GST के बाद सरकार बदलेगी एक और सबसे बड़ा कानून! आप पर होगा ये असर

गुड्स एंड सर्विस टैक्स के बाद अब सरकार पूरे देश में एक समान स्टांप ड्यूटी दर लागू करने जा रही है.

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Updated: October 13, 2018, 6:24 PM IST
GST के बाद सरकार बदलेगी एक और सबसे बड़ा कानून! आप पर होगा ये असर
GST के बाद सरकार करने जा रही है एक और बड़ा टैक्स सुधार! आप पर होगा ये असर
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Updated: October 13, 2018, 6:24 PM IST
गुड्स एंड सर्विस टैक्स के बाद अब सरकार पूरे देश में एक समान स्टांप ड्यूटी दर लागू करने जा रही है. अगर आसान शब्दों में समझें तो आमतौर पर शेयर, डिबेंचर की खरीद-बिक्री और प्रॉपर्टी के सौदे में स्टांप ड्यूटी की जरूरत पड़ती है. सरकार इसे पूरे देश में एक जैसा करने की तैयारी में है.

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बदलवा की तैयारी पूरी- सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारों ने एक सदी पुराने स्टांप ड्यूटी एक्ट में बदलाव कर, उसे अंतिम रूप दे दिया है. जानकारी के मुताबिक प्रस्ताव पूरी तरह तैयार है और संशोधन के साथ बिल को शीतकालिन सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा. साथ ही केंद्र ने आश्वासन दिया है की राज्य के राजस्व का ख्याल रखा जाएगा. (ये भी पढ़ें-सिर्फ 12 रुपए/महीने देकर पाएं 2 लाख रुपये का इंश्योरेंस, जिदंगी भर फैमली और आप रहेंगे टेंशन फ्री)

क्यों सरकार उठा रही है ये कदम- स्टैंप ड्यूटी में भिन्नता की वजह से अक्सर लोग ट्रांजैक्शन ऐसे राज्यों के जरिए करते हैं, जहां दर कम होती है. मार्केट रेग्युलटर सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने इससे पहले राज्यों को सलाह दी थी कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होने वाले फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर स्टैंप ड्यूटीज को एकसमान बनाएं या माफ कर दें. (ये भी पढ़ें-सिर्फ 13 हजार रुपये में मिल रही है XUV 500 समेत ये कारें, ये है महिंद्रा की नई स्कीम)

आपको बता दें कि एकसमान स्टैंप ड्यूटी रेट के लिए 1899 के कानून में बदलाव के लिए प्रयास पहले भी हुए हैं, लेकिन राज्यों ने इस अपील को खारिज कर दिया, क्योंकि वे स्टैंप ड्यूटी पर अधिकार खोना नहीं चाहते.

क्या होती है स्टैंप ड्यूटी- ज़मीन खरीद से जुड़े लेन-देन और फाइनेंशियल डॉक्युमेंट्स पर यह टैक्स लगता है. लेकिन इसे अभी GST के दायरे से बाहर रखा गया था. बिल्स ऑफ एक्सचेंज, चेक, लेडिंग बिल्स, लेटर्स ऑफ क्रेडिट, इंश्योरेंस पॉलिसीज, शेयर ट्रांसफर, इकरार-नामा जैसे वित्तीय साधनों पर स्टैंप ड्यूटी संसद से तय होते है. हालांकि, अन्य वित्तीय साधनों पर स्टैंप ड्यूटी की दर राज्य दर करते हैं.
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