GST क्षतिपूर्ति मामला: केंद्र का उधार लेना चतुराई भरा कदम, राज्यों को मिलना चाहिए इसका वित्तीय लाभ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 12 अक्टूबर 2020 को ​नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करती हुईं. (फोटो: PTI/मनवेंदर वशिष्ट)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 12 अक्टूबर 2020 को ​नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करती हुईं. (फोटो: PTI/मनवेंदर वशिष्ट)

केंद्र सरकार द्वारा 1.1 लाख करोड़ रुपये उधार लेने के प्लान के ऐलान के बाद केरल राज्य के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने पूरी क्षतिपूति मांगकर मामले को और हवा दी. उन्होंने राज्य सरकारों को छोड़कर केंद्र द्वारा खुद उधार लेने के फैसले का स्वागत भी किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2020, 2:28 PM IST
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नई दिल्ली. राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति (GST Compensation) की भरपाई को लेकर केंद्र ने अंकगणित में अपनी दक्षता को सा​बित किया है. कई राज्यों द्वारा इस मामले को कोर्ट में घसीटने की धमकी के बाद केंद्र सरकार ने एक ऐसा प्लान पेश किया, जिससे ये लगे कि सरकार पहले के फैसले से पीछे हट रही है, लेकिन ऐसा है नहीं. केंद्र सरकार ने अब 1.1 लाख करोड़ रुपये उधार लेकर राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति देने का ऐलान किया है. इसके पहले राज्य सरकारों से कहा गया था कि वो स्पेशल विंडो के तहत खुद ही उधार लें. सबसे दिलचस्प बात है कि 1.1 लाख करोड़ रुपये के इस उधार को केंद्र के राजकोषीय घाटे के कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया जाएगा. इसका असर राज्य सरकारों के वित्तीय आंकड़ों पर ही पड़ेगा.

हालांकि, नये प्लान में राज्यों के लिहाज से एक बात अच्छी है, वो यह कि इस उधार पर ब्याज दर कम होगा. उधार लेने का यह अंकगणित केंद्र के पक्ष में ही दिख रहा है. राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति दिए जाने को लेकर यह शोरगुल कोविड-19 और आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ने की वजह से शुरू हुआ है. जीएसटी कलेक्शन में भारी गिरावट आई है.

सरकार ने आधिकारिक बयान में क्या कहा?
बीते गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया, 'जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर में कमी की भरपाई के ​लिए केंद्र सरकार 1.1 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी. इसमें कहा गया कि केंद्र यह मानकर चल रहा है कि सभी राज्य इससे सहमत होंगे. यह उधार उपयुक्त हिस्सों में लिया जाएगा.' मंत्रालय (Ministry of Finance) की तरफ से जारी किए एक बयान में कहा गया कि उधार ली गई राशि को राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के बदले में बैक-टू-बैक लोन के रूप में पारित किया जाएगा.
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केंद्र सरकार ने आगे कहा कि इस प्लान से राज्यों के लिए ब्याज दरों का अंतर दूर होगा ओर उनके लिए इसका प्रबंधन भी आसान होगा. बयान में कहा गया, 'यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि सरकारों (राज्य+केंद्र) की उधारी में कोई इजाफा नहीं होगा. जिन राज्यों को स्पेशल विंडो से लाभ मिलता है, उनके लिए आत्मनिर्भर पैकेज के तहत GSDP के 2% (3% से 5%) की अतिरिक्त उधार सुविधा से काफी कम राशि उधार लेने की संभावना है.

क्या है एक्सपर्ट्स का सुझाव,
EY में मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा, 'इस प्लान के तहत राज्यों के लिए राहत की इकलौती बात यही है कि वो उनके पास यह रकम कम ब्याज दर पर आएगी.' उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जटिलता से बच सकती थी. सबसे सौहार्दपूर्ण रास्ता तो यह होता कि केंद्र सरकार ने राज्यों को दो विकल्प की जगह एक ही विकल्प दिया होता. इस एक विकल्प के तहत कुल रकम का आधा हिस्सा केंद्र सरकार उधार ले और आधा हिस्सा राज्य सरकारें उधार लें. इस प्रकार दोनों पर एक समान बोझ पड़ता.

KPMG  में पार्टनर व नेशनल हेड (अप्रत्यक्ष कर), सचिन मेनन ने कहा कि सरकार का बयान ही भ्रामक है. यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्र की बात पहले से कैसे भिन्न है और 1.1 लाख करोड़ रुपये के लिमिट का ऐलान पहले ही किया जा चुका है.

केंद्र सरकार द्वारा इस नये प्लान के ऐलान के बाद केरल राज्य के वित्त मंत्री थॉमस इसाक (Thomas Issac) ने पूरी क्षतिपूति मांगकर मामले को और हवा दी.
उन्होंने राज्य सरकारों को छोड़कर केंद्र द्वारा खुद उधार लेने के फैसले का स्वागत भी किया.

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क्या है राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति देने की व्यवस्था?
वस्तु एवं सेवा कर पूरे देश के लिए एक ही टैक्स,​ जिसमें अलग-अलग टैक्स स्लैब हैं. इसमें केंद्र सरकार एक्साइज और कस्टम टैक्स को शामिल किया गया है. इसी प्रकार, राज्य स्तर पर वैल्यू एडेड यानी वैट समेत अन्य टैक्स को भी जीएसटी के दायरे में लाया गया है. सभी वस्तुओं एवं सेवाओं को स्लैब्स में बांटा गया है. इसके अलावा 5 कैटेगरी की वस्तुओं - एयरेटेड ड्रिंक्स, पान मसाला, टोबैको, ऑटोमोबाइल और कोयल - पर अतिरिक्त उपकर देय होता है. इन वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त होने वाले उपकर से राज्यों को उनकी रेवेन्यू की क्षतिपूति राशि दी जाती है.

जुलाई 2017 में जीएसटी लागू किए जाने के समय में केंद्र सरकार ने राज्यों को आश्वासन दिया था कि वो नये सिस्टम की वजह से उनके रेवेन्यू में होने वाले नुकसान की भरपाई करेगा. यह व्यवस्था अगले पांच साल यानी 2022 तक के लिए होगी. राज्यों द्वारा क्षतिपूति भुगतान का अनुमान 14 फीसदी की विकास दर पर लगाया गया है. यह

लेकिन इस साल, जीएसटी कलेक्शन के जरिए क्षतिपूर्ति उपकर की रकम का अनुमान 70,000 करोड़ रुपये लगाया गया है. इसमें करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी है और इसी रकम को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों में रस्सकशी चल रही है. पहले केंद्र सरकार ने इस रकम की भरपाई के लिए राज्यों को दो विकल्प दिया था.

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पहला विकल्प: राज्य सरकारें स्पेशल विंडो के तहत 1.1 लाख करोड़ रुपये का उधार लें. राज्यों के लिए वित्त मंत्रालय समन्वय बनाएगा. 1.1 लाख करोड़ रुपये की यह रकम जीएसटी कलेक्शन में कमी की वजह से है. इसमें कोरोना वायरस महामारी का असर शामिल नहीं है. केंद्र सरकार ने कहा है कि इस उधार पर ब्याज की भरपाई उपकर के जरिए की जाएगी. इसके लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर 2022 तक के आगे बढ़ाई जाएगी. राज्यों के लिए यह लोन न तो सर्विस करनी होगी और न ही उन्हें इसका पुर्नभुगतान करना होगा.

दूसरा विकल्प: इसके तहत राज्य सरकार कुल 2.35 लाख करोड़ रुपये की रकम को उधार लेतीं. इस उधार की मूल रकम केंद्र सरकार जमा करेगी. लेकिन, राज्य सरकारों को इन लोन्स पर ब्याज चुकाना होगा.
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