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किसानों को मिलेगी राहत! उर्वरकों पर जारी रहेगी सब्सिडी

उर्वरकों पर सब्सिडी जारी रहेगी.

उर्वरकों पर सब्सिडी जारी रहेगी.

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि घरेलू बाजार में यूरिया की कीमत आज 266 रुपये प्रति 50 किलो बोरी बनी हुई है, जबकि अंतरराष्ट ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. सरकार रूस-यूक्रेन संघर्ष, चीन की तरफ से भारी खरीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि होने के बावजूद किसानों को सस्ते दाम पर उर्वरकों की आपूर्ति करती रहेगी. इस वजह से चालू वित्त वर्ष में वार्षिक उर्वरक सब्सिडी बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है.

कुछ हलकों में जताई जा रही चिंताओं और संसद में विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच सरकार के एक शीर्ष सूत्र ने सोमवार को कहा कि मोदी सरकार के लिए किसानों के हित सर्वोपरि हैं और यह पहले से ही विभिन्न फसल पोषक तत्वों (उर्वरकों) पर दी जा रही भारी सब्सिडी से स्पष्ट है और अगर सब्सिडी बढ़ती भी है तो सरकार इसे देने से नहीं हिचकिचायेगी.

सूत्र ने कहा, ‘‘सरकार ने मई से शुरू होने वाले खरीफ बुआई सत्र के लिए 30 लाख टन डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और 70 लाख टन यूरिया सहित उर्वरक की पहले से ही पर्याप्त व्यवस्था कर ली है. जरूरत के अनुसार आगे और खरीद करेंगे.’’ सरकारी अधिकारियों के अनुसार घरेलू बाजार में यूरिया की कीमत आज 266 रुपए प्रति 50 किलो बोरी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत बढ़कर 4,000 रुपए प्रति बोरी हो गई है. इस तरह प्रत्यक बोरी पर सरकार करीब 3,700 रुपए की सब्सिडी दे रही है.

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घरेलू बाजार में डीएपी की कीमत 1,350 रुपए प्रति बोरी है, जबकि इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़कर 4,200 रुपए प्रति बोरी हो गई है. हालांकि, जटिल उर्वरक (एनपीके) की कीमत करीब 1 एक साल से 1,470 रुपए प्रति बोरी पर ही बनी हुई है. अधिकारियों के मुताबिक, एक साल पहले एनपीके की कीमत 1,300 रुपए से बढ़ाकर 1,470 रुपए प्रति बोरी किया गया था.

पाकिस्तान और चीन से दाम कम
अधिकारियों के मुताबिक, भारत में उर्वरक के दाम पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में बहुत कम हैं. अमेरिका, इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में भी कीमतें कम हैं. उनके अनुसार चीन अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर उर्वरक खरीद कर रहा है, हालांकि वह पहले निर्यात करता था.

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हाल में सब्सिडी बहुत अधिक बढ़ी
आम तौर पर उर्वरक सब्सिडी 1 वर्ष में करीब 80-85 हजार करोड़ रुपए रहती है, लेकिन हाल के दिनों में यह काफी अधिक अधिक बढ़ गई है. रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा था कि यूरिया की कीमत पिछले सात वर्षों में नहीं बढ़ाई गई है ताकि किसानों को कोई कठिनाई न हो.

Tags: Business news in hindi, Centre Government, Farmer, Fertilizer crisis

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