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सीमा पर चीनी सेना के पीछे हटते ही सरकार ने देना शुरू की एफडीआई प्रस्तावों को हरी झंडी

देश में चीन के कुल 12000 करोड़ रुपए के एफडीआई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं.
देश में चीन के कुल 12000 करोड़ रुपए के एफडीआई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं.

केंद्र सरकार ने सीमा पर तनाव कम होते देख चीन (China) के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रस्तावों को केस टु केस बेसिस (Cast to case basis) पर हरी झंडी देनी शुरू कर दी है. इससे पहले चीन के साथ सीमा विवाद पर सरकार ने प्रस्तावों को रोककर रखा था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 5:42 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने करीब 9 महीने के बाद चीन (China) के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रस्तावों को केस टु केस बेसिस (Cast to case basis) पर हरी झंडी देनी शुरू कर दी है. इससे पहले चीन के साथ सीमा विवाद पर सरकार ने एफडीआई प्रस्तावों को रोककर रखा था. अब चीनी सेना के गलवान घाटी में पीछे हटने और सीमा पर तनाव (Border Tension) कम होने पर दोबारा से एफडीआई को चीन के लिए खोला है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों से चीन के एफडीआई प्रस्तावों (FDI Proposals) को मंजूरी मिलनी शुरू हो गई है. हालांकि अभी भी सरकार ने बड़े एफडीआई के प्रस्तावाें को रोककर रखा है. सिर्फ सीमित और छोटे मामलों को ही मंजूरी दी जा रही है. सूत्रों ने बताया कि चीन से आए एफडीआई के बड़े प्रस्तावों की स्थिति का सावधानी से आकलन करने के बाद मंजूरी दी जाएगी.

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मंजूरी के लिए बनाई कोऑर्डिनेंस कमेटी
टीओआई की खबर के मुताबिक सरकार ने एफडीआई की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक कोऑर्डिनेसन कमेटी बनाई है. कमेटी में होम, फॉरेन, कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और नीति आयोग के अधिकारी हैं. हालांकि यह समिति विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड की तरह नहीं है जो सभी मामलों को देखता है. पड़ोसी देशों के सभी एफडीआई प्रस्तावों का संबंधित मंत्रालय छानबीन करता है और इस पर फैसला करता है. टेलिकॉम या इंश्योरेंस जैसे सेक्टरों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जाती है. इनमें प्रस्तावों के स्वीकार या खारिज किए जाने से पहले उनकी समीक्षा की जाती है.
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सीमा विवाद के बाद सरकार ने बदले थे नियम, चीन के 12000 करोड़ के प्रस्ताव लंबित
पूर्व में ऑटोमैटिक रूट से अप्रूवल के मामले में कंपनियों को सरकार से मंजूरी लेने की बाध्यता नहीं होती थी. लेकिन सीमा विवाद के बाद सरकार ने एफडीआई के नियमों में बदलाव किया था. पड़ोसी देश के प्रस्तावों के लिए सरकार की मंजूरी को अनिवार्य बना दिया गया था. उन सेक्टरों में भी इसे जरूरी बना दिया गया जहां ऑटोमैटिक क्लीयरेंस की अनुमति है. इससे चीन के निवेशक बुरी तरह प्रभावित हुए. हाल के वर्षों में टेक्नोलॉजी और डिजिटल स्पेस में चीन से काफी निवेश आया है. बदले नियमों के कारण एक शेयर को ट्रांसफर करने के लिए भी सरकार की मंजूरी चाहिए. इससे देश में चीन के कुल 12000 करोड़ रुपए के एफडीआई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं.
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कोरोना महामारी के वक्त में सरकार निवेश को प्रभावित नहीं होने देना चाहती
सरकार ने साफ किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा. लेकिन चीन के एफडीआई प्रस्तावों को मामले में सरकार फूंक-फूंककर कदम उठा रही है. चीनी एफडीआई प्रस्तावों की सीमित मंजूरी से ऐसा झलकता भी है. सरकार कोरोना महामारी के वक्त में निवेश को भी प्रभावित नहीं होने देना चाहती है.
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