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बेतहाशा न बढ़ें पेट्रोल और डीजल के दाम, इसके लिए सरकार का है यह खास प्लान

अगर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम (petrol and diesel rate) ज्‍यादा बढ़ते हैं तो सरकार इन्‍हें नियंत्रित करने के लिए सुविचारित हस्‍तक्षेप करेगी.

अगर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम (petrol and diesel rate) ज्‍यादा बढ़ते हैं तो सरकार इन्‍हें नियंत्रित करने के लिए सुविचारित हस्‍तक्षेप करेगी.

अगर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम (petrol and diesel rate) ज्‍यादा बढ़ते हैं तो सरकार इन्‍हें नियंत्रित करने के लिए सुविचारित हस्‍तक्षेप करेगी. यह बात मंगलवार को वित्‍त राज्‍यमंत्री ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कही. वित्‍त राज्‍यमंत्री ने कहा कि वैश्विक घटनाओं पर सरकार की कड़ी नजर है.

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नई दिल्‍ली. रूस और यूक्रेन में चल रहे युद्ध (Russia-Ukraine War) के कारण कच्‍चे तेल की कीमतें (Crude oil Price) आसमान पर पहुंच गई हैं. इसी को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं की भारत में भी सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम (Petrol and diesel rate) कभी भी बढ़ा सकती है. पेट्रोल-डीजल रेट में प्रति लीटर 15 रूपये की बढ़ोतरी की आशंका भी बाजार जानकार जता चुके हैं. लेकिन, अब सरकार ने साफ कर दिया है कि वह तेल के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी नहीं होने देगी.

मंगलवार को वित्‍त राज्‍यमंत्री पंकज चौधरी (Minister of State for Finance Pankaj Choudhary) ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार उभरते वैश्विक घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रही है तथा आम आदमी के हितों की रक्षा के लिए पेट्रोल-डीजल के मूल्‍यों को नियंत्रण में रखने के लिए

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‘सुविचारित हस्तक्षेप’ करेगी.
यह पूछे जाने पर की सरकार यूक्रेन के संकट के कारण ईंधन की कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती करेगी, इस पर चौधरी ने लिखित जवाब में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल के अंतरराष्ट्रीय उत्पाद की कीमतों, एक्साइज रेट, टैक्स स्ट्रक्चर और अन्य लागत आदि को ध्यान में रखकर इनके रेट निर्धारित करती हैं.

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उन्होंने कहा कि सरकार की इन कारकों और वर्तमान वैश्विक घटनाक्रमों पर कड़ी नजर है और जनता के हितों की रक्षा के लिए जब भी जरूरत होगी, सुविचारित हस्तक्षेप करेगी. चौधरी ने कहा, “आम आदमी के हितों की रक्षा के लिए, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, नवंबर 2021 से डीजल और पेट्रोल की खुदरा कीमतों में संशोधन नहीं किया गया है.”

भारत अपनी तेल आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत पूरा करने के लिए विदेशी खरीद पर निर्भर करता है, जिससे यह एशिया में तेल की ऊंची कीमतों से प्रभावित होने वाले सबसे कमजोर देशों में गिना जाता है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमतें पिछले सप्ताह की शुरुआत में 140 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं. अब कीमतों में गिरावट आई है और यह 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही है.

Tags: Centre Government, Inflation, Petrol and diesel

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