जो भी बिक सकता है बेचेगी सरकार, चुनिंदा PSU में हिस्सेदारी 51% से नीचे लाएगी!

जो भी बिक सकता है बेचेगी सरकार, चुनिंदा PSU में हिस्सेदारी 51% से नीचे लाएगी!
जो भी बिक सकता है बेचेगी सरकार, चुनिंदा PSUs में हिस्सेदारी 51% से नीचे लाएगी

सरकार चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से नीचे लाने की भी योजना बना रही है.

  • भाषा
  • Last Updated: September 26, 2019, 9:34 PM IST
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नई दिल्ली. वित्त मंत्रालय (Finance Minister) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने निजीकरण (Privatisation को सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए कहा कि ‘जो भी बिक सकता है उसे बेचा जाएगा.’ इसके अलावा सरकार (Government) चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से नीचे लाने की भी योजना बना रही है.

अधिकारी ने कहा कि सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से नीचे लाने के लिए कानून में कुछ संशोधन करने की जरूरत होगी. साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ये कंपनियां केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission, CVC) और नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller & Auditor General, CAG) के नियंत्रण दायरे से बाहर आ सकें.

कंपनी कानून की धारा 241 में संशोधन की जरूरत
अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व में सार्वजनिक उपक्रमों में कम से कम 51% हिस्सेदारी रखने का फैसला किया था. अब मंत्रिमंडल को ही इस हिस्सेदारी को इससे नीचे लाने पर फैसला करना होगा. अधिकारी ने कहा कि सरकार चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी 51 फीसदी से नीचे लाने की योजना बना रही है. अधिकारी ने कहा कि इस तरह का कदम संभव है. इसके लिए कंपनी कानून की धारा 241 में संशोधन करने की जरूरत होगी.



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निजीकरण सरकार की शीर्ष प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि अगले 3-4 साल में सरकार की शीर्ष प्राथमिकता निजीकरण की है. उन्होंने कहा, इसके लिए हमें प्रधानमंत्री का पूरा समर्थन है. उस समर्थन के जरिये मुझे पूरा भरोसा है कि जो भी बिक सकता है उसे बेचा जाएगा. जो नहीं बिकने योग्य है उसे भी बेचने का प्रयास किया जाएगा.

अधिकारी ने यह भी माना कि इस मामले में विभिन्न पक्षों द्वारा अवरोध खड़े किये जाएंगे लेकिन सरकार ने अपना मन बना लिया है. उन्होंने कहा कि 70 साल पुरानी मानसिकता को छोड़ना इतना आसान नहीं है. जो भी सार्वजनिक उपक्रमों के शीर्ष पर बैठे हैं वह अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहते हैं. लेकिन सरकार निजीकरण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

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