहे उतना सोना जमा किया जा सकता है.

(7) गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के सबसे बड़े लाभों में से एक लाभ यह है कि इस स्कीम के माध्यम से होने वाली पूरी आमदनी टैक्स फ्री होती है. इसमें कैपिटल गेन्स टैक्स, वेल्थ टैक्स और इनकम टैक्स भी शामिल है. इस स्कीम के तहत जमा किए गए सोने के परिमाण के आधार पर आप अपने सोने के भंडार पर टैक्स का प्रभाव पड़े बिना मैच्योरिटी अमाउंट के साथ-साथ संचयी इंट्रेस्ट की मदद से एक अच्छी-खासी रकम तैयार कर सकते हैं.

(लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर- CNBC आवाज़)

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First published: February 27, 2020, 12:12 PM IST
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