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RBI से तकरार जगजाहिर होने पर सरकार 'नाराज़', उर्जित पटेल को ठहराया जिम्मेदार

सांकेतिक तस्‍वीर. (File Photo: REUTERS)
सांकेतिक तस्‍वीर. (File Photo: REUTERS)

आरबीआई के डिप्‍टी गवर्नर विराल आचार्य ने चेतावनी दी थी कि केंद्रीय बैंक की स्‍वायत्तता को हल्‍के में लेना विनाशकारी हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 30, 2018, 10:29 AM IST
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केंद्र सरकार के अधिकारी रिजर्व बैंक प्रमुख के साथ मतभेदों की बात सार्वजनिक होने को लेकर नाराज हैं. अधिकारियों ने सोमवार को इस संबंध में कहा कि इस तरह की खबरों से निवेशकों के बीच देश की छवि खराब हो सकती है. आरबीआई के डिप्‍टी गवर्नर विरल आचार्य ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि केंद्रीय बैंक की स्‍वायत्तता को हल्‍के में लेना विनाशकारी हो सकता है. उनका बयान सरकार की ओर से नीतियों में छूट और आरबीआई की ताकतों में कमी करने के दबाव की ओर इशारा था.

आचार्य ने शीर्ष कारोबारियों के सामने अपने भाषण में वर्ष 2010 के दौरान अर्जेंटीना सरकार की तरफ से केंद्रीय बैंक के मामलों में दखल देने के मामलों का उदाहरण देते हुए बताया कि कहां गलती हो सकती है. उन्‍होंने कहा, 'जो सरकारें केंद्रीय बैंक की स्‍वायत्तता का आदर नहीं करतीं उन्‍हें आज नहीं तो कल बाजार की नाराजगी और आर्थिक आग की आंच झेलनी पड़ेगी. इसके बाद वे उस दिन को कोसेंगे जब उन्‍होंने महत्‍वपूर्ण नियामक संस्‍थान की अनदेखी की थी.'

आचार्य की इस टिप्पणी को लेकर केंद्र सरकार के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात की. एक अधिकारी ने बताया कि दिल्‍ली में सरकार और मुंबई में आरबीआई के बीच जो कुछ हुआ उसे गोपनीय रखा जाना चाहिए था. उन्‍होंने कहा, 'सरकार आरबीआई की स्‍वायत्तता और स्‍वतंत्रता का सम्‍मान करती है, लेकिन उन्‍हें भी अपनी जिम्‍मेदारी समझनी होगी.'



एक अन्‍य अधिकारी ने कहते हैं, 'यह काफी दुर्भाग्‍यजनक है कि आरबीआई ने मामले को सार्वजनिक किया. सरकार काफी खफा है. आरबीआई से यह उम्‍मीद नहीं थी.' हालांकि इस मामले पर आरबीआई के प्रवक्‍ता से इस बारे में बात नहीं हो पाई.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने हाल ही में आरबीआई से कुछ बैंकों को कर्ज देने के नियमों में थोड़ी छूट देने को कहा था. वहीं वह आरबीआई की नियामक ताकतों में कटौती करने की कोशिश कर रही है. इसके तहत वह पेमेंटस सिस्‍टम के लिए नया नियामक बनाना चाहती है. मोदी सरकार कथित रूप से आरबीआई पर इस बात के लिए भी दबाव डाल रही है कि वह अपने 3.6 ट्रिलियन के सरप्‍लस धन में कुछ हिस्‍सा सरकार को दें, जिससे राजकोषीय घाटे में कमी की जा सके.
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