चीनी कंपनियों को लगेगा बड़ा झटका! भारत में निवेश के 50 प्रस्तावों की समीक्षा कर रही केंद्र सरकार

चीनी कंपनियों को लगेगा बड़ा झटका! भारत में निवेश के 50 प्रस्तावों की समीक्षा कर रही केंद्र सरकार
हाल ही में केंद्र सरकार ने पड़ोसी देशों से निवेश को लेकर नई नीति लागू किया है.

पड़ोसी देशों द्वारा भारत में निवेश को लेकर नई नीति लागू करने के बाद अब सरकार नये इन्वेस्टमेंट का रिव्यू करने में जुट गई है. सरकार द्वारा इस नीति को लागू करने के बाद करीब 50 आवेदन आए हैं. मार्च 2020 तक भारत में करीब 2 लाख करोड़ रुपये का चीनी निवेश है.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार अब चीनी कंपनियों से संबंधित 50 इन्वेस्टमेंट प्रस्तावों (Investment Proposal from Chinese Firms) को नई स्क्रीनिंग पॉलिसी के तहत रिव्यू कर रही है. इस मामले से संबंधित 3 सूत्रों ने जानकारी दी. अप्रैल में ऐलान किये गये नये नियम के तहत, पड़ोसी देशों की ईकाईयों द्वारा भारत में निवेश से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी अनिवार्य हो गई है. यह किसी भी नये या अतिरिक्त फंडिंग पर लागू होगी. पड़ोसी देशों में चीन सबसे बड़ा निवेशक है. भारत सरकार द्वारा इस नीति को लागू करने के बाद चीनी​ निवेशकों समेत बीजिंग ने भी इसकी अलोचना की थी. उन्होंने इसे भेदभाव वाली नीति करार दिया था.

सरकार क्यों लाई ये नई नीति?
दरअसल, केंद्र सरकार कोरोना वायरस आउटब्रेक के बीच अवसारवादी अधिग्रहण की वजह से इस नीति को लागू किया था. हालांकि, इंडस्ट्रीज का कहना है कि दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर उठे विवाद से उनकी मंजूरियों में देरी हो सकती है. बता दें कि बीते 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवानी घाटी में हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने की खबर आई थी. इसके बाद भारत और चीन के बीच तनाव बहुत बढ़ गया.

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पहले से ज्यादा सतर्क है सरकार


एक सरकारी अधिकारी से जब पूछा गया कि सीमा विवाद के बाद निवेश पर क्या असर पड़ेगा तो उन्होंने कहा, 'कई तरह की क्लियरेंस की जरूरत है. हम पहले की तुलना में अब ज्यादा सतर्क हैं.' वाणिज्य मंत्रालय के इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट ने इस नीति को ड्राफ्ट किया था. इस मसले पर इस डिपार्टमेंट की तरफ से कोई बयान नहीं आया है.

नई नीति के बाद सरकार के पास करीब 50 आवदेन
सूत्रों ने गोपनीयता का हवाला देते हुए इन कंपनियों का नाम देने से इनकार कर दिया. दो अन्य अधिकारियों ने कहा कि चीनी निवेशकों की फंडिंग से संबंधित 40 से 50 आवेदन अभी तक फाइल किए जा चुके हैं. नई नीति लागू किए जाने के बाद ये आवेदन आए हैं और फिलहाल सरकार इनका रिव्यू कर रही है.

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कानूनी सलाह ले रहे चीनी निवेशक
एक सूत्र ने बताया कि चीन में भारत के वाणिज्यदूतावास यानी कान्सुलेट समेत कई एजेंसियां निवेशकों और इनके प्रतिनीधियों से इन प्रस्तावों के संबंध में बातचीत कर रही हैं. कृष्णमूति एंड कंपनी नाम की एक लॉ फर्म के एक पार्टनर अलोक सोनकर ने बताया कि कम से कम 10 चीनी ​क्लाइंट्स ने हालल हाल के दिनों में भारत में निवेश पर कानूनी सलाह मांगी है. सोनकर ने बताया कि वो अभी भी नई नीति के आउटलुक को लेकर और स्पष्टीकरण का इंजतार कर रहे हैं.
सोनकर ने कहा, 'निवेश मंजूरी की टाइमलाइन को लेकर अनिश्चितता कई पार्टियों को निवेश प्रस्ताव से रोक रहीं है.'

बैन हुए हैं 59 चीनी ऐप्स
मालूम हो कि पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया था. इसमें बाइटडांस की पॉपुलर शॉर्ट वीडियो मेकिंग ऐप टिकटॉक और टेन्सेंट की वीचैट भी शामिल है. इसे केंद्र सरकार की इस कार्रवाई को मौजूदा सीमा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है और चीन पर बडी प्रतिक्रिया बताया जा रहा है. हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि देश की संप्रुभात और अखंडता के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया है.

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सरकार के इस कदम से दक्षिण एशियाई बाजार में चीनी बिजनेस के विस्तारीकरण योजना को बड़ा धक्का लगा है. रिसर्च ग्रुप बुकिंग्स ने मार्च में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि चीनी कंपनियों द्वारा मौजूदा और योजना वाले निवेश की कुल वैल्यू करीब 26 अरब डॉलर यानी करीब 2 लाख करोड़ रुपये है.
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