इन 4 कं​पनियों को बेचकर 60 हजार करोड़ जुटाएगी सरकार, जानिए क्यों जरूरी है यह बिक्री

प्रतीाकात्मक तस्वीर
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नवंबर अंत तक केंद्र सरकार BPCL, शिपिंग कॉरपोरेशन (SCI), कंटेनर कॉरपोरेटशन (Concor) और BEML के लिए बोली मंगा सकती है. चालू वित्त वर्ष में सरकार को विनिवेश लक्ष्य करना महत्वपूर्ण है. ऐसे में अधिकारियों के सामने कई चुनौतियां हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 12:15 PM IST
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नई दिल्ली. घरेलू शेयर बाजार में तेजी को देखते हुए सरकार नवंबर अंत तक 4 प्रमुख सरकारी उपक्रमों (PSUs) की बिडिंग प्रक्रिया को खत्म करने की योजना बना रही है. ये चार प्रमुख सरकारी उपक्रम - BPCL, शिपिंग कॉरपोरेशन (SCI), कंटेनर कॉरपोरेटशन (Concor) और BEML है. हालांकि, इन कंपनियों की शेयर प्राइस में गिरावट देखने को मिल रही है. इस मामले से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि सरकार इस मौके से चूकना नहीं चाहती है, क्योंकि बाजार में ​अस्थिरता की वजह से कीमतों और भी गिर सकती हैं.

शुक्रवार तक इन लिस्टेड कंपनियों (Listed Companies) में सरकारी हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 56,214 करोड़ रुपये है. एक मीडिया रिपोर्ट में इन अधिकारियों के हवाले से ​लिखा गया है कि उम्मीद की जा रही है कि BPCL और Concor में सरकार को बेहतर प्रीमियम दर मिलेगी क्यों​कि इसमें बिजनेस के मौके हैं. साथ ही इन दोनों कंपनियों की परिसं​पत्तियां भी इसकी एक वजह है.

विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए BPCL की बिक्री जरूरी
फरवरी मध्य की तुलना में BPCL के शेयरों को देखें तो यह करीब 26 फीसदी तक कम है. इसी प्रकार Concor 32 फीसदी नीचे, BEML 34 फीसदी नीचे और SCI 13 फीसदी नीचे है. ये शेयर्स अभी कोरोना काल के पहले स्तर पर नहीं पहुंचे हैं. जनवरी में सरकार की 53 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 55,000 करोड़ रुपये पर थी. लेकिन, मौजूदा बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) के लिहाज से यह घटकर करीब 40,000 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गई है. बता दें कि चालू वित्त वर्ष में BPCL की बिक्री करना सरकार के लिए जरूरी है ताकि 1.2 लाख करोड़ रुपये के ​विनिवेश लक्ष्य को पूरा किया जा सके.
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सरकार के लिए महत्वपूर्ण है विनिवेश के जरिए फंड जुटाना
निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) इन कंपनियों के लिए बोली मंगाएगी. इसके पहले केंद्र सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) मंगाने की डेडलाइन को 30 सितंबर से बढ़ाकर 16 नवंबर कर दिया था. चूंकि, मौजूदा समय में केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था में पूंजी डालने के लिए कई विकल्पों की तलाश कर रही है, ऐसे में विनिवेश के जरिए फंड जुटाना महत्वपूर्ण हो जाता है.

कच्चे तेल के भाव पर टिकी सरकार की उम्मीद
यही कारण है कि अब BPCL की ​बोली को लेकर अधिकारियों की चिंता भी बढ़ गई है. दरअसल, कोविड-19 महामारी और कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) में गिरावट की वजह से वैश्विक ऑयल कंपनियां बड़े वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही हैं. इसके अलावा, डिकार्बोनाइजेशन लक्ष्य (Decarbonization Target) को पूरा करने के लिए ये कंप​नियां जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) के इस्तेमाल कम करने की प्रक्रिया में हैं. हालांकि, सरकार की उम्मीद अब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भाव में रिकवरी को लेकर है.

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सरकार ने रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) से उस जमीन के लिए लाइसेंस फीस के झंझट को खत्म करने को कहा है, जिस पर कॉनकोर ऑपरेट करती है. इस उच्च लाइसेंस फीस ने वजह नीजिकरण प्रक्रिया को रोक दिया था. रेलवे मंत्रालय अब रेलवे भूमि पर निर्मित सुविधाओं के लिए एक नई भूमि लाइसेंसिंग शुल्क नीति तैयार करने के एडवांस स्टेज में है.
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