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पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और GST से राज्यों की आमदनी में हुआ बड़ा इजाफा

पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और GST से राज्यों की आमदनी में हुआ बड़ा इजाफा

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने भले ही आम आदमी को केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ाई हो, लेकिन इससे राज्यों की आमदनी में जोरदार बढ़ोतरी हुई है.

    पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने भले ही आम आदमी को केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ाई हो, लेकिन इससे राज्यों की आमदनी में जोरदार बढ़ोतरी हुई है.  एसबीआई रिसर्च की एक ओर से जारी रिपोर्ट के कहा गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान राज्यों को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और जीएसटी के चलते टैक्स से 37,426 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय हासिल हो सकती है. आपको बता दें कि टैक्सेशन के तरीके में बदलाव से इन राज्यों पर खासा असर पड़ा, क्योंकि जीएसटी में केंद्र और राज्यों के अंतर्गत आने वाले टैक्सेस सहित सर्विस टैक्स, वैट, एंट्री टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स जैसे इनडायरेक्ट टैक्स मिल गए थे, जिनका इन राज्यों के टैक्स रेवेन्यू में 55 फीसदी से ज्यादा योगदान था.

    राज्यों की आमदनी में 14 फीसदी बढ़ी-एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया हैं कि 24 में से 16 राज्यों के रेवेन्यू में 14 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. आपको बदा दें कि केंद्र व राज्यों ने पारस्परिक सहमति से न्यूनतम टैक्स ग्रोथ की इस बेसलाइन को स्वीकार किया गया था, जिसके नीचे टैक्स रेवेन्यू रहने पर राज्यों के पक्ष में इसकी भरपाई करनी है.

    जीएसटी से हुई 18698 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई-रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान राज्यों को 18,698 करोड़ रुपए का अतिरिक्त रेवेन्यू हासिल हुआ. यदि इस आंकड़े को क्रूड की कीमतों में बढ़ोत्तरी से राज्यों को हुए फायदे में जोड़ दिया जाएगा तो कुल आंकड़ा 37,426 करोड़ रुपए हो जाता है.

    जीएसटी से 18 राज्यों का बढ़ा टैक्स-बीते साल जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स कंप्लायंस बढ़ने और ज्यादा टैक्स बेस के कारण वित्त वर्ष 18 में राज्यों का टैक्स रेवेन्यू बढ़ गया है. गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब को जहां सबसे ज्यादा जीएसटी से हुआ, वहीं जीएसटी लागू होने के बाद कर्नाटक, बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और असम के टैक्स कलेक्शन में कमी दर्ज की गई.

    कंज्यूमर्स को कीमतों के झटके से बचाने की जरूरत- रिपोर्ट में कहा गया, ‘हमारा अनुमान है कि सोशल सिक्युरिटी प्रोग्राम्स को फंडिंग के लिए जहां टैक्स रेवेन्यू में बदलाव किए जाने की जरूरत है, वहीं कीमतों के झटके से कंज्यूमर्स को बचाने की भी जरूरत है. इस लिहाज से राज्य आगे आ सकते हैं और अपनी वैट की दरों को व्यावहारिक बना सकते हैं. रिपोर्ट आखिर में कहती है कि क्रूड की कीमतों के 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

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    (5) रीसेल प्रॉपर्टी या फ्लैट पर जीएसटी चूंकि इन्हें रेडी-टू-मूव-इन प्रॉपर्टी माना जाता है, इन पर जीएसटी नहीं लगता है.

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    Tags: Gst, GST collection, GST law, GST rate

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