चीन के साथ तनाव के बीच भारत सरकार ने डिफेंस सेक्टर को लेकर लिया बड़ा फैसला!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister of India)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister of India)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Government of India) ने रक्षा क्षेत्र (Defense Sector) में ऑटोमेटेड रूट से 74 फीसदी तक फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI-Foreign Direct Investment) की मंजूरी दे दी है. विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के इरादे से यह कदम उठाया गया है.

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  • Last Updated: September 18, 2020, 4:06 PM IST
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नई दिल्ली. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT-Department for Promotion of Industry and Internal Trade) की ओर से जारी एक प्रेस नोट में कहा गया है कि रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर होने वाली जांच पर निर्भर करेगा और सरकार रक्षा क्षेत्र में ऐसे किसी भी विदेशी निवेश की समीक्षा का अधिकार सुरक्षित रखती है जो राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करता है या कर सकता है. मौजूदा FDI नीति के तहत रक्षा उद्योग में 100 फीसदी विदेशी निवेश की अनुमति है. इसमें 49 फीसदी ऑटोमेटेड रूट से जबकि इससे ऊपर के लिये सरकार की मंजूरी की जरूरत है.

आपको बता दें कि एफडीआई को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट कहते हैं. अगर आसान शब्दों में कहें तो विदेश की कोई कंपनी भारत की किसी कंपनी में सीधे पैसा लगा दे तो ये एक सीधा विदेशी निवेश है.

अभी कई ऐसे सेक्टर या क्षेत्र हैं, जिनमें विदेशी कंपनियां भारत में पैसा नहीं लगा सकती हैं. भारत की कंपनियां विदेश से पैसा नहीं जुटा सकती हैं.




कुछ सेक्टर ऐसे हैं, जिनमें विदेशी निवेश की सीमा 100 फीसदी तक खुली है. और कुछ ऐसे हैं, जिनमें अलग-अलग सीमाएं हैं.

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अब आगे क्या-प्रेस नोट के अनुसार, 'जो कंपनियां नए औद्योगिक लाइसेंस चाह रही हैं, उनके लिये ऑटोमेटेड रूट से 74 फीसदी तक FDI की मंजूरी होगी.इसमें कहा गया है कि ऐसी कंपनी जो औद्योगिक लाइसेंस नहीं मांग रही है या जिसके पास पहले से रक्षा क्षेत्र में FDI के लिये सरकार की मंजूरी है उनमें 49 फीसदी तक नए निवेश से अगर इक्विटी/शेयरधारिता प्रतिरूप में बदलाव होता है या मौजूदा निवेशक द्वारा 49 फीसदी तक FDI के लिये हिस्सेदारी नए विदेशी निवेशकों को हस्तांतरित की जाती है, उसके बारे में अनिवार्य रूप से रक्षा मंत्रालय के समक्ष यह घोषणा करने की जरूरत होगी.

एफडीआई को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के बारे में जानिए-एफडीआई दो तरह का होता है. पहला है ग्रीन फील्ड निवेश और दूसरा है पोर्टफोलियो निवेश.ग्रीन फिल्ड निवेश- इसके तहत दूसरे देश का कोई शख्स या कंपनी भारत में नई कंपनी खोल सकती है.

पोर्टफोलियो निवेश- इसके तहत विदेश की कोई कंपनी या कोई शख्स भारत की किसी कंपनी के शेयर खरीद सकता है या फिर किसी कंपनी का अधिग्रहण कर सकता है.

किस तरह से देश में आता है एफडीआई-देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कितना होगा और किस सेक्टर में होगा, इसको तय करने की जिम्मेदारी सरकार की है. केंद्र की कैबिनेट एफडीआई के लिए सेक्टर और उसकी सीमा का निर्धारण करती है. एक बार कैबिनेट की मंजूरी के बाद देश में एफडीआई का रास्ता साफ हो जाता है. देश में एफडीआई आने के दो रास्ते हैं

ऑटोमेटिक रूट- अगर कैबिनेट की ओर से तय हो जाता है कि किसी सेक्टर में एफडीआई की सीमा कितनी होगी, तो विदेश की कोई कंपनी सीधे भारत की किसी कंपनी या किसी सेक्टर में पैसे लगा सकती है.

सरकारी रूट- अगर कैबिनेट किसी सेक्टर में एफडीआई की सीमा तय कर देती है और साथ में ये कहती है कि ये एफडीआई ऑटोमेटिक रूट के जरिए नहीं आएगा, तो फिर इसके लिए सरकार की मंजूरी लेनी होती है. सरकार की मंजूरी का मतलब है कि जिस सेक्टर में सरकारी रूट के जरिए विदेश से पैसे आने हैं, उस सेक्टर से जुड़े मंत्रालय से इसकी मंजूरी लेनी होती है.
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