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कृषि कानूनों पर विरोध के बीच MSP पर हुई 575 लाख टन धान की खरीद, किसानों को मिले 1.08 लाख करोड़ रुपये

नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच सरकार ने किसानों से 575 लाख टन धान की एमएसपी पर खरीद की.
नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच सरकार ने किसानों से 575 लाख टन धान की एमएसपी पर खरीद की.

नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के विरोध के बीच फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) और राज्‍य सरकारों ने न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) पर खरीफ फसलों (Kharif Crops) की जमकर खरीदारी की है. सरकार ने 20 जनवरी 2021 तक पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी ज्‍यादा धान की खरीद (Paddy Procurement) कर ली है. इससे 82 लाख से ज्‍यादा किसानों को फायदा मिल चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 10:41 PM IST
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नई दिल्‍ली. नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के विरोध के बीच फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) और राज्‍य सरकारों ने किसानों से खरीफ फसल (Kharif Crop) की न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर बंपर खरीद (Procurement on MSP) की है. किसानों से 20 जनवरी 2021 तक एमएसपी पर पिछले साल के मुकाबले 23.41 फीसदी ज्‍यादा यानी 575.36 लाख टन धान की खरीद (Paddy Procurement) हो चुकी है. इसके एवज में किसानों को 1,08,629.27 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. बता दें कि खरीफ विपणन सत्र (KMS) अक्‍टूबर से शुरू होता है.

फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने पिछले साल की समान अवधि में किसानों से एमएसपी पर 466.22 लाख टन धान की खरीद ही की थी. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस साल 82.08 लाख किसानों को सरकारी खरीद से सीधा फायदा (Farmers Benefitted) मिल चुका है. खाद्य मंत्रालय (Food Ministry) की ओर से कहा गया कि मौजूदा खरीफ विपणन सत्र 2020-21 में सरकार एमएसपी योजनाओं के अनुसार किसानों से खरीफ फसलों की खरीद करना जारी रखेगी.

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पंजाब के किसानों से खरीदा गया 202.77 लाख टन धान
खरीफ फसलों की एमएसपी पर की गई धान की कुल 575.36 लाख टन खरीदारी में से 202.77 लाख टन धान सिर्फ पंजाब से खरीदा गया है. बता दें कि लंबे समय से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के किसानों दिल्‍ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं. वे केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. विरोध कर रहे किसान चाहते हैं कि सरकार तीनों नए कृषि कानूनों को खारिज करे. साथ ही किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य की लीगल गारंटी दे. वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर फसलों की सरकारी खरीदारी की व्‍यवस्‍था जय की तस बनी रहेगी. केंद्र सरकार फिलहाल नए कृषि कानूनों को निलंबित रखने को भी तैयार हो गई है, लेकिन किसान इन्‍हें रद्द करने पर अड़े हुए हैं.
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