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ग्रोफर्स ने इंस्टैंट डिलीवरी शुरू करने के 15 मिनट में 7000 हजार घरों में डिलीवर किया सामान, जानिए डिटेल्स

groffers का दावा है कि वो 15 मिनट के भीतर गुड़गांव के हर घर में किराने का सामान पहुंचा सकता है

groffers का दावा है कि वो 15 मिनट के भीतर गुड़गांव के हर घर में किराने का सामान पहुंचा सकता है

ये ग्रोफर्स की इंस्टैंट डिलीवरी की पहली कोशिश नहीं है. कंपनी ने इसे अपने शुरुआती सालों में शुरू किया था, लेकिन कई कारणों से इसे बंद कर दिया गया था.

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    नई दिल्ली. किसी भी सामान को ऑनलाइन मंगवाते समय सबसे बड़ी चिंता यह रहती है कि सामान जल्द से जल्द हमारे पास पहुंच जाए. यही वजह है कि अब इस मार्केट में बढ़ते कॉम्पिटिशिन के कारण कंपनियों के बीच भी यह महत्वपूर्ण प्‍वाइंट रहता है कि कौन कितनी जल्दी सामान कस्टमर्स तक डिलिवर करवाता है. इसी कड़ी में ऑनलाइन ग्रोसरी डिलीवरी फर्म ग्रोफर्स (Grofers) ने लिस्टेड फर्म Zomato से 12 करोड़ डॉलर जुटाने के बाद 26 जुलाई को इंस्टेंट डिलीवरी शुरू की और महज 15 मिनट में 7,000 से ज्यादा घरों में डिलीवरी कर डाली. ये जानकारी कंपनी के को-फाउंडर और CEO अलबिंदर ढींडसा (Albinder Dhindsa) ने दी.

    ढींडसा ने ट्वीट कर कहा, "जब मौजूदा महामारी की पहली लहर आई, तो हमें दो चीजों का एहसास हुआ. सबसे पहले, हमें लोकल पार्टनर्स और डिलिवरी एजेंटों का सपोर्ट करने के लिए कुछ ज्यादा करने की जरूरत है, जिन्होंने ये सुनिश्चित किया कि जरूरी सामान हमारे यूजर्स तक पहुंचें. दूसरा, हमने माना कि जब यूजर्स को ग्रोसरी सर्विस की काफी ज्यादा जरूरत थी, तब हमारे यूजर्स की जरूरतों के लिए पूरे महीने डिलिवरी की गईं.''

    तैयार किया खास इंफ्रास्ट्रक्चर
    पिछले साल 2020 में, ग्रोफर्स ने गुरुग्राम में अपने पार्टनर्स के नेटवर्क को सीधे ब्रांड्स से सोर्सिंग शुरू करने के लिए बदल दिया और इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया, जिससे वे कम समय ज्यादा से ज्यादा ग्रहकों तक पहुंच बना सकें. उन्होंने आगे कहा, "पिछले पांच सालों में हमारे काम ने हमें एक ऐसा इको सिस्टम बनाने में मदद की है, जो 15 मिनट के भीतर गुड़गांव के हर घर में किराने का सामान पहुंचाने का वादा कर सकता है. कल 7000 से ज्यादा परिवारों को 15 मिनट के भीतर डिलीवरी की गईं.

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    पहले भी कर चुकी है कंपनी इंस्टैंट डिलीवरी की कोशिश
    ये ग्रोफर्स की इंस्टैंट डिलीवरी की पहली कोशिश नहीं है. कंपनी ने इसे अपने शुरुआती सालों में शुरू किया था, लेकिन कई कारणों से इसे बंद कर दिया गया था. इससे पहले ग्रोफर्स ने जून में जोमैटो से 120 मिलियन डॉलर जुटाए थे. इस राउंड में मौजूदा इनवेस्टर टाइगर ग्लोबल ने भी हिस्सा लिया. Zomato ने फर्म में 9.3 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की मंजूरी मांगी है। इस निवेश के साथ, ग्रोफर्स एक यूनिकॉर्न में बदल जाएगा. हाल ही में मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में, Zomato के प्रतिद्वंद्वी Swiggy ने भी नॉन फूड डिलीवरी सेगमेंट के महत्व और ग्रोसरी और मीट डिलीवरी वर्टिकल को दोगुना करने की योजना के बारे में बात की थी.

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