FY22 की पहली छमाही में बाजार से 7.24 लाख करोड़ का कर्ज लेगी सरकार, जानिए वजह

अगले वित्त वर्ष में पुराने कर्ज के भुगतान के मद में 2.80 लाख करोड़ रुपये की राशि लौटाने का अनुमान है.

अगले वित्त वर्ष में पुराने कर्ज के भुगतान के मद में 2.80 लाख करोड़ रुपये की राशि लौटाने का अनुमान है.

अगले वित्त वर्ष में पुराने कर्ज के भुगतान के मद में 2.80 लाख करोड़ रुपये की राशि लौटाने का अनुमान है.

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नई दिल्ली. सरकार कोविड संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्था (Economy) को गति देने के लिए संसाधन जुटाने को लेकर वित्त वर्ष 2021-22 (FY22) की पहली छमाही में 7.24 लाख करोड़ रुपये कर्ज लेगी. इस साल एक फरवरी को पेश बजट में सरकार ने एक अप्रैल 2021 से शुरू वित्त वर्ष में 12.05 लाख करोड़ रुपये के सकल कर्ज (Gross Borrowing) की आवश्यकता होने का अनुमान लगाया है.

आर्थिक मामलों के सचिव तरूण बजाज ने कहा, ''बजट में हमने घोषणा की थी कि सकल कर्ज 12.05 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध कर्ज 9.37 लाख करोड़ रुपये रहेगा. वित्त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में हम 7.24 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेंगे जो सकल अनुमानित कर्ज का 60.06 फीसदी है.''

अगले वित्त वर्ष में पुराने कर्ज के भुगतान के मद में 2.80 लाख करोड़ रुपये की राशि लौटाने का अनुमान है.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 का बजट पेश करते हुए कहा था, ''बाजार से लिया जाने वाला सकल कर्ज करीब 12 लाख करोड़ रुपये रहेगा. हमने राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर आगे बढ़ने की योजना बनाई है और राजकोषीय घाटा धीरे-धीरे कम करते हुए 2025-26 तक जीडीपी के 4.5 फीसदी पर लाने का लक्ष्य है.''

राजकोषीय घाटा 6.8 फीसदी रहने का अनुमान

सरकार राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए ऋण प्रतिभूति और ट्रेजरी बिल जारी कर बाजार से कर्ज लेती है. बजट में एक अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष के लिये राजकोषीय घाटा 6.8 फीसदी रहने का अनुमान रखा गया है जो 2020-21 के 9.5 फीसदी से कम है.



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खुदरा मुद्रास्फीति 4 फीसदी पर बनाए रखने का लक्ष्य

बजाज ने कहा कि 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा बजट में घोषित संशोधित अनुमान के आसपास रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने आरबीआई को 31 मार्च, 2026 तक खुदरा मुद्रास्फीति 2 फीसदी घट-बढ़ के साथ 4 फीसदी पर बनाए रखने का लक्ष्य दिया है.
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