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GST@5 Year : क्‍या जीएसटी लागू होने से अर्थव्‍यवस्‍था को फायदा हुआ? कैसे और किसको मिला ज्‍यादा लाभ?

जीएसटी पर चर्चा साल 2002 में शुरू हुई थी और उसके 17 साल बाद इसे लागू किया गया.

जीएसटी पर चर्चा साल 2002 में शुरू हुई थी और उसके 17 साल बाद इसे लागू किया गया.

जीएसटी को लागू हुए आज पांच साल हो गए. 1 जुलाई 2017 को करीब 17 साल के बाद वस्तु एवं सेवा कर लागू किया गया था. इसके लागू ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा टैक्स सुधार माना जाता है. पहली बार देश में नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लाने का विचार 2000 में आया और उसके 17 साल बाद 1 जुलाई 2017 को जीएसटी पूरे में देश में लागू कर दिया गया. इसने एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट और करीब 12 सेस को खत्म कर दिया.

जीएसटी को वन नेशन वन टैक्स की सोच के साथ लाया गया था. इसके लागू होने से रोजमर्रा की कई जरूरी चीजें सस्ती हो गई थीं. इसके अलावा व्यवस्था में पारदर्शिता के कारण अप्रत्यक्ष टैक्स कलेक्शन भी बढ़ा. जून 2022 में 1.44 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ है. जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसा 5वीं बार हुआ है जब कलेक्शन 1.40 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया.

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आम लोगों को पहुंचा फायदा
जीएसटी से पहले अलग-अलग तरह के शुल्क के कारण कई रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर टैक्स की वैल्यू 31 फीसदी तक पहुंच जाती थी. लेकिन जीएसटी के तहत टैक्स की अधिकतम दर ही 28 फीसदी रखी गई. जीएसटी के चार स्लैब है 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी. अधिकांश अनिवार्य वस्तुएं 18 फीसदी या उससे कम की टैक्स स्लैब में हैं. रोजमर्रा की चीजों जैसे टूथपेस्ट और अगरबत्ती पर क्रमश: 18 व 5 फीसदी जीएसटी लगता है. जबकि पहले यही 27 और 10 फीसदी था. वहीं, सोने, कीमती रत्नों के लिए 3 फीसदी की विशेष स्लैब बनाई गई. पॉलिस्ड हीरे पर 1.5 फीसदी की दर से जीएसटी लगता है. दाम घटने से लोगों ने खरीदारी भी बढ़ाई और अर्थव्यवस्था को भी समर्थन मिला.

लग्जरी आइटम 28 फीसदी वाले स्लैब में
ऐशो-आराम की वस्तुओं और सेवाओं को सबसे महंगे यानी 28 फीसदी वाले स्लैब में डाला गया. इन पर सेस भी लगाया जाता है. यह राशि सेस कंपनसेशन फंड में जाती है और अभी तक इसका इस्तेमाल राज्यों की क्षतिपूर्ति की भरपाई के लिए किया जाता था. हालांकि, क्षतिपूर्ति की मियाद जीएसटी लागू होने के 5 साल बाद तक के लिए मान्य थी और 1 जुलाई को यह खत्म हो गई.

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उद्योगों को पहुंचा लाभ
जीएसटी व्यवस्था लागू होने से मैन्युफैक्चरिंग और सेल भी सस्ती हुई. पहले इन पर 12.5 फीसदी की एक्साइज ड्यू, 12.5 फीसदी का वैट 2 फीसदी का सीएसटी लगता था. इससे कुल टैक्स करीब 27 फीसदी तक पहुंच जाता था. आज करीब 30 वस्तु और सेवाएं ही 28 फीसदी वाले स्लैब में हैं और अधिकांश वस्तुएं 12-18 फीसदी वाले स्लैब में हैं. जीएसटी से पहले उद्योगों कई तरह के रिटर्न भरने होते थे और कई प्राधिकरण उसकी जांच करते थे. जीएसटी के बाद इस व्यवस्था में भी बदलाव आया और अब टैक्स भरना अधिक सरल है. जिसका प्रभाव कलेक्शन पर भी दिखता है.

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