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वित्त वर्ष 2017-18 के लिए कंज्यूमर सर्वे नहीं जारी करेगी सरकार, बताया ये कारण

News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 9:18 PM IST
वित्त वर्ष 2017-18 के लिए कंज्यूमर सर्वे नहीं जारी करेगी सरकार, बताया ये कारण
वित्त वर्ष 2017-18 का कंज्यूमर सर्वे नहीं पेश करेगी सरकार

केन्द्र सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए ​कंज्यूमर सर्वे (Consumer Survey) जारी नहीं करने का फैसला किया है.

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  • Last Updated: November 15, 2019, 9:18 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) ने जुलाई 2017 से लेकर जून 2018 के बीच हाउसहोल्ड कंज्म्पशन एक्सपेंडीचर (Household Consumer Expenditure Survey) के 75वें सर्वे के नतीजे नहीं जारी करने का फैसला लिया है. इसके लेकर सरकार ने शुक्रवार को प्रेस रिलीज जारी कर जानकारी दी. सरकार की तरफ से इस बयान में कहा गया है कि सर्वे के दौरान जुटाए गए आंकड़ों और प्रशासानिक स्तर के आंकड़ों में कई तरह की गड़बड़िया पाई गई है. हालांकि, सरकार वित्त वर्ष 2021-22 के लिए इस सर्वे को पहले से बेहतर तरीके से करने की तैयारी कर रही है.

हर पांच साल पर किया जाता है यह सर्वे
बता दें कि ऑल इंडिया सर्वे ऑन हाउसहोल्ड कंज्म्पशन एक्सपेंडीचर का 75वां सर्वे जुलाई 2017 से लेकर जून 2018 के ​बीच किया गया था. उपभोक्ता व्यय को लेकर यह सर्वे हर पांच साल पर किया जाता है. इसके पहले जुलाई 2011 से लेकर जून 2012 के बीच किया गया था.

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विशेष तरीके से किया जाता है सर्वे
NSS द्वारा किए जाने वाले इस सर्वे में घरेलू मासिक प्रति व्यक्ति उपभोक्ता व्यय यानी MPCE और इनMPCE वर्ग में हाउसहोल्ड और व्यक्तियों के वितरण के बारे में अनुमान लगाया जाता है. इस सर्वे को विशेष तरीके से पूरा किया जाता है ताकि यह पता चल सके कि किसी भी हाउसहोल्ड भी वस्तुओं और सेवाओं को लेकर प्रति व्यक्ति कैसे खर्च करता है.
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सांख्यिकी मंत्रालय ने रोका सर्वे
मंत्रालय ने NSS द्वारा उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स
को देखा है जिसमें कहा गया है कि उपभोक्ता खर्च गिर रहा है. इसके बाद सामने वाली बातों और निष्कर्षों को देखते हुए रोक दिया गया है.

सरकारी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि सर्वे के माध्यम से जुटाए गए इन आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट्स तैयार करने की प्रक्रिया काफी गहन होती है. मंत्रालय में आने वाले इस तरह के सभी सबमिशन ड्राफ्ट के फॉर्म में होते हैं और इन्हें अंतिम रिजल्ट नहीं माना जाना चाहिए.

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आंकड़ों में अंतर
इस बयान में कहा गया है कि सर्वे के ​परिणामों की जांच की गई और नोट किया गया कि उपभोग में न केवल अलग-अलग स्तर पर डाइवर्जेन्स है बल्कि वस्तुओं एवं सेवाओं को लेकर कुछ आंकड़ों को प्रशासनिक आंकड़ों से मिलान किया गया तो इसमें अंतर देखने को मिला.

एक्सपर्ट कमेटी ने दिया सुझाव
इस सर्वे में इस्तेमाल उपभोग से जुड़े आंकड़े जुटाने के लिए इस्तेमाल किए गए इन्स्ट्रुमेन्ट्स की क्षमता और संवेदनशीलत पर भी चिंता जाहिर की गई है. खासतौर से हेल्थ और शिक्षा के क्षेत्र के आंकड़ों को लेकर. इसके बाद इस मामले को एक्सपर्ट कमेटी को भेज दिया गया था जो कि सर्वे के तरीकों में कुछ बदलाव करने और आंकड़ों की क्वालिटी बेहतर करने को लेकर कुछ सुझाव पेश किया गया. इस कमेटी की सुझावों पर विचार किया जा रहा है ताकि आगे के सर्वे में इसका इस्तेमाल किया जाता सके.

एनएएस की एडवाइजरी कमेटी ने भी दिया सुझाव
नेशनल अकाउंट स्टैटिस्टिक्स की एडवाइजरी कमेटी ने भी अलग से सुझाव दिया है कि जीडीपी सीरीज को फिर से रिबेस यानी आधारित किया जाए. कहा गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 को उपयुक्त आधार वर्ष नहीं माना जा सकता है.

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 आंकड़ों की गुणवत्ता को देखते हुए मंत्रालय ने फैसला लिया है कि ​2017-18 के लिए उपभोक्ता व्यय सर्वे के नतीजे को जारी नहीं किया जाएगा. हालांकि, मंत्रालय वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अगले सर्वे की तैयारी कर रहा है ताकि इसे सही तरीके से किया जाए.

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First published: November 15, 2019, 9:02 PM IST
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