GST काउंसिल में E-Invoice पर हुआ बड़ा फैसला, जानें अब आगे क्या!

GST काउंसिल में E-Invoice पर हुआ बड़ा फैसला, जानें अब आगे क्या!
GST काउंसिल में E-Invoice पर हुआ फैसला, जानें अब आगे क्या!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की 35वीं बैठक में E-Invoice के प्रस्ताव पर फैसला हो गया है. इसको लेकर सिद्धांतिंक मंजूरी मिल गई है.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की 35वीं बैठक में E-Invoice के प्रस्ताव पर फैसला हो गया है. इसको लेकर सिद्धांतिंक मंजूरी मिल गई है. अब माना जा रा है कि कंपनियों के बीच खरीद फरोखत (B2B) के लिये एक केंद्रीकृत सरकारी पोर्टल पर E-Invoice निकालने की प्रस्तावित व्यवस्था 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक के कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए हो सकती है. इस फैसले से सरकार को इनवॉयस के दुरूपयोग को रोकने तथा कर चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.

कारोबारियों और सरकार, दोनों को फायदे की उम्मीद- कंपनियों के बीच कारोबार के लिये इ-इनवॉयस निकालने के लिये कारोबार सीमा 50 करोड़ रुपये तय की जा सकती है. ई-इनवॉयस जनरेट करने के साथ 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाली इकाइयों को रिटर्न फाइल करने और इनवॉयस अपलोड करने के दो काम से राहत मिलेगी. इससे सरकार को इनवॉयस के दुरूपयोग को रोकने तथा कर चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.

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सितंबर से शुरू हो सकती है नई व्यवस्था- मौजूदा सिस्टम में इनवॉयस जनरेट करने और बिक्री रिटर्न भरने के बीच समय का अंतर होता है.

मंथली सेल्स समरी रिटर्न जीएसटीआर 3बी भरने और जीएसटी भुगतान करने वालों की संख्या उन इकाइयों से अधिक है जो सप्लाई रिटर्न जीएसटी-1 भर रहे हैं.

इसमें इनवॉयस के विवरण के साथ विवरण भरा जाता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस डिफरेंस का कारण इनवॉयस अपलोड करने में कठिनाई या फिर इसके पीछे मकसद इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दुरूपयोग है. मंत्रालय इ-इनवॉयस प्रणाली सितंबर से शुरू करने की योजना बना रहा है.
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